बनरस। “उगाओ चांद सब्र से, सूरज लपक लो अब्र से, उठो उठाओ ताज को संभालो राज काज को”  नारी सशक्तिकरण को समर्पित ये चार लाईने शहर की एक गृहणी पर सटीक बैठती है। इस गृहणी ने वो कर दिखाया है जिसके लिए शायद ही कोई गृहणी कभी विचार कर सकती है लेकिन बनारस कि इस गृहणी ने  अपने पति और घर वालों के साथ ही साथ शहर का नाम भी रौशन किया है। पीले तमगे पर एयर पिस्टल से ‘निशाना’ लगाने के बाद से काशी की इस निशानेबाज़ बहु से टीम  Livevns से ख़ास बात की।

आज से 8 साल पहले अखबार में महिलाओं को शूटिंग की न्यूज़ पढ़कर काशी की बेटी और काशी की ही बहु जब रायफल क्लब स्थित शूटिंग रेंज पहुंची तो उसके सपने पंख लगाकर उड़ना शुरू हो गये थे।  इसी बीच पढ़ाई और उसके शादी की वजह से वो शूटीं रेंज से दूर हो गयी और फिर एक मां बनने के बाद उनका सपना कहीं दिल में दब गया पर शूटर पति से जब उसने अपने दिल की बात बताई तो उसने उसका पूरा साथ दिया और आज काशी कि बेटी उस मुकाम पर है जहां पहुंचना सबका सपना होता है। शहर के घौसाबाद इलाके की बहु और हुकुलगंज की बेटी सुप्रिया सिंह ने हाल ही में स्टेट शूटिंग चैम्पियन शिप में पीले तमगे पर निशाना साध अपना और काशी का मान बढाया है।

अखबार से निकला सफलता का मन्त्र 

टीम Livevns  जब सुप्रिया के घर पहुंची तो उन्होंने पारंपरिक और घर की पुराने ज़माने से चली आ रही व्यस्थाओं के बीच हमसे चाय नाश्ते के बार में पूछा और हमारे लिए पानी ले आई। हमने जब उनसे उनकी एक आम लड़की से निशानेबाज़ बहु तक की कहानी जाननी चाहि तो वो पहले तो वो भारतीय नारी के रंग में दिखी और शर्मा कर हसने लगी पर फिर एक स्पोर्ट्स पर्सन की तरह निडर होकर उन्होंने बताया कि आठ साल पहले घर में यूही अखबार में पढ़ा था निशाने बाज़ लड़कियों के बारे में।  अपने अन्दर भी इच्छा जागी और फिर जिले के शूटिंग रेंज पर पहुंच गयी।

शिक्षा ने छुडाया शूटिंग रेंज 

सुप्रिया ने बताया कि उस समय मै हाईस्कूल में थी।  हाईस्कूल से इंटर तक मै बराबर राईफल क्लब जाकर अभ्यास करती रही। स्नातक की पढ़ाई के लिए मैंने काशी हिन्दू विश्वविध्यालय में एडमिशन लिया और मैथ से बीएससी करने लगी।  जिसकी वजह से मुझे शूटिंग रेंज जाने का वक़्त नहीं मिला और मेरी प्रैक्टिस खत्म हो गयी। मै पूरी अरह से पढ़ाई में लग गयी।

प्यार ने शूटिंग को फिर चढ़ाया परवान 

सुप्रिया के पति भूपेन्द्र प्रताप सिंह भी उन दिनों शूटिंग रेंज में हाथ आजमा रहे थे जब सुप्रिया ने शूटिंग शुरू की थी।  इसी बीच दोनों के बीच प्यार भी परवान चढ़ा और दोनों शादी के बंधन में दो साल पहले बंध गये। सुप्रिया का सपना उनके प्यार और पति ने पूरा करवाया। मेरे पति ने मेरे अन्दर के शूटर को वापस से शूटिंग रेंज पहुंचाया है। सुप्रिया ने बताया कि हमारी बच्ची अभी छोटी है इसलिए मै शूटिंग के बारे में सोच नहीं सकती थी लेकिन मेरे पति को जब मेरी इच्छा का पता चला तो उन्होंने मेरे लिए घर के अन्दर ही शूटिंग रेंज का निर्माण करवा दिया।  जिसपर मैंने शूटिंग का अभ्यास उनकी ही देख रेख में शुरू किया।

पति ने बनवाया 10 मीटर का शूटिंग रेंज 

सुप्रिया के निशानेबाज़ पति भूपेन्द्र सिंह ने बताया कि सुप्रिया ने जब दुबारा शूटिंग करने की अपनी इच्छा बताई तो हमारे समाने सबसे बड़ी समस्या बच्ची की परवरिश को लेकर थी क्योंकि अभी वो बहुत छोटी है।  इसलिए मैंने घर की चाट के ऊपर 10 मीटर का एक शूटिंग रेंज बनवाया ताकि सुप्रिया घर में भी शूटिंग कर सके क्योंकि शूटिंग में लगातार 4  घंटे से अधिक का समय एक निशाने बाज़ को प्रैक्टिस में देना पड़ता है। आज सुप्रिया ने अपनी कड़ी मेहनत से पूरे घर का और खासकर के मेरा सम्मान बढ़ाया है। हम सब को इनपर नाज़ है।

 

ससुर ने कहा गर्व है बहु पर 

सुप्रिया के ससुर मकसूदन प्रताप सिंह ने बताया कि हमारी सुप्रिया हमारी बहु नहीं बेटी है। हमारे परिवार में बहु को बेटी का दर्जा है और बहार के लोग क्या कहते हैं और क्या बोलते हैं ऐसे इसबात से फर्क नहीं पड़ता है कि कोई क्या कहता है।  हमारे घर में सिर्फ बेटे थे बहुओं ने आकर हमारी बेटी की कमी पूरी की है।  सुप्रिया ने जब शूटीं की इच्छा जगाई तो हमने सहर्ष स्वीकार करते हुए उन्हें अनुमति दी।  आज हमें उनकी सफलता पर गर्व है।

घर के काम के साथ साथ पीले तमगे पर निशाना 

सुप्रिया बताती है कि पहले मै एक गृहणी हूं इसलिए पहले अपने बहु और पत्नी के साथ अब मै एक मां भी हूं इसलिए समय निकालना शूटिंग के लिए बहुत मुश्किल था पर अपने पति की प्रेरणा से मैंने  मेरठ में 24 से 31 अगस्त तक आयोजित स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में सभी प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ते हुए 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

बनारस में महिला खिलाड़ियों की संख्या पहले ही कम है और शादी के बाद तो महिलाएं पूरी तरह से घर-गृहस्थी में रम जाती हैं। ऐसे में सुप्रिया ने पदक जीत कर दूसरी महिलाओं को न सिर्फ रास्ता दिखाया बल्कि यह संदेश दिया है कि इच्छाशक्ति से हर चुनौती पर विजय प्राप्त की जा सकती है। जनपद के निशानेबाज लंबे अर्से से जिला राइफल क्लब के रेंज को आधुनिक बनाने के लिए प्रशासन से मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर रेंज को आधुनिक बना दिया जाए तो यहां के कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज सामने आएंगे।

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