बनारस। पीएम नरेन्द्र मोदी ने भले ही गुरुवार को मुम्बई की इंडियन मर्चेंट चैंबर (आईएमसी) की लेडीज विंग की 50वीं सालगिरह पर संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने लोगों की सलाह दी कि उन्हें घर की रजिस्ट्री महिलाओं के नाम पर करानी चाहिए, लेकिन उन्ही के संसदीय क्षेत्र में ढाई साल के मासूम के साथ एक विवाहित महिला अपने पति के घर के बाहर धरना दे रहीं हैं ,क्योंकि उसके पति ने उसे मारपीट कर घर से बेदखल कर दिया गया है और वो महिला अपने बच्चे को लेकर पिछले एक हफ्ते से पुलिस के आलाधिकारियों का चक्कर लगा रही है ,लेकिन जब सफलता नहीं मिली तो आज वो अपने बच्चे के साथ अपने ही ससुराल के गेट पर धरने पर बैठ गयी हैं।

 

बच्चा लगा रहा गुहार, पापा गेट खोल दो
 बंद गेट को पकड़ कर पापा पापा आवाज दे रहा ये बच्चा इस इन्तजार में हैं की घर के अंदर बैठे उसके पापा और दादी उसे बाहर आकर अंदर ले जायेंगे लेकिन ऐसा नहीं हो रहा हैं। मामला वाराणसी के नारिया क्षेत्र का हैं जहां इस बच्चे के साथ इसकी मां अपने पति के घर के बाहर धरना दे रही है। अपने बच्चे के साथ ये महिला यहां आज सुबह से ही धरने पर बैठ गयी हैं।
दरअसल घर के सामने बैठी हुई महिला का नाम रूचि हैं। रूचि ने बताया कि वो लखनऊ की रहने वाली है और उनके पिता एक प्रावेट जॉब करते है। उनका भाई दिव्यांग है। उनके पिता ने उनकी शादी तीन साल पहले वाराणसी के हैदराबाद गेट के पास रहने वाले शिवम मोहले से की थी। रूचि के पिता बीएचयू जैसे बड़े संस्थान में बाबू के पद पर कार्यरत है।
शादी के बाद पता चला पति है शराबी
रूचि ने बताया कि उसकी शादी से पहले ससुराल वालों ने ये बात छुपायी थी कि उनका बेटा शराबी है। शादी के बाद से मारपीट का सिलसिला शुरु हो गया पहले थप्पड़ और अब डंडे से मारा पीटा जाता है इस काम में पति के साथ सास भी शामिल रहती है। रुचि के मुताबिक दो महीने पहले पति और सास ने मारा कि उनका गर्भपात हो गया।

 

रुचि बताती है कि बात तब बिगड़ी जब रूचि ने अपने पति की शारब के लत के विरोध में आवाज उठाई और अपने उपर आये दिन मारपीट को लेकर पुलिस से शिकायत कर दी ताकि पति पुलिस के डर के कारण शराब छोड़ दे लेकिन ठीक इसका उलटा हुआ और पति ने पत्नी को ही घर से निकाल दिया ,तब से रूचि बेघर हैं और इन्साफ के लिए दर दर भटक रही हैं।

12  अप्रैल को निकाला घर से बाहर 

रुचि ने बताया कि मै 8 तारीख़ को लखनऊ गयी थी । उस दिन मुझसे मेरे पति ने मुझसे झगडा किया था जिसपर हमने 100 नंबर डायल कर पुलिस बुलाई थी और उस वक़्त लंका एसो ने लिखित शिकायत मांगी थी । जो मैंने दी थी पर उसके बाद जब मै दो दिन पहले वापस लौटी तो रात के बारह बज रहे थे मैंने आवाज़ लगाई तो घर का दरवाज़ा नहीं खुला ।
मैंने अपने पति को फोन किया तो वो किसी होटल में थे ।बोले की तुम मां को फोन करो मैंने कहा कर चुकी तो बोले कि तुम्हारा मामला है तुम समझो । अब मै दर्द दर की ठोकरें खा रही हूं पर मेरी कही सुनवाई नहीं हो रही है ।
ससुराल पक्ष से मिल रही जान से मारने की  धमकी 
मै चाहती हूं की मुझे और मेरे बच्चे को घर के अन्दर लिया जाए और मुझे और बच्चे को सुरक्षा दी जाए क्योंकि मुझे जान से मारने की धमकी भी दी जा रही है ।
लाख बार कहे की आज के समय में पुरुष और ,महिला साथ साथ चलते हैं लेकिन इस कथन पर वाराणसी के इस महिला की दर्दभरी दास्तां भारी पड़ रहीं हैं। जहां पुरुष का सम्मान कुछ ऐसे अकड़ में है जिसके आगे उसे उसके बच्चे की आवाज भी नहीं सुनाई पड़ रहीं है।
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