वाराणसी में बेटी पंचायत में उठी आवाज़, बेटियों को चाहिए जन्म और सुरक्षा का अधिकार 

वाराणसी में बेटी पंचायत में उठी आवाज़, बेटियों को चाहिए जन्म और सुरक्षा का अधिकार 

बनारस। बदलते हालत में अब बेटियां किसी से कम नहीं है लेकिन आज भी बेटियों को उन अधिकारों से वंचित रखने का प्रयास किया जाता है जो उन्हें मिलना ही चाहिए ।
महिलाशक्तिकरण के इस वैश्विक दौर में अब युवतियां अपने जन्म, सुरक्षा और अधिकार की मांग बेटी पंचायत के माध्यम से उठा रही है। जिसकी आवाज को वर्षो से बेटी के जन्म लेने के अधिकार की लड़ाई लड़ रही सामाजिक संस्था आगमन प्रदेश और केंद्र सरकार तक पहुंचाने की ठानी है।
ऐसी ही एक बेटी संसद के गठन के लिए बेटी पंचायत का आयोजन आज सोनारपुरा स्थित दुर्गाचरण बालिका इंटर कॉलेज में किया गया। जिसमें कक्षा नौ से बारहवीं की छात्राओं ने अपने अपने प्रभावी विचार रखे। बेटियों को बचाने की मुहीम में लगी संस्था आगमन के इस प्रयास की पूरे शहर में प्रशंसा हो रही है।

आगमन संस्था के तत्वाधान में आयोजित इस बेटी पंचायत में चर्चा के दौरान बेटियों ने कन्या भ्रूण ह्त्या जैसी कुरीति के खिलाफ आवाज उठाई तो किसी ने महिला सुरक्षा को लेकर अपने विचार रखे और समाज में बेटियों कैसे सुरक्षित हो इस पर चर्चा की।  जन्म और सुरक्षा के साथ बेटियों ने खुद के अधिकार को कैसे पाए इस मुद्दे को भी इस पंचायत के माध्यम से उठाया गया । 
निर्णायक मंडल में स्कूल की प्रधानाचार्य डॉ पद्मजा शर्मा, उप प्रधानाचार्य डॉ शिखी सिंह, चिकित्सक डॉ मोनिका गुप्ता और शिक्षाविद्द डॉ शालिनी शाह ने 11 बेटी दूत का चयन किया। इन बेटी दूत में रिज़वाना खानम, फलक जहां, सोनाली यादव, अर्पिता अग्रहरी, अकांक्षा कुमारी, निशा मौर्या, श्रेया चौरसिया, पिंकी कुमारी, प्रियंका यादव, लाहिबा नूर और एरम खानम है।

 

इस पंचायत का हिस्सा बानी छात्रा रिज़वाना खानम ने बताया कि महिलाओं को हमेशा दबाकर रखा जाता है।  पैगम्बर साहब के पहले अरब में बच्चियों को जन्म लेते ही ज़िंदा गाड़ने की प्रथा थी पर उनके जन्म के बाद उन्होंने लड़कियों को बराबर का हक़ दिया लेकिन आज भी कुछ लोग महिलाओं को हे दृष्टि से देखते हियँ हमारी पढ़ाई लिखाई को रोका जाता है।  जिसके लिए एक बेटी संसद की बहुत आवश्यकता है कम से कम हम इसमें अपनी आवाज़ तो उठा सकेंगे।

कार्यक्रम का नेतृत्व संस्था के संस्थापक सचिव डॉ संतोष ओझा ने किया।  उन्होंने कहा कि बेटियां हमारे समाज पूजी तो जाती हैं पर कोई बेटी का जन्म अपने घर में नहीं चाहता क्योंकि लोग बेटियों को बोझ समझते हैं जबकि यह मान्यता सही नहीं है।  बेटियां हमेशा लड़कों के बराबर रही है।  हमारे सामने काशी की धरती की बेटी रानी लक्ष्मीबाई का उदाहरण मौजूद है लेकिन लोग इससे सीख नहीं ले रहे हैं इसलिए हम बेटी संसद की तरफ क़दम बढ़ा रहे हैं।  जिसेक लिए आज बेटी पंचायत की गयी है।

 

इस मौके पर स्कूल की प्रिंसिपल ने बेटियों को मजबूत इरादो वाली बनने की सीख दी तो वही अतिथि द्वय डॉ मोनिका गुप्ता और डॉ शालिनी शाह ने बेटियों को लक्ष्य निर्धार्रित करने के साथ अपनी बातों को मजबूती रखने की सीख दी कार्यक्रम में जादूगर जितेंद्र और किरण के साथ हरिकृष्ण प्रेमी,रजनीश सेठ, राजकृष्ण गुप्ता, संजय संजू, हरीश शर्मा, मासूम अली ने सहयोग किया ।
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