बनारस। मनोज तिवारी सरकारी दामाद हैं मै नहीं हूं और दुर्भाग्यवश जो सरकार का दामाद होता है वह विश्वविध्यालय का दामाद बन जाता है। उक्त बातें काशी हिन्दू विश्वविध्यालय में एक्टिंग कुलपति से मिलने पहुंचे पूर्व आम आदमी पार्टी नेता और सोशल एक्टिविस्ट योगेन्द्र सिंह यादव ने पुलिस द्वारा सिंह द्वार पर ही रोके जाने के बाद छात्रों के एक प्रश्न की मनोज तिवारी आये थे तो वो अन्दर गये थे के जवाब में दिया।

23 सितम्बर की रात काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्राणगण में चटकी लाठियों की आवाज़ अभी तक विश्वविद्यालय के सिंह द्वार पर सुनी जा रही है। इस घटना के बाद कई सारी जांच समितियां विश्वविद्यालय पहुंचकर छात्राओं पर हुए लाठीचार्ज की पड़ताल कर रही है । इसी बीच आज शहर में मौजूद विश्वविद्यालय ग्रांट कमीशन के पूर्व सदस्य और पूर्व आम आदमी पार्टी के नेता योगेंद्र सिंह यादव को सिंह द्वार पर पुलिस ने रोक लिया वो विश्वविध्यालय के कार्यवाहक कुलपति से यूजीसी की कुछ गाइडलाइन के विषय पर मुलाकात करना चाहते थे।

योगेन्द्र सिंह यादव ने मीडिया से सिंह द्वार पर बात करते हुए कहा कि मै यहां काशी हिन्दू विश्वविध्यालय में एक्टिंग वीसी से मिलने आया था। मैंने उन्हें कल सन्देश भेजा था जिसपर उन्होंने सुबह जवाब दिया की अकेले आइयेगा तो मैंने कहा ठीक है मैअकेला ही आऊंगा आप निश्चिंत रहिये। मै यूजीसी ग्रांट कमिशन में जब मै सदस्य था उस समय के कुछ आदेशों की प्रतियां उन्हें दिखाना चाहता था पर पुलिस ने मुझे सिंह द्वार पर ही रोक लिया।

उस दिन होती महिला पुलिस तो निजाम कुछ और होता
योगेन्द्र सिंह यादव को सिंह द्वार पर रोकने के लिए भारी मात्रा में पुरुष पुलिसकर्मी के साथ साथ महिला पुलिस कर्मी भी मौजूद थी। जिसपर बोलते हुए उन्होंने कहा कि इतनी पुलिस और साथ में महिला पुलिस भी मोजूद है यही महिला पुलिस जब महिलाओं के साथ छेड़खानी हो रही थी तब होती तो निजाम कुछ और होता। आज वह व्यक्ति जो सिर्फ तीन कागज़ लेकर आया है उसे रोकने के लिए इतनी फ़ोर्स कुछ समझ में नहीं आ रहा है।

मनोज तिवारी सरकार के दामाद
विश्वविध्यालय में लाठीचार्ज के बाद वाराणसी पहुंचे दिल्ली भाजपा अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी को विश्वविध्यालय में अन्दर जाने की अनुमति दी गयी थी। छात्रों ने जब देखा की योगेन्द्र सिंह यादव को रोका गया है तो उन्होंने योगेन्द्र को यह बात बताई जिसपर उन्होंने हसकर कहा कि मनोज तिवारी सरकार के दामाद हैं और दुर्भाग्यवश जो सरकार का दामाद होता है वह विश्वविध्यालय का दामाद बन जाता है।

एस सी कैस को नहीं मानता बीएचयू
योगेंद्र सिंह ने अपने साथ लाये यूजीसी के दस्तावेज़ों को पढ़ते हुए बताया कि यूजीसी गाईडलाइन ऑन स्टूडेंट इंटाइटमेंन्ट यानी एक स्टूडेंट के किसी विश्वविद्यालय में क्या अधिकार हैं का नियम साल 2012 में बना था। जिसके नियम संख्या 5 में साफ़ साफ़ लिखा है कि स्टूडेंट का यह अधिकार है की उनका लिंग के आधार पर कोई भेद भाव न हो यदि उनके साथ ऐसा होता है तो विशाखा गाइडलाइन के अनुसार विश्वविद्यालय इस मामले को एस सी कैस कमेटी को भेजा जाए। जिसे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय नहीं मानता और कहता है कि यह हमारे लिए नहीं है यह अन्य विश्वविद्यालयों के लिए है जबकि इसमें साफ़ साफ़ लिखा है सभी विश्वविद्यालय।

सूचना लेने से डर रहे हैं
हर विद्यार्थी को अधिकार है कि उसके ग्रीवेंस का रिड्रेसल हो। यह बताया गया है यूजीसी प्रोमाशन ऑफ़ एक्यूटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन में, इसमें स्पष्ट लिखा हुआ है कि यदि कोई शिकायत होती है तो उसे रेक्टर देखेगा जिसे आज तक रिक्रूट ही नहीं किया गया है। ग्रीवांस कमेटी बनानी होगी जिसके ऊपर एक रिटायर्ड जज होगा। जिसका मुख्य कार्य है की सेक्सुअल हरेस्मेंट के मामलों को ख़त्म करना पर आज तक उसका भी निर्माण नहीं हुआ जबकि नियम बने 6 साल हो गये। ये सूचना मै इन्हें देना आया था पर ये इसे भी लेने से डर रहे हैं।

विश्वविद्यालय क्यों नहीं जारी करता एक्शन रिपोर्ट
योगेंद्र सिंह यादव ने ने कहा कि सबसे बड़ा मुद्दा तो यहां यह है कि जिस महिला विद्यार्थी की छेड़खानी से यह मामला शुरू हुआ वह अपराधी आज तक नहीं पकड़ा गया। इसके अलावा कई सारी छेड़खानी की छात्राओं ने लिखित शिकायत की है लेकिन आज तक क्या एक्शन लिया गया किसी को नहीं मालूम। नई प्राकटर अच्छी बातें करती है पर वो क्या एक एक्शन रिपोर्ट जारी करेंगी। साथ ही साथ यदि विश्वविध्यालय की गलती मान ली गयी है तो फिर 1200 छात्रों पर मुकदमा क्यों यह सीधे से छात्रों को जब मौक़ा मिले तब उन्हें परेशान करने का ज़रिया है।

पत्रकारों पर लाठीचार्ज घिनौनी हरकत
घिनौनी हरकत है पत्रकारों पर लाठी चार्ज। अगर पत्रकार न होते तो वो सच पर पर्दा दाल देते लेकिन यह सोचने वाली बात है कि आखिर कौन सी बात या सच था जिसे छुपाने के लिए पत्रकारों पर भी लाठी उठानी पड़ी।

 

 

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