बनारस। देश के प्रधानमंत्री और वाराणसी के सांसद नरेन्‍द्र मोदी द्वारा शुरू की गयी सांसद आदर्श ग्राम योजना एक बार फिर चर्चाओं में है। अपने संसदीय क्षेत्र के जयापुर, नागेपुर और ककरहिया को तीन वित्तीय वर्षों में गोद लेकर प्रधानमंत्री की ओर से उनका विकास किया जा रहा है। अब चौथे वित्तीय वर्ष में प्रधानमंत्री गंगा उस पार बसे काशी विद्यापीठ ब्‍लॉक अंतर्गत डोमरी को गोद ले सकते हैं। सुहाग की निशानी बिंदी बनाने वाले गांव डोमी से पेश है Live VNS की विशेष रिपोर्ट।


जिला मुख्यायालय से 18 किलोमीटर दूर गंगा उसपर नदी किनारे ही बसा है गांव डोमरी। यहां के लोग इन दिनों कुछ इस बात को लेकर कुछ ज्‍यादा ही उत्‍साहित हैं कि उनके गांव के दिन अब फिरने वाले हैं। डोमरी के लोगों को जब से ये पता लगा है कि उनके गांव को प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी गोद ले सकते हैं तब से उनकी खुशियों का ठिकाना नहीं है।

 

गंगा के किनारे बसे इस गांव को चार चार साल में बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ती है। गांव की ज़्यादातर महिलाएं सुहाग की शान बिंदी बनाने का काम करती हैं वहीं पुरुष अधिकतर शहर में काम करने आते हैं या खेती-बाड़ी करते हैं।


ऐसे बसा ये गांव

पीएम मोदी द्वारा गांव को गोद लिये जाने की संभावना के बाद हमारी टीम रामनगर थानान्‍तर्गत डोमरी गांव पहुंची। यहां हमारा स्वागत गांव के प्रधान छोटेलाल पटेल ने किया। उन्होंने बताया की तीन पीढ़ी से वह यहां रह रहे हैं। साल1948 में यहां बाढ़ आयी थी और उस वक़्त लोगों के घर डूब गए थे। कई लोगों की जानें भी गईं।

जब बाढ़ का पानी उतरा तो ऋषि नारायण मिश्रा और पंडित कमलापति त्रिपाठी के सहयोग से दुबारा गांव को बसाया गया। दोनों विभूतियों ने सभी का मकान जो बाढ़ में बह गया था उसे सही करवाया और दुबारा लोगों को यहां बसाया। सन 1948 में इस गांव के बसने के बाद इसका नाम ऋषि नगर पड़ा लेकिन कुछ ही दिन बाद डोमरी हो गया। तब से आज तक हर जगह और सरकारी रिकार्ड में इसका नाम डोमरी ही है।


5300 की आबादी

प्रधान छोटेलाल ने बताया कि साल 2011 की जनगणना के अनुसार इस गांव की टोटल आबादी 53 सौ है। गांव में 50 प्रतिशत पटेल आबादी है। बाकी अन्य जाति समुदाय के लोग हैं। ज़्यादातर लोग खेती किसानी करते हैं। कुछ गंगा में नौकायन करते हैं तो कुछ दूसरे शहरों में कमाते हैं।


मुलायम सिंह ने जब दिया था विकास का आदेश

ग्राम प्रधान छोटे लाल पटेल ने बताया की कमलापति त्रिपाठी और ऋषि नारायणा मिश्रा के बाद जब मुलायम सिंह यादव प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तो वो इस गांव में आये थे। यहीं उनका हेलीकाप्टर उतरा था। उस समय यहां मौजूद ततकालीन जिलाधिकारी से उन्होंने जनता के सामने पूछा था कि इस गांव का विकास कितने दिनों में कर दोगे तो जिलाधिकारी ने 15 दिन का समय माँगा था, जिसपर उन्होंने जिलाधिकारी को दो महीने का समय दिया था और दो महीने बाद आकर निरीक्षण की बात कही थी। जिसपर कुछ मूलभूत सुविधाएं यहां मिली थीं।


ख़ुशी है कि प्रधानमंत्री हमें चुनेंगे

छोटे लाल पटेल ने बताया कि हमें पता चला है कि हमारे गांव को प्रधानमंत्री सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लेने वाले हैं। यह बहुत ही ख़ुशी की बात है। हमारे गांव का रुका हुआ विकास और यहां बाढ़ की जो समस्या है वो ख़त्म हो जाए बस यही कामना है।


जल्द लगेगी DM की चौपाल

छोटेलाल पटेल ने बताया कि 1 जनवरी को हमारे पास जिले से फ़ोन आया था कि जिलाधिकारी महोदय आप के यहां चौपाल करने वाले हैं। इसके लिए जगह उपलब्ध कराइए। जिसके लिए हमने चौपाल स्थल को चुना है और जल्द ही जिलाधिकारी यहां चौपाल भी लगाने वाले हैं।


सुहाग की बिंदी बनाती हैं महिलाएं

डोमरी की 5300 की आबादी का एक बड़ा हिसा सुहाग की बिंदी के रोज़गार से जुड़ा हुआ है। जिसमें महिलाएं प्रमुख रूप से हैं। यहां की ज़्यादातर महिलाएं इस रोज़गार से जुडी हुई हैं।


आराजी लाइन ब्‍लॉक के दो गांव जयापुर और नागेपुर के बाद प्रधानमंत्री ने काशी विद्यापीठ ब्‍लॉक के ककरहिया की जिम्‍मेदारी उठाई और इसके बाद विद्यापीठ ब्लाक के ही अगले गांव डोमरी को गोद लेने की चर्चाएं तेज हैं। ग्रामीण इससे काफी उत्‍साहित हैं।

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