बनारस। रामनवमी और दिवाली पर वर्षों से भगवान राम की आरती उतारती आ रहीं वाराणसी की नाजनीन अंसारी से मदरसा दारूल उलूम ज़कारिया देवबंद खफा हो गया है। मदरसे के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती शरीफ खान ने नाजनीन अंसारी का इस तरह अल्लाह के सिवा किसी और की आरती या पूजा करना गलत ठहरा दिया है। सिर्फ इतना ही नहीं उलेमा ने उन्हें इस्लाम से खारिज कर दिया है।

 

वहीं इस फतवे के जवाब में नाजनीन अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट से ऐसे फायदे वाली फतवों की एजेंसी पर रोक की मांग की है।
देवबंद के दारुल उलूम ज़कारिया मदरसे के मोहतमिम मौलाना मुफ़्ती शरीफ खान ने वाराणसी में मुस्लिम महिला फाउंडेशन की अध्यक्ष नाजनीन अंसारी द्वारा दिवाली से एक दिन पहले भगवान् श्रीराम की आरती उतारने के बाद उनके खुद बखुद इस्लाम से बाहर हिने का फतवा सुना दिया है। जिसके बाद मुस्लिम महिला फाउंडेशन की अध्यक्ष नाजनीन अंसारी ने इसपर कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्‍होंने मुनासिब जवाब देकर देश में फैली इन फतवों की एजेंसी पर रोक लगाने की मांग की है।

 

हमने इस्लाम से इतर कोई काम नहीं किया : नाजनीन
मुस्लिम महिला फाउंडेशन की अध्यक्ष नाजनीन अंसारी ने टीम Livevns  को दिए साक्षात्कार में बताया कि भारतीय संस्कृति में किसी भी अथिति का सत्कार तिलक लगाकर और मला पहनाकर किया जाता है। इस बार भी हम लोगों ने भगवान् श्रीराम के समक्ष दीप जलाकर उनकी आरती करके उनका स्वागत किया है। हम भगवान् श्रीराम को अपना पूर्वज मानते हैं। कोई भी व्यक्ति अपना धर्म, जाति बदल सकता है पर अपने पूर्वजों को नहीं। इसी बात को मानते हुए हमने इस बार भी उनकी आरती उतारी है। हमने कोई ऐसा काम नहीं किया जो इस्लाम धर्म से इतर हो।

 

फतवों की एजेंसी पर रोक लगाये सुप्रीम कोर्ट : नाजनीन
नाजनीन ने बताया कि यदि दारुल उलूम ने इस्लाम धर्म का ठेका लेने का खुद को एजेंसी बना रखा है तो हमारी मांग है माननीय सुप्रीम कोर्ट से की वो ऎसी एजेंसी को फ़ौरन बंद कराएं, क्योंकि ये लोग उलूल जुलूल फतवे देकर माहौल खराब कर रहे हैं।

 

अपने ढंग से चलाना चाहते हैं इस्लाम : नाजनीन 
एक सवाल के जवाब में नाजनीन अंसारी ने कहा कि हम आक्रोशित नहीं है, हमें हंसी आ रही है इनके बयान पर क्योंकि ये समाज को बांटने का काम कर रहे हैं, नाकि उसे जोड़ने का। ये इस्लाम पैगम्बर साहब की तरह न चलाकर अपने हिसाब से चलाना चाहते हैं, ये उसे बदलना चाहते हैं।

 

फायदे के लिए देते हैं फतवा : नाजनीन 
उन्‍होंने कहा, ”ये लोग अपने फायदे की जगह पर कोई फतवा नहीं देते, ये उसी जगह फतवा देते हैं जहां इन्हें ख़तरा रहता है। इस समय इन्हें लग रहा है कि हमारे कार्य से इनका वर्चस्व खत्म हो रहा है इसलिए ये हमारे ऊपर फतवा दे रहे हैं।” नाजनीन ने साफ किया कि इस्लाम ने हमेशा सभी धर्मो का आदर करना सिखाया है, हम वही कर रहे हैं और करते रहेंगे।
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