बनारस। डिपो में धुलाई कर के अपना गुजर बसर करने वाले समीर खान की दस साल की मासूम बच्ची जो कमर में एक गंभीर फोड़े से ग्रसित है बड़े ही अथक प्रयासों के बाद किसी तरह बीएचयू में भर्ती तो हो गयी लेकिन  परिवार परेशान है और इसी बीच बीएचयू अस्पताल प्रशासन ने भी मासूम आलिया परवीन के पिता को कह दिया है कि बच्ची को घर ले जाये और घर पर रख कर इलाज़ करे लेकिन पिता जो डिपो में डेली आधार पर गाड़ी धुलाई का काम करता है अब इलाज़ के खर्च को लेकर चिंतित है |

केंद्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की परियोजना, जो वाराणसी में अस्मिता संस्था द्वारा संचालित है ,की चाइल्ड लाइन 1098 हो या रोहनिया के भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह ओढ़े हो या बेटी बचाओ अभियान की प्रदेश की सह संयोजक डॉ रचना अग्रवाल हो या स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह हर किसी ने इलाज़ के खर्चे को लेकर अपना पल्ला झाड़ दिया है और मामला एकदूसरे पर फेंकना शुरू कर दिया। पेश है टीम Livevns की एक ख़ास रिपोर्ट

 
प्राइवेट वाशिंग डिपो में डेली बेस पर गाड़ी धुलाई करने वाले समीर खान की 10 साल की बेटी आलिया परवीन को एक फोड़ा कमर के अंदरूनी हिस्से में हो गया है। कई डॉक्टरों को दिखाने के बाद हालात गंभीर होता देख मंडलीय अस्पताल ने आलिया को bhu रेफर कर दिया था और अब आलिया पिछले 1 हफ्ते से बीएचयू सर सुंदर लाल अस्पताल में भर्ती है और अब आलिया के कमर के ये फोड़ा समीर खान की जिंदगी का नासूर बनता जा रहा है वजह ये नही है कि ये फोड़ा लाइलाज है बल्कि वजह ये है कि इलाज़ का खर्च आलिया के माता पिता को बहुत भारी पड़ रहा है।

 अलिया के पिटा समीर खान ने बताया कि हमने गरीबो के लिए केंद्र की चाइल्ड लाइन सेवा 1098 पर मदद मांगी लेकिन चाइल्ड लाइन वाले रोज सर्वे करने आते हैं और दवा के बिल का फोटो खींचकर ले जाते हैं और आर्थिक मदद करने का भरोसा दे जाते हैं। दरअसल चाइल्ड लाइन के स्टाफ रोजाना आलिया का फॉलो अप करने और उसके घर का सर्वे करने के बहाने अपना TA  DA बना रहे हैं क्योंकि अबतक लगभग एक सप्ताह बीत चूका चाइल्ड लाइन चाहती तो आलिया को मदद कर सकती थी आलिया को रोजाना 1500 से 2000 तक का दवा का खर्च आ रहा है। चाइल्ड लाइन चाहे तो उनके डोनेटर भी मदद कर सकते हैं लेकिन डाइरेक्टर का ढुलमुल रवैया और स्टाफ के TA  DA के वजह से आलिया की मदद एक ख़्वाब सरीखा होता जा रहा है।

वहीं चुनाव में व्यस्त चल रहे रोहनिया विधायक सुरेंद्र सिंह ओढ़े कुछ दिन नजरअंदाज करने के बाद जब मामला सोशल मीडिया पर उछला तो उन्होंने भी अब रेस्पोंस देना शुरू तो कर दिया लेकिन अबतक कोई मदद आलिया को नहीं मिल पाई है जबकि कुछदिन पहले स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने भी मदद का दावा किया था लेकिन वाराणसी से जाने के बाद उनके दावे भी हवा हवाई हो गए।

आलिया के पिता समीर खान जब तमाम कोशिशों के बाद अपनी बच्ची को बीएचयू में भर्ती करने में कामयाब हो गए | उन्होंने बताया कि हम लगा अब हमारी बच्ची  का इलाज हो जाएगा लेकिन दवा के खर्च को देखते हुए अब बीएचयू के अस्पताल प्रशासन ने भी बच्ची को घर ले जाने के लिए कह दिया है अब ऐसे में आलिया की मां के माथे पर चिंता की लकीरें पड़ने लगी हैं और उसका रोरोकर बुरा हाल है। किराए के घर में किस तरह आलिया को रखकर उसका इलाज संभव हो पायेगा।

 
 बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का दम भरने वाली केंद्र सरकार आखिर बेटियों को कैसे बचाएगी जबकि कुछ दिन पहले काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में छात्राओं की घटना से वैसे ही केंद्र सरकार निशाने पर है और अब ना तो उनकी राज्य सरकार के विधायक मंत्री न ही बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान से जुड़े लोग सामने आ रहे हैं और ना ही कोई संस्था। ऐसे में कहना गलत ना होगा कि वाराणसी में मंत्रियों के दौरे सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंती मोदी को खुश करने के लिए होते हैं न की काम करने के लिए। 
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