सृष्‍टि के संहारक और त्रिदेवों में से एक भगवान शिव को अथाह शक्‍तियों का केंद्र माना जाता रहा है। इनकी संहारक शक्‍तियों की गाथा से भारतीय पौराणिक ग्रंथ भरे पड़े हैं। पिनाक, त्रिशूल, भुजंग माला और तीसरी आंख शिव की शक्‍तियों के ही प्रकार हैं। इनमें भी शिव की ‘तीसरी आंख’ से निकलने वाली ऊर्जा सर्वाधिक विनाशकारी है। त्रिनेत्र के खुलते ही उसमें से निकलने वाली अपरिमित ऊर्जा सबकुछ जलाकर भस्‍म करने वाली है। मान्‍यता है कि हर बार प्रलयकाल में शिव तांडव करते हुए अपने तीसरे नेत्र के जरिए ही समूची सृष्‍टि का संहार करते हैं।

क्‍या हमारे पूर्वजों को पता थी ये बात
लेकिन सवाल ये उठता है कि क्‍या तीसरा नेत्र या तीसरी आंख जैसी भी कोई चीझ मानव शरीर में मौजूद है। कई शोधकर्ता कहते हैं कि, हां। अब दूसरा सवाल उठता है कि क्‍या हमारे पूर्वज आज से हजारों साल पहले से ही ये बात जानते थे।…शायद।

क्‍या है तीन का रहस्‍य
हिन्‍दुओं में शिव को अक्‍सर त्रिशूल के साथ दिखाया जाता है। जिसके तीन कांटे उनकी तीन मूल-भूत शक्‍तियों को दर्शाते हैं। इच्‍छाशक्‍ति, कर्म और ज्ञान। शिव की एक तीसरी आंख भी दिखाई जाती है। जो माथे पर दोनों आखों के ठीक बीच में स्‍थित है। इस की क्‍या वजह है ?

तीसरी आंख से निकली है ऊर्जा
जाने-माने प्राच्‍य शोधकर्ता दीपक शिवखाड़ा के अनुसार, कई तस्‍वीरों में हम ये साफ तौर पर देख सकते हैं कि शिव के माथे पर दोनों आंखों के बीच एक तीसरी आंख दर्शायी गई है। उस आंख से शिव वो सब भी देख सकते हैं जो आम आखें नहीं देख सकतीं। जब वो तीसरी आंख खोलते हैं तब उससे बहुत ज्‍यादा ऊर्जा निकलती है और ये तीसरी आंख एक बार खुलते ही सबकुछ साफ नजर आता है। फिर आप ब्रह्मांड में झांक रहे होते हैं। आप सभी से संपर्क साध सकते हैं। क्‍योंकि आप उस स्‍थिति में कॉस्‍मिक फ्रिक्‍वेंसी या ब्रह्मांडीय आवृत्‍ति से जुड़े होते हैं।

पूरी दुनिया में मिलते हैं तीसरी आंख के प्राचीन किस्‍से
कैलिफोर्निया स्‍टेट यूनिवर्सिटी में शोधकर्ता सबीना मैग्‍लिओको के अनुसार, ”कई सभ्‍यताओं की आध्‍यात्‍म से जुड़ी मान्‍यताओं में भले ही वो भारत की हो या एशिया के दूसरे हिस्‍सों की हो। एक तीसरी आंख का जिक्र है जो माथे पर होती है। आम तौर पर ये माथे पर दोनों आखों के बीच होती है और यहीं आध्‍यात्‍म का केंद्र बिन्‍दु है। यहां तक कि कई बार इसे अलौकिक शक्‍तियों से जोड़कर भी देखा जाता है।

सच्‍चाई क्‍या है
ये तीसरी संरचना अक्‍सर रहस्‍यमयी रूप में दर्शायी जाती है। मगर क्‍यों? कहीं ये हमेशा सबकुछ देखते ईश्‍वर का प्रतीक तो नहीं या फिर इसके पीछे कोई और सच्‍चाई है। वो सच्‍चाई जो शायद इंसानी दिमाग के भीतर ही मौजूद है।

