बनारस। देखते-देखते 11 हफ्ते बीत गये हैं, वरि‍ष्‍ठ आईएएस अफसर और वाराणसी के डि‍स्‍ट्रि‍क्‍ट मजि‍स्‍ट्रेट योगेश्‍वर राम मि‍श्र को बच्‍चों की क्‍लास लेते हुए। अब तो बच्‍चे भी हर शनि‍वार को अपने इस स्‍पेशल टीचर का इंतजार करने लगे हैं।

 

हम सब खुद को भले ही बेहद बि‍ज़ी (अरे यार टाइम ही नहीं है/ यार मरने की भी फुरसत नहीं है/ बहुत बि‍जी लाइफ हो गई है यार) कहकर कई जरूरी कामों से जी चुराते हों लेकि‍न यकीं मानि‍ए शहर के सबसे व्‍यस्‍त इंसान के लि‍ए नि‍यत समय पर बच्‍चों की क्‍लास लेना कोई खेल नहीं है। बावजूद इसके वह ऐसा कर रहा है और बि‍ना रुके तथा लगातार…।


जी हां, वाराणसी के जि‍लाधि‍कारी अपने गोद लि‍ये स्‍कूल में हर बार की तरह इस बार भी बि‍ल्‍कुल राइट टाइम पहुंचे। अर्दलीबाजार स्थित एलटी कालेज परिसर के पूर्व माध्यमिक विद्यालय एवं प्राथमिक विद्यालय में अपने इस बेहद बि‍ज़ी लेकि‍न डि‍वोटेड टीचर के लि‍ए नन्‍हें वि‍द्यार्थी भी अच्‍छे बच्‍चों की तरह उनके आने का इंतजार करते हैं।

 

हम आपको बता दें कि‍ डीएम यहां बच्‍चों को मैथ पढ़ाते हैं और वो भी बि‍ल्‍कुल अनोखे अंदाज में। अब आईएएस अफसर हैं तो जाहि‍र सी बात है कि‍सी भी सब्‍जेक्‍ट को पढ़ाना उनके लि‍ए कोई मुश्‍कि‍ल काम नहीं है। बावजूद इसके मैथेमेटि‍क्‍स पढ़ाने के पीछे उद्देश्‍य ये है कि‍ गणि‍त सभी वि‍षयों में से सबसे खास वि‍षय है जि‍सकी जरूरत बच्‍चों को उनके भवि‍ष्‍य में पग-पग पर पड़नी है।

अपने गोद लिये सरकारी विद्यालय में लगातार ग्यारहवें सप्ताह भी बच्चों को मैथ पढ़ाते हुए डीएम योगेश्‍वर राम मि‍श्रा ने कई सवाल भी पूछे, साथ ही साथ वि‍द्यालय में पढ़ाए जा रहे अन्‍य वि‍षयों की गुणवत्‍तों को भी बच्‍चों के जरि‍ए टटोलते रहे।


इस दौरान जिलाधिकारी ने गणित के कई सवाल बच्चों को ब्लैकबोर्ड पर लिखकर समझाया। यही नहीं उन्‍होंने बच्‍चों से उन सवालों के हल भी अपने सामने कराया।

इस शनि‍वार सबसे खास बात यह रही कि‍ उन्‍होंने अपने स्‍कूल के बच्‍चों को स्‍कूली बैग भी बांटे। वहीं बच्‍चे भी जिलाधिकारी के हाथों बैग पाकर चहकते दि‍खे।


कुछ अत्‍यधि‍क समझदार लोगों को ऐसा लग सकता है कि‍ सि‍र्फ फोटो खिंचाने के लि‍ए ऐसी कवायदें अक्‍सर अफसरों द्वारा की जाती रही हैं। तो ऐसे वि‍द्वान लोगों को बताना उचि‍त होगा कि‍ वाराणसी के जि‍लाधि‍कारी अपनी कक्षाओं के दौरान दुनि‍या-जहां और प्रशासनि‍क झंझटों से दूर पूरे एक घंटे तक बच्‍चों, कि‍ताबों और मैथेमेटि‍क्‍स में डूबकर पढ़ाते हैं। इस बीच कि‍सी भी तरह की डि‍स्‍टर्बेंस उन्‍हें मंजूर नहीं होती। आज उन्‍होंने क्‍लास 6 को मैथ पढ़ाया वो भी पूरे एक घंटे तक।

यह भी बता दें कि‍ जिलाधिकारी द्वारा इस विद्यालय को गोद लिये जाने के बाद से ही इसकी गुणवत्‍ता में निरन्तर सुधार हो रहा है। इतना ही नही बच्चे भी अब अपने कलेक्टर टीचर के आने का इन्तेजार करते रहते हैं। अब तो मैथ के इस टीचर को अपने बच्‍चों के नाम भी याद हो गये हैं। ये टीचर अपने स्‍टूडेंट्स को अगले हफ्ते के लि‍ए होमवर्क भी देता है।

 

खैर ये न्‍यूज यहां सि‍र्फ इसलि‍ए दी गई ताकि‍ आप और हम भी ऐसी पहल के लि‍ए गंभीरता से वि‍चार करें और अपनी व्‍यस्‍तता (जो शायद वाराणसी जैसे जि‍ले के जि‍लाधि‍कारी से कम ही है) के बीच समाज के लि‍ए भी समय नि‍कालें। और हां…ध्‍यान रहे हमारी पहल गंभीर और ईमानदार होनी चाहि‍ए, ना कि‍ सि‍र्फ फोटो शूट के लि‍ए।
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