बनारस। स्नान-दानका महापर्व मकर संक्रांति इस बार 14 जनवरी को मनाया जाएगा। पिछले साल यह पर्व 15 जनवरी को मनाया गया था। मकर संक्रांति की तिथि पर पिछले कई वर्षों से असमंजस की स्थिति पैदा होती रही है। इस साल यह त्योहार 14 जनवरी को मनाया जाएगा, क्योंकि सूर्यदेव 14 जनवरी को ही दोपहर 1 बजकर 48 मिनट पर धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे इसलिए संक्रांति का स्नान भी दोपहर बाद शुरू होगा और सूर्यास्त तक चलेगा। ज्योतिषियों के अनुसार, मकर संक्रांति का त्योहार सूर्य की गति पर निर्भर करता है। गति के अंतर के कारण इस वर्ष ही नहीं, आने वाले दिनों में आम धारणा के विपरीत संक्रांति पर्व 14 जनवरी को मनाई जाएगी।

 

संक्रांति शाम या रात में तो त्योहार अगले दिन

 

इस सम्बन्ध में ज्योतिषाचार्य लक्ष्मण दास ने बताया कि धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने पर मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। यदि संक्रांति शाम या रात में आती है, तो त्योहार अगले दिन मनाया जाता है। सूर्य की दो गति है – सायण और निरयण। सूर्य की निरयण गति के अनुसार मकर संक्रांति मनाई जाती है। इस आधार पर वर्ष 2070 तक संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी। लेकिन इस वर्ष 2017 में और 21, 25 में यह पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इस बार स्नान 14 जनवरी की दोपहर 1 बजकर 48 मिनट से लेकर सूर्यास्त तक रहेगा।

 

 
तिल दान का विशेष महत्व

 

मकरसंक्रांति में दान-पुण्य का विशेष महत्व है। सुबह स्नान करने के बाद तिल, तिलकुट, गुड़, चूड़ा के साथ चावल और दाल करना उत्तम माना गया है। इससे सुख-समृद्धि की कामना पूर्ण होती है। पवित्र नदी, सरोवर, तालाब में स्नान कर दान करना सर्वोत्तम माना गया है।

 

शुरूहो जाएंगे मांगलिक कार्य

 

मकरसंक्रांति के साथ ही मांगलिक कार्यों पर लगा प्रतिबंध भी खत्म हो जाएगा। संक्रांति के दिन ही खरमास भी समाप्त हो जाता है। इस दिन सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं। उसके बाद फिर से शहनाई की गूंज सुनाई देने लगेगी। शादियों के साथ-साथ गृह प्रवेश, व्यापारिक संस्थान, दुकान का उद्‌घाटन आदि भी होने लगेंगे।

 

सूर्य सिद्धांत के अनुसार पृथ्वी की गति प्रतिवर्ष 50 विकला या दो मिनट पीछे रह जाती है और सूर्य संक्रमण आगे बढ़ जाता है। लीप इयर में दोनों पुरानी स्थिति में आते हैं। इस दौरान सूर्य संक्रमण में 22 से 24 मिनट का अंतर हो चुका होता है। लगभग 80 वर्ष में यह अंतर बढ़ कर 24 घंटे हो जाते हैं। इसी कारण मकर संक्रांति के पर्व की तिथि बढ़ जाती है। पांच सौ साल पहले यह पर्व नौ जनवरी को मनाया जाता था। बाद की सदियों में यह बढ़ता हुआ 15 जनवरी तक पहुंच गया। साल 2017 लीप इयर के बाद आया है इसलिए यह पर्व इस वर्ष 14 जनवरी को ही मनाया जायेगा।
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