बनारस। व्रत और त्योहारों की नगरी काशी में दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। श्री कृष्ण यादव महासभा व गोवर्धन सेवा समिति के तत्वाधान में कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोर्वधन पूजा की मान्यता अनुसार विशाल शोभा यात्रा लहुराबीर चौराहे से निकाली गई जो खिड़कियां घाट स्थित गोवर्धन धाम पर समाप्त हुई। इस शोभा यात्रा में साथ चल रही झांकियां आकर्षक का केंद्र रहीं।

गोवर्धन सेवा समिति के उमाकांत यादव ने बताया कि गोवर्धन पूजन के ही जरिये भगवान् श्री कृष्ण ने मानवता का सन्देश दिया था। इस ख़ास पर्व को वाराणसी के यदुवंशी सम हर्षोल्लास के साथ मनाता है। इस मौके पर शहर के लहुरावीर स्थित आजाद पार्क से श्री कृष्ण यादव महासभा व गोवर्धन सेवा समिति के संयुक्त तत्वाधान विशाल शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में पारम्परिक वेषभूषा में यदुवंशी समाज के लोगो ने लाठी-डंडो के जरिये युद्ध कला का प्रदर्शन किया।

गोवर्धन यात्रा से जुड़ी तस्‍वीरें


श्री कृष्ण यादव महासभा व गोवर्धन सेवा समिति के सदस्य शशिकान्त यादव बताते है कि वर्षों पुरानी इस परंपरा का यादव समाज आज भी उसी प्रकार निर्वहन करता आ रहा है।बताया कि आज के दिन ही भगवान इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिये लीलाधर कृष्ण भगवान ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगलि पर उठाया था। सैकड़ों सालों पुरानी इस परम्परा को निभाते हुए गोवर्धन पूजा पर लहुराबीर से खिड़किया घाट तक शोभा यात्रा निकाली गयी जिसमे देवी-देवताओं की झांकी गाजे-बाजे के साथ निकाली गयी।

 

एक पुरानी कहावत के अनुसार ऋषि पुलस्त गोवर्धन पर्वत को लेकर काशी में स्थापित करने के लिए जब चले तो रास्ते मे थकान के कारण उसे ब्रज में रख दिया जिसके बाद गोवर्धन पर्वत वहीं पर स्थापित हुआ और तब से गोवर्धन पूजा की परंपरा का शुरुआत होने लगा।
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