BHU की तरह हो सकते हैं वाराणसी के इस विश्वविद्यालय के हाल, 5 दिन से छात्र, शिक्षक और कर्मचारी धरने पर  

BHU की तरह हो सकते हैं वाराणसी के इस विश्वविद्यालय के हाल, 5 दिन से छात्र, शिक्षक और कर्मचारी धरने पर  

बनारस। राष्ट्रपति ने आज राज्यपालों और उप राज्यपलों के साथ की गयी कांफ्रेंस में कहा कि विश्वविद्यालयों में कुलपति की नियुक्ति के लिए योग्य व्यक्ति का चुनाव कर उसकी नियुक्ति समय पर करें।  इस कांफ्रेंस के पहले शिक्षा की नगरी काशी एक बार फिर छात्र आंदोलन की तरफ बढ़ चली है। जहां काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में कुलपति के संवादहीन रवैये से इतना बड़ा बवाल हुआ वहीं डॉ सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में भी 5 दिन से छात्र, कर्मचारी और शिक्षकगण अलग अलग मांगों के साथ धरने पर बैठे हैं लेकिन अभी तक कुलपति प्रोफ़ेसर यदुनाथ दूबे इनसे मिलने नहीं पहुंचे हैं।

डॉ सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय जहां पढ़ाई के लिए भारत के हर कोने के साथ साथ विदेश से भी छात्र आतें है आज उसका प्रांगण धरनास्थल बना हुआ है।  अचम्भे वाली बात यह है कि कुलपति से नाराज़ होकर सिर्फ छात्र ही नहीं विश्वविद्यालय के शिक्षक और कर्मचारी भी धरना दे रहे हैं। पिछले 5 दिनों से चल रहे इस धरने की वजह से कोई भी शैक्षणिक कार्य सुचारू रूप से नहीं हो रहा और नाही कोई प्रशासनिक कार्य हो रहा है लेकिन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर यदुनाथ दूबे की तरफ से अभी तक किसी भी तरह कोई सार्थक  पहल नहीं की गयी है। इस धरना प्रदर्शन की वजह से कक्षाएं भी सही से नहीं चल रही हैं।  इससे नाराज़ छात्र भी मुहं पर काली पट्टी बांधकर धरने पर बैठे हुए हैं।

 

छात्र सुविधा के नाम पर इस विश्वविद्यालय में नहीं है।  इस विश्वविद्यालय के अंदर किसी भी फैकेल्टी में कहीं भी कोई शौचालय नहीं है।  जबकि यहां सैंकड़ों महिला छात्राएं पढ़ती भी हैं और रोज़ आती जाती भी हैं। उक्त बातें चार सूत्रीय मांग को लेकर धरने पर बैठे छात्रों में से एक पीएचडी छात्र विनय कुमार मिश्रा ने कही। उन्होंने बताया कि हम छात्र अपनी चार सूत्रीय मांग के साथ पिछले 5 दिनों से बैठे हैं।  हमने कुलपति से मिलना चाहा पर उन्होंने हमसे बात तक करना उचित नहीं समझा।  यहां के छात्रावासों की भी स्थित दयनीय है उसकी शिकायत की पर उसमे भी कोई सुधार नहीं है। शौचालय हैं पर इस्तेमाल लायक।  इन सब को सुचारू करने की मांग के साथ हम सभी धरने पर हैं ताकि कुलपति हमारी समस्या सुने पर आज तक वो हमसे मिलने नहीं आये और न हमें बुलाया।

 

शिक्षा के इस घर के एक कोने में प्रशासनिक भवन के पास यहां के शिक्षक भी धरने पर अपनी मांगों के साथ बैठे हैं। धरने पर बैठे वरिष्ठ प्रोफ़ेसर जितेंद्र कुमार ने बताया कि यूजीसी ने 2016 में अपना गजट जारी किया उसके बाद 2017 अप्रैल को उत्तर प्रदेश सरकार ने अपना आदेश जारी किया उसके बाद 5 सितमबर को माननीय  राज्यपाल ने अपना भी आदेश जारी कर दिया।जिसके बाद वह आदेश मान्य होता है पर विश्वविद्यालय में कुलपति की मनमानी से पुराने नियम कायदे लगाए और चलाए जा रहे हैं। जिसके द्वारा वो अयोग्य लोगों की नियुक्ति हो रही है।  जिसके विरोध में हम लोग इस धरने पर बैठे हैं।

 

वहीं इस प्रांगण में दिन रात सेवाएं देने वाले कर्मचारी भी अपनी मांगों के साथ धरने पर बैठे हुए हैं। हमारी मूल समस्या हमारी आजीवीका पर संकट है। इस सम्बन्ध में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कर्मचारी संघ के महामंत्री प्रदीप कुमार पांडेय ने हमें बताया कि  हम पिछले सात महीने से कुलपति महोदय से अपनी वेतन विसंगतियों के बारे में धरने पर बैठे हैं।  हमने पहले भी उनसे मांग की तो उंन्होने साफ़ कहा की न हम इसे सही कर सकते हैं और नाही आगे इसे कर सकते हैं। हम पिछले 5 दिनों से इसके लिए धरने पर बैठे हैं पर आज तक कुलपति जी न हमसे मिलने आये और नाही उन्होंने कोई कोशिश की कि हमारा धरना समाप्त हो जाए। उन्होंने हमारी समय न समझने की कोई पहल नहीं की है और नाही उसे ख़त्म करने की कोई पहल की है।

 

कुलपति की संवादहीनता से जल उठा था बीएचयू
डॉ सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रांगण में चल रहे इन तीनो धरने में मांग यही है कि कुलपति आएं और हमारी समस्या का समाधान करें पर 5 दिन बाद भी कुलपति मौके पर नहीं पहुंचे हैं।  ऐसी ही संवादहीनता का दंश बीएचयू ने हाल ही में  झेला है जब उनके ना आने पर छात्राओं का धरना उग्र होता गया और अंत में लाठीचार्ज के सहारे खत्म कराया गया था।  यह कहना गलत न होग कि डॉ सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में भी कुलपति की संवादहीनता विकराल रूप ले सकती है यदि समय रहते कुलपति अपनों के बीच नहीं पहुंचे तो।
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