बनारस । कहते हैं जो लोग मुश्किलों से डट कर सामना करते हैं उनकी कभी हार नही होती । ऐसा ही कुछ कर रही है रामनगर के चौरहट निवासी गुड़िया किन्नर । उन्होंने अपनी कमी के बाद भी समाज के सामने एक नज़ीर पेश की है जहां लोग बेटियों को खत्म करने पर लगे हैं वहां गुड़िया दो लड़कियों को गोद लेकर उनकी परवरिश कर रही है । पेश है काशी की गुड़िया किन्नर पर एक विशेष रिपोर्ट ।


वाराणसी के जलीलपुर के एक बुनकर परिवार में जन्मी गुड़िया के घर वालों को जब पता चला की वो किन्नर है तो घर वालों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा पर घर वालों गुड़िया का साथ दिया । टीम Livevns जब गुड़िया के चौरहट स्थित घर पहुंची तो वो अपने लूम पर साड़ी की बुनाई कर रही थी ।

 

गुड़िया ने हमें बताया कि जब 16 साल की हुई तो आस पड़ोस के लोगों ने घर वालों और मुझपर ताना कसना शुरू किया । मैं घर छोड़ के चली गयी । ढाई साल बाद घर लौटी और बड़े भाई की इजाज़त से अपनी गुरु रौशनी के साथ मंडली में बधाई गाने जाने लगी ।

वहां भी मिला ताना

गुड़िया बचपन में खाना बनाते समय जल गयी थी । उनका बदन का आधा हिस्सा जला हुआ है । गुड़िया ने नम आंखों से बताया कि मैं जब छोटी थी तो खाना बनाते समय जल गई थी और यह जला हुआ शरीर मेरी रोज़ी रोटी के आड़े आने लगा जहां मैं गुरु के साथ बधाई गाने जाऊं तो लोग कहें कि आदमी मरने के बाद जलता है तुम तो शमशान से आ रही हो । गुरु का काम खराब होने लगा था जिसपर मैंने गुरु को बताकर बधाई गाना छोड़ दिया और ट्रेन में भीख मांगने लगी ।

भाई की मदद से लगाया लूम

गुड़िया ने अपने बड़े भाई की मदद से और अपनी कमाई के पैसे से अपने घर मे एक पावर लूम लगा लिया । गुड़िया ने कहा कि इंसान पैसे से ही सब कुछ ही आज की दुनिया मे मैं अपने बड़े भाई और भाभी की मदद करती थी पैसे से जिसकी वजह से और लोग मुझसे घर मे नाराज़ रहते थे । इसलिए मैंने घर छोड़ दिया और यहां ज़मीन लेकर मकान बनवा लिया ।

भाई की दिव्यांग लड़की को लिया गोद

गुड़िया ने जन्म के बाद बहुत से संकट देखे थे खुद में एक कमी की वजह से इसी दर्द ने उसे अपने भाई की दिव्यांग बेटी नरगिस के करीब ला दिया । गुड़िया ने बताया कि मैंने भाई से कहकर उनकी बड़ी बेटी जो दिव्यांग है उसे गोद ले लिया है ।उसे दीनी तालीम दे रही हूं । साथ ही वो मेरे साथ काम भी कर रही है लूम का ।

लावारिस बच्ची को लिया गोद

गुड़िया ने 4 साल पहले लक्ष्मी मेडिकल हॉस्पिटल से एक घंटे की एक लडक़ी को गोद लिया है । जिसे गुड़िया स्कूल भेज रही है । गुड़िया बताती है कि मैं ज़ैनब को डॉक्टर बनना चाहती हूं । इसलिए उसे पढ़ा रही हूं । लोग लड़कियों को कम आंकते हैं पर यही मेरे जीवन का सहारा हैं ।

दो पावरलूम से दे रही चार को रोजगार

गुड़िया किन्नर समाज मे अपना एक मुकाम बना चुकी हैं समाज मे गलत निगाह से देखे जाने वाले किन्नर के घर से आज चार बेरोजगारों को काम मिल है और वो बुनकारी करके अपना पेट भर रहे हैं ।


इस नदी की धार से ठंडी हवा आती तो है, नाव जर्जर ही सही लहरों से टकराती तो है । दुष्यंत कुमार की ये बहुचर्चित लाइन वाराणसी की गुड़िया किन्नर पर सटीक बैठती है । गुड़िया ने सुंदर समाज को ऐसी सीख दी ही जो वो नही कर पाया आज तक अपने अंदर कमी होने के बावजूद गुड़िया ने दो बेटियों को पालने की ज़िम्मेदारी उठाइ है ।

Comments