बनारस। इस बार मकर संक्रांति का पर्व रविवार 14 जनवरी को पड़ रहा है। रविवार रात्रि आठ बजे सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करना शुरू करेगें। जिस कारण इस बार स्नान और दान का पर्व मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाया जायेगा। इस सम्बन्ध में वाराणसी के प्रकांड पंडित पवन पाण्डेय ने इस पर्व के महत्व और स्नान दान के बारे में बताया।

मकर संक्रांति के महत्त्व के बारे में बात करते हुए पंडित पवन पाण्डेय ने बताया कि हमारे यहां धर्म शास्त्र में 12 संक्रांतियां होती हैं। इसका मतलब है जब सूर्य जब अपनी एक राशि पर से दूसरी राशि पर गमन करता है तो संक्रांति होती है। इनमे से कुछ विशेष राशियाँ हैं, जब सूर्य इनपर से गुज़रता है तो इस संक्रांति का महत्व बहुत अधिक होता है।

सूर्य 6 महीने तक दक्षिणायन रहते हैं और फिर उत्तरायण हो जाते हैं। ऐसे में सूर्य जब धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो ये बहुत महत्वपूर्ण घटना होती है, धार्मिक सामाजिक और वैज्ञानिक रूप से ये विशेष महत्व का पर्व हो जाता है।


देवताओं के उदय का पर्व
माघ मकर गत रवि जब होई, तीरथपति आव शब् कोई। माघ महीने में जब मकर राशि का सूर्य प्रवेश करता है तो देवताओं का प्रभात होता है, यानी देवताओं का उदय, अर्थात देवता 6 महीने तक जग जाते हैं।


पंडित पवन पाण्डेय ने बताया कि देवताओं के उदय के पर्व के साथ ही साथ सारे मांगलिक और शुभ कार्यों का आरम्भ हो जाता है और असुरों की रात्रि प्रारंभ हो जाती है। मकर संक्रांति पर्व देवों का प्रभात है। यह पर्व मानव जीवन में अलग महत्त्व रखता है।



रविवार की रात बजे से लगेगी संक्रांति
पंडित पवन ने बताया कि इस बार मकर संक्रांति कला शुभ मुहरत रविवार 14 जनवरी को रात्रि 8 बजे से है। रविवार को रात्री आठ बजे सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश कर रहा है। ऐसा धर्म शास्त्रों और भविष्यपुराण आदि में वर्णन है कि स्नान दान रात में ना करें यह दूसरे दिन सुबह से शुरू होगा। मकर संक्रांति का काल 16 घंटे तक बताया गया है पर रात्री का समय छोड़ दें तो अगले दिन सूर्योदय से दोपहर 12 बजे तक का समय उत्तम है।

स्नान और दान

पंडित पवन पाण्डेय ने बताया कि पुराणों में लिखा है कि जब संक्रांति लगे तो स्नान करें और दान करें, इसलिए इस दिन बहते जल में, या नदियो में स्नान करने का महत्त्व है। इसमें दान का भी महत्व है। पुराणों के अनुसार तिल और तिल के बने सामनों का दान लाभकारी होता है। गौ का भी दान किया जा सकता है। ऊनी वस्त्रों का दान करें। हम प्रत्यक्ष रूप से इस पर्व पर सूर्य की ही पूजा करते हैं और यह उर्जावान पर्व है।

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