बनारस। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में विकास का पहिया पिछले तीन सालों से घूम रहा है।  अब प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में उनकी महत्वकांक्षी योजना प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का लाभ लेकर गरीब मज़दूर अब मालिक बन रहे हैं और अपना रोज़गार स्वयं चला रहे हैं।  ग्रामीण अंचलों में बनारस की शान बुनकारी के मज़दूर अब खुद करघे के मालिक बने हैं और उससे अपनी आजीवीका चला रहे हैं।  पेश है एक ख़ास रिपोर्ट।

प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के मजदूर अब मालिक बन रहे है और इस मजदूर से मालिक बनाने में सबसे बड़ी भूमिका अगर किसी ने निभाई  है तो वह खुद उनके सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने,  उनके द्वारा शुरू की गयी प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने गरीबो के जीवन स्तर में बड़ा बदलाव किया है। वाराणसी के काशीविद्यापीठ ब्लॉक के मंगलपुर  के बुनकर मुंतजिर अहमद और साबिर अली ने शायद कभी सोचा भी न था की उनकी खुद की मशीन भी होगी। मुद्रा योजना से से लोन लेकर आज वह अपने घर में हैंडलूम मशीन लगाकर अच्छी आमदनी कर रहे है और अपना लोन समय से चुकता कर रहे है।

 

इस सम्बन्ध में साबिर अली ने बताया कि पहले हम दूसरों के लूम और हथकरघों पर मज़दूरी किया करते थे।  उस समय हमें दिन भर काम करने पर 100 रूपये मिलते थे लेकिन अब अपनी मशीन से काम करने पर दुगना फायदा हो रहा है। हम अपने परिवार की अजीवीका भी सही से चला पा रहे हैं। पहले सिर्फ 100 रूपये दिन की आमदनी से खर्च नहीं चलता था और अब इतनी कमाई हो रही है की हम घर के खर्च के साथ साथ मुद्रा योजना के तहत मिले लोन को भी वापस कर पा रहे हैं। इसी तरह मुद्रा योजना के लाभार्थी मुन्तज़िर अली ने बताया कि हमने मुद्रा योजना के अंतर्गत लोन लेकर एक हथकरघा लगाया है अब जल्द से जल्द इसे पूरा कर एक और हथकरघा लगवाकर अपना व्यापार बढ़ाऊंगा।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत लोन देने वाले बैंक ऑफ बड़ौदा के सहायक महा प्रबंधक ने बताया की अबतक हमने इस योजना में जिले में इस वित्तीय वर्ष में 1227 लोगो को 33 करोड़ का लोन उपलब्ध कराया है।  बुनकरों को इस योजना में सरकार अतिरिक्त 10000 रूपये की सब्सिडी दे रही है और उनका ब्याज भी मात्र 6 % ही है। उन्होंने बताया की इस योजना में अबतक हमने इस वित्तीय वर्ष में 78 बुनकरों को लोन दिया है आगे भी करीब 200 से 250 बुनकरों को लोन देंगे।  हमें ख़ुशी है की बुनकर समय से लोन चुकता भी कर रहे है। 

 

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