BHU में बिखरी नृत्‍य-संगीत की सतरंगी छटा, तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजा पं ओंकारनाथ सभागार 

बनारस। संगीत एवं मंच कला संकाय काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पं ओंकार नाथ सभागार में पूर्वाचार्य स्मृति संगीत समारोह का मंगलवार को दूसरा दिन रहा। दूसरे दिन का कार्यक्रम पद्म विभूषण बाल मुरली कृष्ण की स्मृति में आयोजित किया गया। इस अवसर पर संगीत के साधकों ने सुर, लय और ताल से उन्‍हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

संकाय प्रमुख प्रो, वीरेंद्र नाथ मिश्र, प्रो, ऋत्विक सान्याल,  प्रो प्रवीण उद्धव,  प्रो सरयू आर सोनी,  प्रो शरदा वेलंकर व डॉ ज्ञानेश चंद्र पांडेय ने त्रिमूर्ति और बाल मुरली कृष्ण जी की प्रतिमा को माल्यार्पित कर तथा डॉ मधुमिता भट्टाचार्य ने मंगल मूर्ति मारुति नंदन की प्रार्थना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

 

 

इस दौरान संतूर वादन में कुमार सारंग चौधरी ने राग शुद्ध सारंग में आलाप, जोड़, झाला व मध्य लय 9 मात्रा मे निबद्ध बंदिश, द्रुत तीन ताल की सुमधुर प्रस्तुति की। आप के साथ ललित कुमार ने सधे अंदाज में तबला संगति की।

 

गायन मं डॉ विजय कपूर ने राग पटदीप में विलम्बित एक ताल- ‘ए पिया नहीं आये…’
झपताल में निबद्ध छोटा ख्याल हरि नाम कर गान, तीन ताल में ‘अनहद बाजे..’ का गायन किया। इनके साथ तबला पर डॉ रजनीश व हारमोनियम पर डॉ इंद्रदेव चौधरी ने कुशल संगति की।

कर्नाटक गायन में प्रो के शशि कुमार ने राग आरभी बिलावल में, महादेव सुता महम की प्रस्तुति आदि ताल में की। इसी तरह राग भैरवी में उपचारमु जे सेवा रूपक ताल में तिल्लाना व राग सिंधु भैरवी में वेंकट चल निलयम की सुमधुर प्रस्तुति की। इस दौरान वायलिन पर मंगलम पल्ली सूर्य दीप्ती व मृदंगम पर डॉ वी एस वी प्रसाद ने संगति की।

 

 

सितार वादन में प्रो राजेश शाह राग मधुवंती में आलाप, जोड़ झाला, मध्यलय रूपक, तीन ताल द्रुत झाला, अंत में धुन राग पीलू में प्रस्तुति कर सभागार को तालियों से गुंजायमान किया। तबला पर ज्ञानस्वरूप मुखर्जी ने सधी संगति प्रदान की।

 

गायन में डॉ राम शंकर ने राग मधमाद सारंग विलंबित रूपक में ‘मन तोहे का विध समझाऊँ…’, तीन ताल में ‘करत कहे हो बर जोरी…’। राग खमाज में ‘न मानूंगी लाल तोरी…’ का गायन किया। वहीं तबला पर पुंडलिक कृष्ण भागवत व हारमोनियम पर पंकज शर्मा ने सधी संगति की।

 

इसी तरह कथक नृत्य में डॉ दीपन्विता सिंह राय ने गंगा स्तुति, गंगा अवतरण, ताल धमार पर नृत्य किया। धमार को दक्षिण भारतीय ताल वाद्य मृदंगम के साथ मिला कर प्रस्तुति की गयी। धमार की पारंपरिक बंदिशें तथा अंत अभिनय से सूफी की तान जिसमें एक नायिका मृगधा की झलक की सुंदर प्रस्तुति की गयी।

 

इस दौरान तबला पर डॉ रजनीश एवं मनु गोपाल धर, गायन सुब्रतो राय, बांसुरी पर राकेश, मृदंगम पर वी सत्यवर प्रसाद, सितार पर चंद्रचूड़ भट्टाचार्य ने सफल संगति की।

 

कार्यक्रम में डॉ स्वर्णा खूंटिया, डॉ प्रेम किशोर,  प्रो संगीता पंडित, प्रो शारदा वेलंकर, पी सी होम्बल, प्रो शशि कुमार, डॉ मीनू पाठक, डॉ स्वर वंदना शर्मा, डॉ प्रवीण उद्धव, कन्हैया लाल मिश्र, डॉ केऐ चंचल सहित संकाय के सभी शिक्षक व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम संयोजक डॉ ज्ञानेश चंद्र पांडेय तथाा संचालन ज्योती सिंह ने किया।