मंडुआडीह रेड लाइट एरिया पर बढ़ी तकरार, प्रधान और ‘मौसियां’ आमने-सामने

बनारस। एक बार फिर मंडुआडीह में रेड लाइट एरिया को लेकर तकरार बढ़ने लगी है। शिवदासपुर के ग्राम प्रधान और बदनाम गली की गुमनाम महिलाएं आमने-सामने हो गयी हैं। ग्राम प्रधान चंदन गुप्‍ता की मांग है कि अब रेड लाइट एरिया को यहां से हटाया जाये। वहीं चकलाघर चलाने वाली महिलाओं ने आरोप लगाया है कि कुछ लोग सिर्फ इसलिये नेतागीरी कर रहे हैं क्‍योंकि उन्‍हें लड़कियां नहीं मिल रही हैं। इसे लेकर शनिवार को यहां काफी तूतू-मैंमैं भी हुई है।

सभ्‍य समाज के लिए अभिशाप 
वाराणसी के मंडुआडीह थानांतर्गत शिवदासपुर क्षेत्र एकबार फिर से चर्चा में है। शिवदासपुर के रेड लाइट एरिया को बंद करवाने के लिए यहां के प्रधान विनोद कुमार के नेतृत्‍व में स्‍थानीय लोगों धरना शुरू कर दिया है। ग्राम प्रधान की मानें तो ये एरिया सभ्‍य समाज के लिए अभिशाप है और समाज के एक तबके को इससे काफी नुकसान हो रहा है, बेटियों की शादी में दिक्‍क्‍तें आ रही हैं, नाते-रिश्‍तेदार भी उनके घर आने से कतरा रहे हैं। यही नहीं नौजवान भटक रहे हैं, कितने ही घर बर्बाद होने की कगार पर आ गये हैं।

तवायफों की अपनी दलीले हैं 
मंडुआडीह के रेड लाइट एरिया को हटाये जाने को लेकर स्थानीय लोग जहां धरना दे रहे हैं, वहीं इस इलाके की गुमनाम महिलाएं भी अब विरोध करने वालों के विरोध में सड़क पर उतर गयी हैं। बदनाम गली की महिलाओं का कहना है कि हमारा धंधा अगर बंद हो गया तो हम सब भुखमरी की कगार पर आ जाएंगी, हमारे छोटे-छोटे बच्‍चे स्‍कूल भी नहीं जा सकेंगे। इन महिलाओं का कहना रहा कि पहले हमारे लिये सरकार कोई रोजगार का इंतजाम करे, फिर हम खुद ये धंधा छोड़ देंगी।

कभी रहमत खान के नाम पर चलता था चकला
बता दें कि अक्‍टूबर 2005 में भी वाराणसी का रेडलाइट एरिया काफी चर्चाओं में रहा था। उस वक्‍त गुड़िया संस्‍था और बीएचयू के छात्रों के संयुक्‍त प्रयास से यहां से कई नाबालिग लड़कियों को मुक्‍त कराया गया था। उस वक्‍त इलाके के दबंग रहमत खान नाम के व्‍यक्‍ति की यहां तूती बोलती थी, जिसकी नवंबर 2005 में गोली लगी लाश बरामद हुई थी। रहमत की मौत के बाद इस इलाके में होने वाले देह-व्‍यापार की गतिविधियों में कमी आई थी।