युनिवर्सिटी ऑफ साउथर्न कैलिफोर्निया में एन्‍थ्रोपोलॉजी के प्रोफेसर और शोधकर्ता टोक थॉमसन की मानें तो कई परंपराओं में हम देख सकते हैं कि एक रहस्‍यमयी आंख का जिक्र है और इसके संदर्भ में कई विचार रखे जाते हैं, पर एक बहुत ही रोचक बात जो कई लोग कहते हैं वो ये कि ये तीसरी आंख पीनियल ग्‍लैंड को दर्शाता है। ये एक लाइट सेंसेटिव ऑर्गन है जो दिमाग के ठीक बीचो-बीच स्‍थित है।

पीनियल ग्‍लैंड
यह ग्रंथी मस्‍तिष्‍क के ऐंडोक्रेन सिस्‍टम का ही एक हिस्‍सा है और ये एक चावल के दाने से बड़ा नहीं होता। आकार में यह एक पाइन कोन की तरह होता है। हालांकि ये मस्‍तिष्‍क के काफी अंदर दो भागों के ठीक मध्‍य में होता है पर इसकी कुछ विशेषताएं इंसानी आंख से काफी कुछ मिलती-जुलती हैं।

छोड़ता है मेलेटोनियन हार्मोन
न्‍यूरोसाइंस शोधकर्ता हेथर बरलिन के अनुसार, खास तौर पर पीनियल ग्‍लैंड का काम होता है एक खास तरह के हार्मोन को छोड़ना जिसे मेलेटोनियन कहते हैं जो सोने और जागने के घटनाक्रम का संचालन करता है और क्‍योंकि ये लाइट सेंसिटिव है इसलिए कभी-कभी इसे तीसरी आंख भी कहा जाता है। ये काफी हद तक रहस्‍यमयी है क्‍योंकि ये तिनके भर का खास हिस्‍सा ठीक दिमाग के बीचो-बीच मौजूद है।

क्‍या हमारे पूर्वज जानते थे ये बात
अब सवाल ये उठता है कि क्‍या ये मुमकिन है कि प्राचीन इंसान को इस पीनियल ग्‍लैंड की मौजूदगी का ज्ञान था। अगर हां तो क्‍या वो मस्‍तिष्‍क में इसके विशेष काम से भी परिचित थे।

अलौकिक जगत से जोड़ता है पीनियल ग्‍लैंड
दि सोर्स ऑफ मिरेकल की लेखिका कैथलीन मैक्‍गौन के अनुसार इंसानी इतिहास की शुरूआत से ही ज्‍यदातर सभ्‍यताओं में इस पीनियल ग्‍लैंड को रहस्‍यमयी ग्‍लैंड माना गया है जो कहीं ना कहीं एक अलौकिक अनुभव से जुड़ा हुआ है। ऐसा ज्‍यदातर लोग मानते हैं। हमारी दो आखें जो बाहरी तौर पर हमें दिखती हैं उनसे हम आस-पास की चीझें देखते हैं पर तीसरी आंख से हम उसके भी परे देख सकते हैं। ऐसी चीझें भी जो हम आम तौर पर नहीं देख सकते है।

तो क्‍या वाकई तीसरी आंख नाम का कोई अंग मौजूद है। इंसानी दिमाग का वो हिस्‍सा जिसे हम अपने से परे किन्‍हीं दूसरी चीझों से जोड़ते हैं।

अलग-अलग आयामों में कर सकते हैं सफर
लिजेन्‍ड्री टाइम्‍स मैगजीन के प्रकाशक ग्‍योरिगो ए सुकालोस के अनुसार मानव इतिहास पर नजर डालें तो तीसरी आंख में हमें वो खूबियां नजर आती हैं जिससे हम अलग-अलग आयामों में सफर कर पाते हैं। या कहिए ब्रह्माण में सफर करने जैसा कुछ। तो सवाल ये भी उठता है कि आखिर ये कहानियां शुरू कहां से हुईं। क्‍या अंतरिक्ष का सफर मुमकिन है। क्‍या सिर्फ दिमाग के बल पर दूसरी जगह जाना मुमकिन है।

हाइपर डाइमेंशन गेटवे है पीनियल ग्‍लैंड
दि सोर्स फील्‍ड इंन्‍वेस्‍टिगेशन के ऑथर डेविड विलकॉक की मानें तो पीनियल ग्‍लैंड काम करता है एक हाइपर डाइमेंशनल गेटवे का। डेविड के अनुसार यह हमारे दिमाग में काम करने वाला स्‍टारगेट है। पीनियल ग्‍लैंड दिमाग में एक ब्रिज या वार्म होल बना देता है। ये इंसान की शारीरिक बनावट का मूल पहलू है।

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