बनारस। महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन की हवा पूरे देश मे चल रही थी। लोग अब पराधीनता से स्वाधीनता की तरफ बढ़ना शुरू कर चुके थे।  कहा जाता है बागी बलिया ने अपने को पहले ही आज़ाद कर लिया था। वाराणसी में भी लोगो के मन मे विचार चल रहा था और सबसे पहले इसकी पहल वाराणसी मुख्यालय से लगभग 25 किलो मीटर दूर चोलापुर थाने से हुई। थाने पर तिरंगा फहराने गये आज़ादी के मतवालों पर अंग्रेजों ने गोलिया बरसाई।  जिसमे भारत मां के पांच सपूत शहीद हो गये।  आज़ादी के मतवाले उस दिन क्यों पहुंचे थे थाने ये जानने के लिए टीम livevns चोलापुर पहुंची और आज़ादी के मतवालों के बारे में जानना चाहा तो लोगों कहा ‘ मुल्क एक बार फिर गुलामी की तरफ बढ़ चला है बाबु साहब, अब कैसे आजाद होई’ पेश है चोलापुर से एक ख़ास रिपोर्ट।

 

 
झंडा फहराने थाने पहुंचे आज़ादी के मतवाले 
चोलापुर के आज़ादी के मतवाले स्वतंत्रता सेनानियों की बात बताते हुए प्राथमिक विद्यालय चोलापुर के पूर्व प्रधानाध्यापक जंग बहादुर पाण्डेय ने बताया कि उस समय 9 अगस्त 1942 के दिन पूरे भारत में यह घोषणा हो चुकी थी की अंग्रेजों भारत छोडो।  इसी तारतम्य में 17 अगस्त 1942 में आयर ग्राम से चलकर सेनानियों का जत्था चोलापुर पधारा और झंडा गाड़ने की जिद करने लगे , लेकिन पुलिस इन लोगों के कार्य को सफल होने नहीं देना चाहती थी।  इसके बाद तत्कालीन दारोग रामचंदर सिंह बलवाइयों से वार्ता करना प्रारंभ किया पर इस वार्ता में कोई सहमती नहीं बनी और झड़प शुरू हो गयी।

नागपंचमी के दिन हुआ हादसा 
जंग बहादुर पाण्डेय ने बाते कि 17 अगस्त को नाग पंचमी का त्योहार था वाराणसी में इस दिन दंगल का आयोजन किया जाता है।  जिसमे पहलवानो में कुश्ती लड़ने की प्रतियोगिता होती है। चोलापुर के तेवर गांव में यह आयोजन चल रहा था।  उसू समय आयर गांव के सम्मानित ज़मीदार वीर बहादुर सिंह वहां पहुंचे और उसी आयोजन में उनके मन में चोलापुर थाने पर झंडा फहराने का विचार आया फिर उन्होंने तेवर में चल रहे दंगल से ही ऐलान किया कि आज हम चोलापुर थाने पर तिरंगा फहराने चलेंगे और अंग्रेजो के गुलामी को खत्म करेंगे फिर क्या था उनके साथ पूरा हुजूम चल पड़ा पहलवान भी साथ हो चले।

 

थाने पर नहीं बनी बात, चली गोली  
जंग बहदुर पाण्डेय ने बताया कि जब जत्था चोलापुर थाना पर पहुच तो विद्यार्थी जो वीर बहादुर सिंह के साथ थे। उन्हीने झंडा फहराने की बात की उस समय थाने  के दरोगा रामचंद्र सिंह ने उन्हें रोका तो राम नरेश उपाध्याय उर्फ विद्यार्थी और रामचंद्र सिंह में कहा सुनी हुई और हाथापाई के दौरान एक विद्यार्थी ने दरोगा को जमीन पर पटक दिया तभी वह वह उपस्थित एक सिपाही ने विद्यार्थी पर गोली चला दी और विद्यार्थी वही शहीद हो गए।

 

गोली चलते ही भड़क गयी भीड़ 
गोली से विद्यार्थी को शहीद होता देख वह उपस्थित भीड़ आक्रोशित होकर आगे बढ़ने लगी तब दरोगा रामचंद्र सिंह ने गोली चलाने का आदेश दे दिया सिपाही गोलिया चलाने लगे और लाठीचार्ज भी किया। इस दौरान गोली लगने से वहां दो विद्यार्थी सहित कुल पांच लोग राम नरेश उपाध्याय विद्यार्थी आयर गांव  पंचम आयर,  राम उर्फ बच्चू शिवरामपुर गांव, चौथी शिवरामपुर व निरहू सुलेमापुर गांव के ये लाल भारत मां को आज़ाद करने में शहीद हो गए और कुछ घायल और लोग अपनी जान बचाने के लिए वहां  से निकल गए।

 

ज़मींदार वीर बहादुर सिंह हुए गिरफ्तार 
वीर बहादुर सिंह जो कि आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे उनको व उनके कई साथियो को बंदी बना लिया गया और उनका यह प्रयास वही खत्म हो गया लेकिन जो चिंगारी उन्होंने जलाई थी, वह धीरे धीरे लोगो के मन में जल रही थी और पांच साल बाद जब देश आजाद हुआ और वीर बहादुर सिंह जेल से छूटे तो पूरे में जश्न मनाया गया।

 

1972 में बना स्मारक 
स्वतन्त्रता सेनानियों की शहादत को देखते हुए  1972 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी ने चोलापुर थाने के पास ही शहीद स्मारक के नाम पर पांच ईंटे रखकर शहिद स्मारक बनाने की पहल की जिसे वीर बहादुर सिंह ने चंदा मांगकर कर पूरा किया।  आज भी इस गांव में 17 अगस्त को क्रांति दिवस के रूप मे शाहिद स्मारक पर कार्यक्रम मनाकर गांव के लोग उन शहीदों को याद करते है जो हमे आज़ादी देने के खातिर खुद शाहिद हो गए थे। शत शत नमन है ऐसे वीर सपूतों को जिनकी वजह से हम गुलामी की बेड़िया तोड़ आज़ादी में जी रहे है।

 

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