बनारस।  आखिरकार लम्बी क़ानूनी जदोजहद के बाद सिकरौरा नरसंहार कांड में वादिनी एव एकमात्र जीवित बची प्रतक्ष्यदर्शी गवाह हीरावती देवी का बयान हुआ दर्ज। आज मुकदमा वदिनी हीरावती का बयान अपर जिला सत्र न्यायाधीश तृतीय के कोर्ट में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच न्यायलय पंहुची। और घटना के बारे में अपना सम्पूर्ण बयान दिया।

बताएं देते हुए वादिनी हीरावती ने बयान दिया कि – मैं हीरावती उम्र 60 वर्ष निवासी सिकरौरा थाना बलुवा वर्तमान जनपद चंदौली बयान करती हु की  मेरे देवर लोगों का नाम रामजनम एव हीरालाल है। मेरे कुल चार पुत्र थे। मदन, उमेश, टुनटुन, प्रमोद नाम था। मेरी एक लड़की है जिसका नाम शारदा है।

मेरे मकान का सहन दरवाजा पूरब तरफ है। मकान के अंदर आंगन के चौमुख ओसारी है। मकान में उस समय एक सीढ़ी थी छत पर जाने लिए जो उत्तर दिशा में थी।

 

घटना के समय मेरा मकान एक मंजिल का था। मकान का उत्तरी दिवार बाहर से उबड़ खाबड़ था। मकान की ऊंचाई लगभग 9 से 10 फ़ीट ऊंची थी मेरे मकान के पूरब में नाद, चरनी, कुंआ छप्पर था। छप्पर एव मड़ई घर से 9 – 10 कदम की दुरी पर था। छप्पर के पश्चिम कच्ची दीवार थी। कन्हैया सिंह मेरे गांव के ही थे। पंचम सिंह उनके लड़के थे। वकील भी मेरे गांव के ही है।

 

घटना के समय मैं आंसारी में अपने बच्चे को दूध पीला रही थी।  उस समय मेरी लड़की शारदा तथा भगिनी अंसारी से सटे कोठरी में सो रहे थे। मेरे लडके मदन, उमेश एव टुनटुन छप्पर के पूरब तरफ एक ही खटिये पर सो रहे थे। खटिया मड़ई के पूरब तरफ बाहर थी। मेरे देवर शिवाराम छप्पर के अंदर चौकी पर सो रहे थे। मेरा लड़का प्रमोद मेरे पति रामचन्दर के साथ एक चारपाई पर लकहरी के बाहर सो रहे थे। 

घटना वाले दिन मेरे पति रामचन्दर बनारस गए थे। वह रात 10 बजे लौटकर आये थे। मेरे पति उस समय छोटी मोती ठेकेदारी का काम करते थे मेरे पति रामचन्दर रात में जब लौट कर आये तो खाना खया फिर सोने चले गए।

हमारे पति गांव का प्रधानी का चुनाव लाडे थे। मेरे पति का जमीन के संबंध में एक मुक़दमा कन्हैया एव पंचम से चल रहा था। यहा का चुनाव मेरे पति रामचंदर ही जीते थे। 
यह मुक़दमा एक तरह से ख़त्म हो गया था लेकिन समाजसेवी राकेश न्याययिक के अथक क़ानूनी प्रयाश के बाद आखिरकार वादिनी का बयान दर्ज हो पा रहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 16 जनवरी को तय की गयी है। 
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