काशी में धूम-धाम से निकली भोले की बारात, आज होगा ‘माता गौरा’ से विवाह

बनारस।  जब माता गौरा के द्वार पर बाब विश्वनाथ के बाराती भूत प्रेत और गड पहुंचे तो माता गौरी की माता ने विवाह के लिए मना कर दिया।  लेकिन ब्रह्मा जी ने धरती पर आकर जब भोले का श्रृंगार किया तो माता गौरा की मां विवाह के लिए तैयार हो गयी।  इसी महाशिवरात्रि पर्व पर धर्म की नगरी काशी में तिलभांडेश्वर  महादेव मंदिर से  प्रसिद्द शिव बरात श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए निकली। जिसमे भूत प्रेत के साथ गडों की टोली आकर्षण का केंद्र थे। बैंड की धुन पर थिरकते हुए सभी भक्त नाचते गाते बाब दरबार के लिए बढ़ चले।

आज महाशिवरात्रि है यानि शिव और पार्वती के विवाह का दिन। ऐसा माना जाता है की आज के दिन ही भगवान शिव घोड़े पर सवार होकर अपने मित्रो और सभी देवी देवताओं के साथ हिमालय गए और हिमालय की पुत्री पार्वती से इनका विवाह हुआ शिव की नगरी काशी में भी आज कुछ ऐसा ही नजारा दिखा। काशी के तिलभाण्डेशवर मंदिर से भगवान् शिव की बारात निकली और घोड़े पर सवार हो भगवान शंकर नगर भ्रमण करते हुए पार्वती के घर पहुंचे जहां रीती रिवाज के साथ उनका विवाह रचाया गया । भगवान शिव के बारात में देवी देवता ही नहीं बल्कि राक्षस , असुर , दैत्य , दानव , भूत प्रेत और पिचाश सभी शामिल हुए।

हैदराबाद से श्रद्धालू गणेश ने बता कि इस अनोखी बारात को देखते के लिए हम वर्ष यहां आते हैं और बाब की बरात में शामिल होते हैं।  शिव बारात का ये नजारा सिर्फ शिव की नगरी काशी में ही देखने को मिलता है।  शहर के अलग अलग जगहों से अलग अलग समय पर भगवान् शिव की बारात निकाली जाती है जिसमे हर कोई बाराती बनने को आतुर दिखाई देता है।  उन्होंने बताया कि इस बरात में सभी शामिल होते हैं आज के दिन न कोई छोटा होता और ना ही कोई बड़ा सब बस बाबा के बाराती होते हैं।

शहर के भेलूपुर इलाके में स्थित तिलभान्डेश्वर मंदिर से भी सबसे कई वर्षो पहले से शिव बारात निकालने की परंपरा है। जो शहर के विभिन्न इलाको से हुए वापस तिलभान्डेश्वर मंदिर पर आकर खत्म होती है ।  शिव बारात के दौरान पूरा वातावरण ढोल-नगाडो और बैंड-बाजो की गूंज से गुंजायमान हो उठता है और शिव में रम गया। विदेशी मेहमान भी इस शिव बारात में शामिल होते है।

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