बनारस। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार बनारस ने दिवाली के दौरान पटाखा बजाने में धैर्य का परिचय दिया है।  अपेक्षाकृत सादगी से मनी इस दिवाली ने शहर की आबोहवा को थोड़ी राहत दी है। जहां एक ओर पिछले वर्ष शहर की आबोहवा में दिवाली के दौरान घुलने वाले पार्टिकुलेट कण अनुमान्य मानकों की तुलना में लगभग 20 गुना अधिक थे, वहीं इस साल दिवाली की अगली सुबह हवा में मौजूद प्रदूषण के कण अनुमान्य मानकों की तुलना में अधिकतम 10 गुना तक पहुचे। दिवाली की अगली सुबह केयर 4 एयर अभियान की ओर से शहर के कुल 17 जगहों पर वायु प्रदूषण का स्तर मापा गया है।

17 जगह हुई प्रदूषण की जांच 
आंकड़ों की जानकारी टीम livevns को देते हुए मुख्य अभियानकर्ता एकता शेखर ने बताया कि कुल 17 जगहों पर पटाखों से उत्पन्न प्रदूषण की जांच की गयी। इस प्रक्रिया में मुख्य रूप से पीएम 10 और पीएम 2.5 कण को मापा गया है।  दिवाली की अगली सुबह 21अक्टूबर को इन सभी जगहों पर मशीनें लगा कर यह प्रक्रिया की गयी। आंकड़ों को इकट्ठा करने के बाद यह पाया गया कि नई सड़क सबसे ज्यादा और काशी रेलवे स्टेशन सबसे कम प्रदूषित रहा।

नई सड़क क्षेत्र प्रदूषण में अव्वल
नई सड़क पर पीएम 10 की मात्रा 338 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर पायी गयी, जबकि पीएम 2.5 की मात्रा 253 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रही। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी प्रदूषण सूचकांक के अनुसार प्रदूषण के इन कणों की हवा में अधिकतम अनुमान्य मात्रा 25 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर होनी चाहिए।

महमूरगंज में कम हुआ प्रदूषण
एकता शेखर ने बताया कि नई सड़क के बाद मैदागिन दूसरे पायदान पर रहा, जहां पीएम 10 और पीएम 2.5 क्रमशः 253 और 171 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रहा। इस सूची में तीसरे पायदान पर आशापुर रहा जहां जहां पीएम 10 और पीएम 2.5 क्रमशः 255 और 168 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर पाया गया। मछोदरी, चौक, महमूरगंज और पांडेयपुर इलाकों में प्रदूषण के कणों का दबाव लगभग एक जैसा रहा।

कम होने के बाद भी 10 गुना बढ़ा प्रदूषण स्तर
इस बार, प्रदूषण का स्तर कम होने के बावजूद भी अनुमन्य मानकों की तुलना में 10 गुना है। ऐसे में, अस्थमा, हार्ट अटैक, श्वांस संबंधी अन्य बिमारियों, एलर्जी आदि के मरीजों के साथ साथ छोटे बच्चों और बूढ़े लोगों के स्वास्थ्य पर अत्यंत घातक असर पड़ने की आशंका है”, एकता शेखर ने बताया।

प्रदूषण का स्तर 10 गुणा के बराबर होना यह साबित करता है कि बनारस प्रदूषण की गठरी बन चुका है। इस शहर में दिवाली के दौरान पैदा होने वाला प्रदूषण तात्कालिक कारणों से होता है, जबकि बाकी समय में कूड़ा जलाने से लेकर डीजल आधारित परिवहन व्यवस्था कोढ़ में खाज का काम करती है।

ज्ञात हो कि केयर 4 एयर अभियान की ओर से पिछले वर्ष भी यह आंकड़े साझा किये गए थे, जिसमे सोनारपुरा सबसे ज्यादा प्रदूषित पाया गया था।

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