बनारस। महाश्‍मशान कही जाने वाली काशी नगरी में रामनगर के डोमरी गांव स्‍थित गंगातट पर नौ दिवसीय रामकथा का पाठ करने, सुविख्‍यात कथाकार मोरारी बापू शनिवार को वाराणसी पहुंचे। मोरारी बापू की ये 800वीं कथा है, जिसका वाचन शिव नगरी काशी में हो रहा है। मोरारी बापू यहां बाबतपुर स्‍थित लाल बहादुर शास्‍त्री अन्‍तरराष्‍ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने के बाद सीधे बीएचयू पहुंचे।

मोरारी बापू बीएचयू से रविदास घाट पहुंचे जहां से नौका मार्ग के जरिए वह डोमरी स्‍थित कथास्‍थल के लिए रवाना हुए।

 

बता दें कि मोरारी बापू की ये 800वीं रामकथा ‘मानस मसान’ कई मायनों में अहम मानी जा रही है। महाश्‍मशासन कही जाने वाली काशी में इस कथा को ‘मानस मसान’ के तौर पर प्रस्‍तुत किया जा रहा है। यह भी बता दें कि गोस्‍वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित मानस भी इसी काशी नगरी से ही निकलकर पूरी दुनिया में फैल गई।

संत कृपा सनातन संस्थान की और से मणिकर्णिका घाट के सामने गंगा पार सतुआ बाबा की गौशाला में 21 से 29 अक्टूबर तक आयोजित इस कथा में भक्तों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतज़ामात किये गए है।

 

भक्तों की बैठक व्यव्यस्था के लिए काशी के प्रसिद्ध घाटों के नाम से मणिकर्णिका घाट, तुलसी घाट, हरिश्चंद्र घाट, दशाश्वमेघ घाट और अस्सी घाट नामक दीर्घाओं में भक्त बैठ कर बापू की रामकथा का श्रवण करेंगे। भोजशाला का नामकरण प्रभु प्रसाद होगा।

 

मोरारी बापू के आवास स्थल का नाम ‘कैलास’ रखा गया है। कथा में आने वाले हजारों भक्त प्रतिदिन प्रभु प्रसाद का भरपूर आनन्द उठाएं इसे लेकर सभी व्यवस्थाएं पूर्ण की गई हैं। रसोई घरों का निर्माण, हलवाई, रसोइये, केटरिंग, वेटरिंग की समस्त तैयारियां पूर्ण हो गई है।

 

आगामी 25 अक्टूबर को सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ के भी कथा में शामिल होने की पूरी संभावना है, जिसको लेकर प्रशासनिक अमला पूरी तरह से मुस्तैद है।

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