शराब की किल्‍लत से बाबा कालभैरव का दरबार भी प्रभावित, तामसी चढ़ावे में भारी कमी

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बनारस। नयी शराब नीति, अधूरी नीलामी प्रक्रिया और मदिरा की बोतलों पर बार कोडिंग के सुस्‍त प्रॉसेस से जिले में शराब की घनघोर किल्‍लत हो गयी है। आलम ये है कि मयप्रेमियों को देसी-विदेशी शराब के ठेकों पर ढूंढने से भी मदिरा नहीं मिल रही। वहीं काशी के कोतवाल सहित सभी आठों भैरव के मंदिरों में चढ़ाया जाने वाला तामसी प्रसाद यानी मदिरा अब भोग पात्र से लगभग गायब हो चुका है।

काल भैरव मंदिर में Live VNS
इस बात की तस्‍दीक करने के लिए Live VNS ने बाबा काल भैरव के दरबार में पहुंचकर वहां मौजूद पुजारियों से जानकारी ली तो सभी ने इस बात की पुष्‍टि की। मंदिर के महंत अरुण नाथ दुबेके अनुसार इस वक्‍त बाबा को चढ़ाया जाने वाले विशेष पेय मदिरा की आवक काफी कम हो गयी है। हालांकि कुछ भक्‍त अभी भी कहीं से ढूंढ-ढांढ के मंदिर में मदिरा ला रहे हैं और अपने ईष्‍ट को समर्पित कर रहे हैं।

शराब के भोग से खुश होते हैं बाबा
वहीं मंदिर के एक अन्‍य पुजारी ने भी मदिरा की किल्‍लत की बात स्‍वीकार करते हुए बताया कि इन दिनों यहां नाममात्र की शराब ही चढ़ायी जा रही है। उन्‍होंने इसके लिए प्रदेश सरकार को जिम्‍मेदार ठहराया। पुजारी के अनुसार बाबा काल भैरव को मदिरा काफी प्रिय है। यहां मदिरा चढ़ाने से भक्‍तों की हर मुराद पूरी होती है।

खाली दिखी दुकान
वहीं इस संबंध में हमने बाबा कालभैरव मंदिर के निकट अंग्रेजी शराब की दुकान का भी जायजा लिया। हमें शराब की दुकान पूरी तरह खाली अवस्‍था में मिली। दुकान के मैनेजर ने बताया कि इस वक्‍त सरकार की ओर से कम मात्रा में शराब की सप्‍लाई हो रही है, जिसकी वजह से ग्राहकों को मायूस होना पड़ रहा है। उन्‍होंने ये भी माना कि शराब की सप्‍लाई कम होने के कारण बाबा के भक्‍त भी मायूस होकर जा रहे हैं।

तीन प्रकार का लगता है बाबा को भोग
मंदिर के महंत अरुणनाथ पांडेय ने बताया कि बाबा को तीन किस्‍म का भोग लगाया जाता है। इनमें सात्‍विक, तामसिक और राजसी भोग शामिल है। सात्‍विक भोग में फल-फूल इत्‍यादि, तामसिक में शराब, भांग आदि व राजसी भोग में बाबा का विशेष श्रृंगार किया जाता है। रविवार के दिन बाबा काल भैरव के दर्शन को बहुत विशेष माना जाता है, इस दिन यहां भक्‍तों की लंबी कतार लगती है।

काशी के कोतवाल हैं बाबा
यह भी बता दें कि बाबा काल भैरव काशी नगरी के कोतवाल माने गये हैं। इनकी अनुमति के बिना कोई भी काशी में वास नहीं कर सकता। यही कारण है कि बनारस में नियुक्‍ति प्राप्‍त करने के बाद हर अधिकारी पहले बाबा काल भैरव के मंदिर में आशीर्वाद लेने पहुंचता है। बाबा की सवारी श्‍वान (कुत्‍ता) है।

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