बनारस। वाराणसी के चर्चित सिकरौरा नरसंहार काण्ड में गुरूवार को अहम् फैसला देते हुए अतिरिक्त जिला जज प्रथम पीके शर्मा ने माफिया से माननीय बने एमएलसी बृजेश सिंह को बालिग़ मान लिया है। अब उनके विरुद्ध कोर्ट में ट्रायल शुरू होगा। जिसमें अगली तिथि 23 अक्टूबर निर्धारित करते हुए न्यायालय ने गवाह के रूप में सपा के सकलडीहा विधायक प्रभु नारायण सिंह और मुकदमा वादिनी हीरावती देवी को गवाह के रूप में तलब किया है। इस कार्रवाई में जाने-माने समाजसेवी राकेश न्यायिक ने अहम भूमिका निभाई है।

 

समाजसेवी राकेश न्‍यायि‍क

मामले में वादि‍नी हीरावती

सिकरौरा काण्ड में लम्बे समय से चल रही बहस जि‍समें, बृजेश सिंह बालिग़ थे या नाबालिग इसपर आज विराम लग गया। सुनवाई करते हुए अतिरिक्त जिला जज प्रथम ने उन्हें बालिग मानते हुए ट्रायल शुरू करने का आदेश जारी कर दिया।

 

बृजेश सिंह ने क्यों दिया था इस काण्ड को अंजाम
ये कहानी सर्ववि‍दि‍त है कि‍ पिता की हत्या ने बृजेश को माफिया डॉन बना दिया था। बृजेश सिंह का उनके पिता रविंद्र सिंह से काफी लगाव था। वह चाहते थे कि बृजेश पढ़ लिखकर अच्छा इंसान बने। समाज में उसका नाम हो। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
पि‍ता की हत्‍या के बाद पकड़ा जरायम का रास्‍ता
27 अगस्त 1984 को वाराणसी के धरहरा गांव में बृजेश के पिता रविन्द्र सिंह की हत्या कर दी गई। इस काम को उनके सियासी विरोधी हरिहर सिंह और पांचू सिंह ने साथियों के साथ मिलकर अंजाम दिया था। राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई में पिता की मौत ने बृजेश सिंह के मन में बदले की भावना को जन्म दिया। इसी भावना के चलते बृजेश ने जाने अनजाने में अपराध की दुनिया में अपना कदम बढ़ा दिया।

 

खेली जाने लगी खून की होली
27 मई 1985 को पि‍ता रविंद्र सिंह का हत्यारा बृजेश के सामने आ गया और उसे देखते ही बृजेश का खून खौल उठा। उसने दिन दहाड़े अपने पिता के हत्यारे हरिहर सिंह को मौत के घाट उतार दिया। यह पहला मौका था जब बृजेश के खिलाफ पुलिस थाने में मामला दर्ज हुआ। हरिहर को मौत के घाट उतारने के बाद भी बृजेश सिंह का गुस्सा शांत नहीं हुआ। उसे उन लोगों की भी तलाश थी जो उसके पिता की हत्या में हरिहर के साथ शामिल थे। इसके बाद 9 अप्रैल 1986 के दिन जब अचानक बनारस का सिकरौरा गांव बदले की आग जलते हुए गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा।

 

टॉप 10 डॉन में शामि‍ल हुआ नाम
दरअसल, यहां बृजेश सिंह ने अपने पिता की हत्या में शामिल रहे पांच लोगों को एक साथ गोलियों से भून डाला था। इस वारदात को अंजान देने के बाद पहली बार बृजेश गिरफ्तार हुए और इस घटना के बाद बृजेश देश के सबसे बड़े डॉन की फेहरिस्त में शामिल हो गये।

 

अब कानून कसेगा शि‍कंजा
इसी काण्ड में आज जिला अदालत ने उस समय के बनारस और अब चंदौली ज़िले के थाना बलुआ के सिकरौरा गांव के इस चर्चित हत्याकांड में बृजेश सिंह को बालिग़ मानते हुए ट्रायल शुरू करने के आदेश दे दिए हैं।
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