बनारस। प्रदेश की योगी सरकार ने अफसरों के लि‍ए एक बार फि‍र से एडवाइजरी जारी की दी है। प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी राजीव कुमार की ओर से जारी एडवाइजरी के अनुसार अफसरों को अब वि‍धायकों और सांसदों के लि‍ए सामान्‍य शि‍ष्‍टाचार का पालन हर हाल में करना होगा।

 

दरअसल, योगी सरकार ने 14 नवंबर 2007 में बने नि‍यमों को 18वीं बार दि‍शानि‍र्देशों के रूप में जारी कि‍या है। जि‍समें 17 जुलाई 2013 को सामान्‍य प्रशासन अनुभाग के शासनादेश को स्पष्‍ट रूप से उल्‍लेखि‍त करते हुए सभी एडि‍शनल चीफ सेक्रेटरी, प्रिंसि‍पल सेक्रेटरी, सेक्रेटरी, डीजीपी, मंडलों के कमि‍श्‍नर, जि‍लों के डीएम, जि‍लों के वरि‍ष्‍ठ पुलि‍स अधीक्षक, जि‍लों के पुलि‍स अधीक्षक और सभी वि‍भागों के वि‍भागाध्‍यक्ष तथा कार्यालयध्‍यक्ष के नाम पत्र भेजा गया है।

जताई गई है चिंता

एडवाइजरी में शासन की ओर से चिंता व्‍यक्‍त करते हुए कहा गया है कि‍ संसद सदस्‍यों और राज्‍य वि‍धानमंडल (वि‍धानसभा और वि‍धानपरि‍षद्) के सदस्‍यों के प्रति‍ सामान्‍य शि‍ष्‍टाचार, प्रोटोकाल और सौजन्‍य प्रदर्शन का पालन नहीं कि‍या जा रहा है। जि‍सकी शि‍कायतें सांसद और वि‍धायकों की ओर से शासन को मि‍ल रही हैं।

इस संबंध में 8 दि‍सम्‍बर 2011 को भारत सरकार के कार्मि‍क, लोक शि‍कायत तथा पेंशन मंत्रालय के अर्धशासकीय पत्र का हवाला दि‍या गया है। अफसरों को इस पत्र से संदर्भ ग्रहण करने के लि‍ए कहा गया है जि‍समें प्रशासन तथा सांसद और वि‍धायकों के बीच सरकारी व्‍यवहार में शि‍ष्‍टाचार का पालन करने के दि‍शा-नि‍र्देश उल्‍लि‍खि‍त हैं।

कि‍न-कि‍न अफसरों के लि‍ए है नि‍र्देश

पत्र में कहा गया है कि‍ 17 जुलाई 2013 को सामान्‍य प्रशासन अनुभाग के शसनादेश के अनुसार सांसदों और वि‍धायकों को कोटि‍क्रम 22 तथा 22अ में रखा गया है। जि‍सके अनुसार राज्‍य के मुख्‍य सचि‍त, अध्‍यक्ष, राजस्‍व परि‍षद्, एडवोकेट जनरल, लोक सेवा आयोग के अध्‍यक्ष, सदस्‍य, राजस्‍व परि‍षद, अध्‍यक्ष लोकसेवा अधि‍कारण, वि‍श्‍ववि‍द्यालयों के कुलपति‍, कमि‍श्‍नर, सचि‍व, पुलि‍स महानि‍रीक्षक, वि‍शेष सचि‍व, जि‍लाधि‍कारी, पुलि‍स अधीक्षक, मुख्‍य चि‍कि‍त्‍साधि‍कारी आदि‍ सभी अधि‍कारी वि‍धायकों से कोटि‍क्रम में नीचे हैं।

अफसरों को क्‍या करना होगा

इस एडवाइजरी को जारी करते हुए शासन ने स्‍पष्‍ट कि‍या है कि‍

(1) सभी अधि‍कारि‍यों द्वारा जनप्रति‍नि‍धि‍यों (सांसद और वि‍धायकों) के पत्रों को एकनॉलेजमेंट के साथ स्वीकार करना होगा, उनपर शीघ्रता से काम करना होगा, कार्यवाही से जनप्रति‍नि‍धि‍यों को अवगत कराना होगा।

(2) जनप्रति‍नि‍धि‍यों के फोन आने पर कॉल रि‍सीव करना होगा। मीटिंग में होने अनुपलब्‍ध होने पर कॉल की जानकारी होने पर प्राथमि‍कता पर उन्‍हें कॉल बैक करना होगा।

(3) यदि‍ जनप्रति‍नि‍धि‍गण जनहि‍त से जुड़े कार्यों को लेकर उनसे मुलाकात करते हैं तो उन्‍हें सम्‍मान दें। अपनी सीट से खड़े होकर उनका स्‍वागत करें, उनसे जलपान के लि‍ए आग्रह करें।

(4) उनसे बात करते समय अधि‍कारी यदि‍ उनके अनुरोध या सुझाव को स्‍वीकार करने में असमर्थ हों तो अधि‍कारी द्वारा अनुरोध को स्‍वीकार न कि‍ये जाने के कारणों से उन्‍हें वि‍नम्रतापूर्वक अवगत कराएं।

(5) यह भी कि‍ वह जनप्रति‍नि‍धि‍यों को खड़े होकर सम्‍मानपूर्वक उन्‍हें वि‍दा करें।

 

शासन की ओर से जारी दि‍शानि‍र्देशों के अनुसार ऐसा ना करने वाले अफसरों के खि‍लाफ अनुशासनि‍क कार्यवाही सुनि‍श्‍चि‍त की जाएगी। मुख्‍य सचि‍व ने सवोच्‍च प्राथमि‍कता पर इन आदेशों को अमल में लाने की हि‍दायत भी दी है।

 

10 साल में 18वीं बार जारी हुआ आदेश
यह भी बता दें कि‍ सन 2007 में यह नि‍यम बनाए गये थे। पि‍छले एक दशक में 18वीं बार ऐसे शासनादेश जारी कि‍ये जा चुके हैं। पहली बार 14 दि‍सम्‍बर 2007 को पहला शासनादेश जारी हुआ था। इस बार 18 अक्‍टूबर 2017 को प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी की ओर से शासनादेश जारी कि‍या गया है।

 

ये है चीफ सेक्रेटरी की ओर से जारी शासनादेश

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