बनारस। शहनाई के जादूगर की 11 वीं पुण्यतिथि बीत चुकी है।  इस पुण्यतिथि पर सबने उनके मकबरे के न पूरे होने पर रोष जताया पर खां साहब को दिए गए एवार्डों की अगर बात करें तो करीब 100 साल पुराने मकान की छत के नीचे हवा और सीलन में रखे सभी सम्मान दीमकों की भेंट चढ़ रहे हैं। भारत के सभी प्रतिष्ठित एवार्डों से सम्मानित शहनाई के जादूगर को साल 1980 में तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीवा रेड्डी ने पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित किया था पर आज इसी अमूल्य एवार्ड पर दीमकों का कब्ज़ा है और वह समाप्ति की तरफ है। इस दुर्दशा का ज़िम्मेदार परिवार वाले आर्थिक तंगी और सरकार का ध्यान न देना बताते हैं।  पेश है भारत की धरोहर के सम्मान की इस दुर्दशा पर एक विशेष रिपोर्ट।

शहनाई के जादूगर भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की मृत्यु को 11 साल हो चुके हैं।  देश की यह धरोहर जब दुनिया से रुखसत हुई तो आसमान भी खूब रोया था।  उस वक़्त तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने उस्ताद के मकबरे और उनके लिए एक संग्रहालय बनवाये जाने की घोषणा की थी।  11 सालों में उनका मकबरा अभी पूरा नहीं हुआ है और परिवार की लापरवाही की वजह से आज उनको मिले एवार्ड पर दीमक का असर हो गया है।  दीमक उनके एवार्ड की इबारते खाने में मशगूल है और परिवार एवार्ड की जगह बदलने में।

दीवार से उतरकर कमरे में पहुंचे एवार्ड 
उस्ताद के दुसरे नंबर के बेटे नय्यर हुसैन बिस्मिल्लाह के बेटे नासिर अब्बास  ने टीम Livevns को बताया कि हमारा मकान काफी पुराना है। मकान की स्थिति काफी खराब है।  दीवारों पर लगे लगे इन एवार्डों की इबारत में दीमक का घर कब बन गया पता ही नहीं चला।  हमने जब इसे देखा तो उसे ऊपर दादा जान ( बिस्मिल्लाह खां ) के कमरे में ले आये हैं।  जहां इसकी हिफाज़त अन्य एवार्डों के साथ की जा रही है। दादा के एवार्ड की ऐसी स्थिति के बाद हमारी जिलाधिकारी महोदय से अपील है कि वो इसके लिए कुछ करें।

अन्य एवार्डों में भी दीमक लगने का है डर 
नासिर बताते हैं कि हमने इस एवार्ड में लगे दीमकों को निकालने का प्रयास भी किया पर हम यह नहीं कर पाए क्योंकि एवार्ड के खराब होने का डर था। अब हमें अन्य एवार्डों में भी दीमक के लगने का डर है क्योंकि सभी एवार्ड एक साथ रख दिए गए हैं। अगर जल्द ही जिला प्रशासन इसपर ध्यान नहीं देगा तो एवार्ड की स्थिति और भी खराब हो सकती है।

नहीं है रोज़ी रोटी का जरिया 
नासिर हुसैन ने बताया कि अब्बा जान के जाने के बाद हम लोगों ने और हमारे चाचा लोगों ने शहनाई से ही गुज़ारा शुरू किया पर इस वक़्त हमारे यहां रोटी के लाले हैं। शहनाई बजाकर गुज़ारा करना मुश्किल है।

उस्ताद के जर्जर हो चुके मकान में उनका पद्म विभूषण, पद्म भूषण और भारत रत्न सम्मान रखा हुआ है।  ये सभी रख रखाव के अभाव में बदहाली की तरफ बढ़ते जा रहे हैं।  परिवार की लापरवाही ने इसे दीमकों के हवाले कर दिया है।  अब देखना होगा की इस प्रकरण पर जिला प्रशासन और सरकार क्या फैसला करती है और कब उस्ताद की स्मृतियाँ संरक्षित हो पाती है क्योंकि हाल ही में उस्ताद की अमूल्य शहनाइयां उनका पोता चोरी कर बेच चुका है जिसका खुलासा एसटीएफ ने किया था।  
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