बनारस। 2017 का अंत नि‍कट है, इस जाते हुए साल ने वाराणसी को एक के बाद एक दो-दो शोक के कारण दे डाले। पहले जहां बनारस घराने की शान और प्रसि‍द्ध ठुमरी गायि‍का गि‍रि‍जा देवी ने काशीवासि‍यों को अलवि‍दा कहा तो वहीं अब वाराणसी के वयोवृद्ध साहि‍त्‍यकार तथा वरि‍ष्‍ठ पत्रकार पद्मश्री मनु श्रर्मा ने भी इस दुनि‍या को अलवि‍दा कह दि‍या है।

 

शोक में डूबा काशी का साहि‍त्‍य जगत
प्रख्यात साहित्यकार मनु शर्मा का बुधवार की सुबह वाराणसी के बड़ी पियरी स्थित उनके निवास पर निधन हो गया। पद्मश्री सम्मान से सम्मानित मनु शर्मा के निधन की सूचना से काशी के साहित्य जगत में शोक व्याप्त है। उन्हें यूपी सरकार ने यश भारती से सम्मानित किया था।


स्‍वच्‍छ भारत अभि‍यान के नवरत्‍न थे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें सफाई अभियान में अपना नवरत्न भी चुना था। मनु शर्मा का अंतिम संस्कार गुरुवार को वाराणसी के मारिकर्णिका घाट पर किया जाएगा।

अस्‍पताल में मनाया था 90वां जन्‍मदि‍न

साहित्यकार मनु शर्मा का जन्म 1928 में फैजाबाद जिले में हुआ था। वह काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। पिछले महीने शरद पूर्णिमा के दिन उन्होंने 90वां जन्मदिन अस्पताल में मनाया था। हालात में सुधार होने पर दो दिन बाद घर लाया गया था। उसके बाद से उन्होंने खाना छोड़ दिया था।

दि‍वंगत मनु शर्मा के भतीजे तुषार शर्मा ने बताया कि सुबह अचानक बड़े पि‍ताजी की तबियत बिगड़ी। जब तक अस्पताल ले जाने का प्रबंध किया जाता, उन्होंने अपनी अंतिम सांस ले ली।

हि‍न्‍दी की खेमेबंदी से दूर

तुषार शर्मा ने बताया कि आधुनिक हिन्दी साहित्य के लेखक मनु शर्मा हि‍न्‍दी की खेमेबंदी से दूर ही रहे। उन्होंने साहित्य की हर विधा में लिखा है। बेहद अभावों में पले-बढ़े मनु शर्मा ने कभी बनारस के डीएवी कॉलेज में अदेशपालक की नौकरी की थी।

बेढब बनारसी के चेले थे मनु शर्मा

उनके गुरु रहे कृष्‍णदेव प्रसाद गौड़ उर्फ ‘बेढ़ब बनारसी’ ने उनसे पुस्‍तकालय में काम लिया। पुस्‍तकालय में पुस्‍तक उठाते-उठाते ही उनमें पढ़ने-लि‍खने की रुचि जगी। उन्‍होंने अपनी कलम से पौराणिक उपन्‍यासों को आधुनिक संदर्भ दिया है।

इमरजेंसी में लगा था प्रति‍बंध

हास्य कवि बद्री विशाल ने बताया कि मनु शर्मा ने बनारस से निकलने वाले ‘जनवार्ता’ में प्रतिदिन एक ‘कार्टून कविता’ लिखी। यह इतनी मारक होती थी कि आपात काल के दौरान इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। मनु शर्मा ने अपनी ‘कार्टून कविता’ के जरिए हर घर-हर दिल पर उस दौरान दस्‍तक दी।

कालजयी रचना ‘कृष्‍ण की आत्‍मकथा’

राजकुमार हिरानी ने मनु शर्मा की पुस्‍तक ‘गांधी लौटे’ के विचार की चोरी कर इस पर फिल्‍म का निर्माण किया था। भारतीय भाषाओं में उनकी कृति ‘कृष्‍ण की आत्‍मकथा’ है। 8 खंडों और 3000 पृष्‍ठ वाले ‘कृष्‍ण की आत्‍मकथा’ एक कालजयी कृति है।

मि‍ले थे कई सम्‍मान

प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान से जुड़े मनु शर्मा का नाम अविस्मरणीय रहेगा। सम्मान-अलंकरण की उनके पास कई ख्यातियाँ रही। गोरखपुर विश्वविद्यालय से डी.लीट. की मानद उपाधि,उत्तरप्रदेश हिंदी संस्थान के ‘लोहिया साहित्य सम्मान’,केंद्रीय हिंदी संस्थान के ‘सुब्रह्मण्य भारती पुरस्कार’उ.प्र. सरकार के प्रतिष्ठित रहे। इसके साथ ही अन्य कई अलंकारों से इनको नवाजा गया है।

रामगोपाल यादव ने दी श्रद्धांजलि

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव पार्टी पदाधिकारियों संग बड़ी पियरी स्थित साहित्यकार पद्मश्री स्व मनु शर्मा के आवास पहुंचे। सपा नेता ने यहां दि‍वंगत साहि‍त्‍यकार को श्रद्धांजलि अर्पि‍त की। इस दौरान मीडि‍या से संक्षि‍प्‍त बातचीत में रामगोपाल ने कहा कि मनु शर्मा के जाने से सहित्य जगत को बड़ी क्षति हुई है।

यादों का झरोखा

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