बनारस। जिंदा हूं मैं, अक्सर ये डायलॉग आपने फिल्मों में सुना होगा पर आज हम आपको रियल लाइफ में इस डायलॉग को बाकायदा समझाएंगे। ये सिर्फ एक डायलॉग नही बल्कि एक 91 वर्ष के बुजुर्ग की दर्द भरी कहानी है जो सीएम योगी के सामने अपने अस्तित्व के होने की गुहार लगा रहा है कि जिंदा हु मैं।

 

ये हैं यमुना सिंह जो अब 91 वर्ष के हैं और संन 1985 में पुलिस कांस्टेबल के पद से रिटायर्ड हुए हैं, लेकिन आज इस कड़ाके के ठंड में खुले आसमान के नीचे सीएम योगी के मिलने की आस में बैठे हैं, सिर्फ और सिर्फ न्याय की आस में। यमुना सिंह ने बताया कि वो भू-माफियाओं के शिकार हो गए हैं और इनकी चार बीघा जमीन भू माफियाओं ने कब्जा कर ली है। भू-माफियाओं ने उन्‍हें कागजों में मृत घोषित करा दिया है। अब यमुना सिंह अपनी जमीन को बचाने के लिए मुख्‍यमंत्री से गुहार लगाना चाहते हैं।

 


यमुना सिंह के साथ उनका बेटा और बहू भी अपने पिता को जीवित घोषत कराने और भू माफियाओं के चुंगल में फंसी उनकी जमीन को वापस दिलाने के लिए सीएम योगी तक पहुंचना चाहते हैं।


यमुना सिंह के पुत्र बृजमोहन ने बताया कि पिता जी जब यूपी के सोनभद्र में कार्यरत रहे तो वहां उन्होंने सस्ती जमीन खरीदी थी जो लगभग चार बीघा रही। रिटायर होने के बाद ये अपने गांव गाजीपुर पहुचें और वहाँ रहने लगे।


कुछ दिन बाद वहाँ कुछ लोग आए और इनकी जमीन खरीदने की बात की तो यमुना सिंह राजी हो गए। वहीं कुछ दिन बाद पता लगा कि यमुना सिंह को धोखे में रख के उनकी जमीन का सट्टा कराया गया और 2014 में उन्हें मृत घोषित कर के जमीन पर कब्जा कर लिया गया। तब से लेकर अबतक पीड़ित परिवार सरकारी दफ्तरों की ठोकरें खा रहा है।


भू-माफियाओं के खिलाफ योगी सरकार बेशक कड़ाई करने की बात कहती रही है लेकिन हैरानी इस बात की है कि ऐसे तत्‍वों के मन में अबतक डर क्‍यों नहीं उत्‍पन्‍न हो सका है। भू-माफियाओं के दुसाहस का उदाहरण यमुना सिंह के केस से ही पता चल जाता है। नौ महीने की योगी सरकार के दौरान भी इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं लेकिन फिर उनकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। थक हारकर अब वह खुद मुख्‍यमंत्री से मिलना चाहते हैं।

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