बनारस। धर्म की नगरी काशी में हमेशा से ध्यान और शान्ति के लिए दूर देश से सैलानी का आने का सिलसिला रहा है पर हाल ही में चल रहे भारत में राजनितिक उथल पुथल और धर्म की राजनीती के बीच दुनिया के तीन अलग अलग शहरों की मुस्लिम महिलाएं शिक्षा की नगरी में शान्ति की खोज में पहुंची हैं। ये महिलाएं यहां कुंडलिनी जागृत कर अध्यात्म को जानने आई हैं। पेश है एक ख़ास रिपोर्ट।

 

 

 

शहर के प्रसिद्द वाग्योग चेतना पीठं संस्थान में इन दिनों संस्कृत और कुण्डलिनी जागृत कराने का प्रशिक्षण लेने के लिए मोरक्को निवासी योग प्रशिक्षक ओमानिया, फ्रांस की रहने वाली नसरीन और अज़रबैजान की इल्हामा इस पीठ में पहुंची हैं। जिन्हें गुरु वागीश शास्त्री शिक्षा दे रहे हैं और इन्हें यहां आकर शान्ति की प्राप्ति हो रही है।

 

इस समबन्ध में विश्व प्रसिद्ध विद्वान आचार्य भागीरथी प्रसाद त्रिपाठी उर्फ़ वागीश शास्त्री ने बताया कि वग्योग्य चेतना पीठम ऎसी संस्था है जहां विश्व के हर कोने से लोग संस्कृत और कुंडलिनी जागृत करने का प्रशिक्षण लेने आते हैं। वर्तमान में ये तीनो मुस्लिम महिलाएं पिछले दस दिनों से शक्तिपात द्वारा कुंडलिनी प्रशिक्षण ले रही हैं।

 

कुंडलिनी जागृत करने के लिए एक मन्त्र ही काफी

गुरु वागीश शास्त्री ने टीम Livevns को बताया कि पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के कारण लोग मानसिक परेशानियों से जूझते हैं और शांति की तलाश में उनके पास आते हैं। इस परेशानी का इलाज वह शक्तिपात के द्वारा उनकी कुंडलिनी जागृत करके उनको एक मंत्र देते हैं। जिससे वह ध्यान करते हैं और मानसिक के साथ साथ तमाम तरह की समस्याओं को दूर करते हैं। ये तीनो मुस्लिम महिलाऐं भी शान्ति की तलाश में भारत आई हैं।

भारत आकर मिली शान्ति, सभी धर्म हैं एक सामान

मोरक्को की योग प्रशिक्षिका ओमानिया कहती हैं कि अल्लाह, ईश्वर और भगवान एक ही हैं। इन्हें मनुष्यों ने अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए अलग अलग धर्मों में बांट दिया है। उन्होंने कहा कि हम सभी को धर्म से ऊपर उठ कर इंसानियत की भावना के साथ जीना चाहिए। पूरे विश्व में धर्म को लेकर साम्प्रदायिक माहौल बनता जा रहा है, इसका कारण सिर्फ इंसानियत से दूर भागना हैं। उन्होंने कहा कि हम सब को सभी धर्मों की इज्जत करनी चाहिए और मिलजुलकर रहना चाहिए। ओमानिया ने बताया कि भारत के इस शहर में आकर जो शान्ति ,मिली वो कही नहीं है।

 

 

 

सभी धर्म एक सामान

नसरीन ने कहा कि वाराणसी आकर उन्हें जिस तरह के सुख शांति की अनुभूति हो रही है उसे वह शब्दों में बयां नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा कि हम सभी को सबसे पहले एक अच्छा इंसान बनना चाहिए और समाज में प्रेम भावना से रहना चाहिए।

 

 

वहीं इल्हामा ने बताया कि यहां आने से पहले वह बहुत परेशान रहा करती थी। उन्हें कहीं भी शांति नहीं मिलती थी लेकिन गुरु वागीश की शरण में आने के बाद उनका जीवन बदल गया है। अब वह पहले ज्यादा बेहतर महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी धर्म बड़ा या छोटा नहीं होता है। सभी धर्मों की अपनी अपनी प्राथमिकता है। भगवान एक ही हैं चाहे हम उन्हें अल्लाह कहें या ईश्वर।

 

 

पूरा विश्व चौथे विश्व युद्ध के मुहाने पर खडा है ऐसे में विदेश से आई ये महिलाएं शांति के करीब पहुंच चुकी हैं।

Comments