बनारस। फिल्‍मी दुनिया के मशहूर स्‍क्रिप्‍ट राइटर और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखने वाले प्रसिद्ध शायर व लेखक जावेद अख्‍तर शुक्रवार शाम संकट मोचन दरबार पहुंचे। बजरंगबली के इस पावन धाम में छह दिवसीय संगीत का महाकुंभ आयोजित है। इसी महाकुंभ में गोता लगाने यहां पधारे जावेद अख्‍तर का स्‍वागत बनारसियों ने पारम्‍परिक घोष हर-हर महादेव के साथ किया। यही नहीं मशहूर शायर के सम्‍मान में कुछ देर के लिये हनुमत् दरबार जयश्री राम के ओजस्‍वी और मंगल घोष से गूंजता रहा।

कई बार अपने बयानों से विभिन्‍न धार्मिक संगठनों की नाराजगी मोल लेने वाले जावेद अख्‍तर का स्‍वागत मंदिर के महंत प्रोफ़ेसर विश्वंभर नाथ मिश्र ने किया। उन्‍होंने बताया कि बजरंगबली के इस दरबार से जावेद अख्‍तर साहब का जुड़ाव काफी पुराना है।

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बाबा बजरंगबली का ये दरबार है शांतिदूत
संकट मोचन संगीत समारोह में जावेद अख्‍तर साहब को शांतिदूत के सम्‍मान से नवाजा गया। भारत के इस ऐतिहासिक और सुप्रसिद्ध हनुमान मंदिर से शांतिदूत का सम्‍मान मिलने पर जावेद अख्‍तर ने खुद को इस लायक नहीं माना। उन्‍होंने बाबा बजरंगबली के दरबार को इसका वास्‍तविक हकदार बताया।

सोच के नहीं आया कि क्‍या बोलना है
उन्‍होंने कहा, ”मैं लेखक हूं, शब्‍दों से काम चलाता हूं। मगर कभी-कभी दिल की बात शब्‍दों में नहीं आती। मुझे यहां सम्‍मान मिल रहा है, महंत जी ने मुझे शांति दूत बताया है, मैंने सोचा कि ये बात सोचने की नहीं महसूस करने की है। मैं यहां सोच के नहीं आया कि मुझे क्‍या बोलना है। शांति दूत के ऑनर की बात सुनकर मुझे लगा कि मैं इस काबिल नहीं हूं। शांतिदूत ये मंदिर अपने आप में है।”

संकट मोचन ब्‍लास्‍ट पर आतंकियों को कोसा
जावेद अख्‍तर ने 2006 में संकटमोचन मंदिर में हुए बम धमाकों को याद करते हुए कहा कि वो जब उस घटना के बाद यहां आये तो उनका मन बेहद दु:खी था। उन्‍होंने बताया कि शर्म से मेरा मन खिन्‍न हो गया, सोचने लगा किसने किया होगा ये, कौन हैं वो लोग जो इतना घृणित काम कर सकते हैं।”

महंत जी का पैर छूता था मैं
उन्‍होंने मंदिर के पूर्व महंत स्‍वर्गीय प्रो वीरभद्र मिश्र को याद करते हुए उनके साथ अपने जुड़ाव का भी बखान किया। जावेद अख्‍तर ने कहा, ”कुछ लोग वास्‍तव में बहुत महान होते हैं। महंत जी जब चलते थे तब लगता था कि उनके अंदर बहुत औरा है, उनमें बहुत तेज था, जिसे देखकर मैं चकित हो जाता था। मैं अपनी जिंदगी में बहुत कम लोगों के पैर छूता हूं, जिनके पैर मैं छूता था, उनमें से एक स्‍व. वीरभद्र मिश्र जी भी थे।

विरोधियों को सुनाया तुलसीदास का दोहा
अपने सीधे-सपाट बयानों से कई बार कट्टरवादियों के निशाने पर रहने वाले जावेद अख्‍तर ने तुलसीदास जी के एक दोहे से विरोधियों को संदेश भी दिया। उन्‍होंने कहा, ”मेरे विचार बहुतों को बहुत बुरे लगते हैं। मुझे तुलसीदास जी की चोपाई याद आ ही है। तुलसीदास जब रामचरित मानस लिख रहे थे तब काशी में कई ब्राह्मण उनसे बहुत नाराज हो गये, कहने लगे कि इतने महान ग्रंथ रामायण को तुम अवधी जैसी लोकभाषा में क्‍यों लिख रहे हो। जब काशी के विद्वान उनके खिलाफ हो गये, तब तुलसीदास जी ने कहा था –

”धूत कहो, अवधूत कहो, रजपूत कहो, कि जुलाहा कोहू,
कोहू की बेटी से बेटा न ब्‍याहा, कोहू की जात बिगाड़ न चाहू,
मांग के खइबो, महजीद में सोइबो, लेवे का एक ना देवे का दू।”


मेरे विचारों पर कभी-कभी कुछ मुल्‍ला और मौलवी लोग ऐताज करते हैं, तो मैं उनसे यही कहता हूं कि लेवे का एक न देवे का…। (और तभी संकटमोचन मंदिर में लगा कहा हर-हर महादेव का घोष)

यहां है सच्‍चा हिन्‍दुस्‍तान
अपने स्‍वागत से अभिभूत जावेद अख्‍तर ने संकटमोचन दरबार को सच्‍चा हिन्‍दुस्‍तान बताते हुए कहा कि यहां जो संगीत सुनते हैं, यहां जो लोग आते हैं, वही है सच्‍चा भारत, सच्‍चा हिन्‍दुस्‍तान, इससे हटकर सबकुछ झूठ है। ये एक महासागर है। जो इस महासागर में डूबा हुआ है, वही है सच्‍चा हिन्‍दुस्‍तानी।

संगीत में धर्म-जाति नहीं
उन्‍होंने संगीत जगत का उदाहरण देते हुए बताया कि हमारे हिन्‍दुस्‍तानी संगीत में विभिन्‍न धाराओं का समावेश है। यहां सबसे अच्‍छी चीज ये है कि संगीतकारों में एक दूसरे को लेकर बेइंतहा मुहब्‍बत और सम्‍मान देखने को मिलता है। ना भाषा, ना धर्म, ना जात-पात, यहां सिर्फ संगीत ही धर्म है। एक संगीतकार दूसरे संगीतकार से पूरी श्रद्धा से जुड़ता है, कोई पैर छूता है, कोई आशीर्वाद है।”

हमारे अपने हैं श्रीराम और श्रीकृष्‍ण
संकटमोचन संगीत समारोह में लोगों से मुखातिब होते हुए जावेद अख्‍तर ने विशेष रूप से बॉलीवुड स्‍टार आमिर खान की चर्चा की। उन्‍होंने कहा कि आमिर अगले कुछ सालों तक कोई फिल्‍म नहीं बना रहे। आमिर फिलहाल महाभारत पढ़ रहे हैं। कुछ लोग, कुछ मुल्‍लों-मौलवियों ने इसपर ऐतराज जताया है……

संकट मोचन मंदिर में जावेद अख्‍तर के संबोधन का पूरा वीडियो यहां देखें

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वाराणसी का रहने वाला हूं। 2005 से पत्रकारिता के विभिन्‍न माध्‍यमों से जुड़ा हुआ हूं। टीवी, प्रिंट व वेब मीडिया में फील्‍ड और डेस्‍क का अनुभव है। जी न्‍यूज़, अमर उजाला, हिन्‍दुस्‍तान, ईनाडु इंडिया सहित विभिन्‍न संस्‍थानों से जुड़कर अपनी सेवाएं दे चुका हूं। 2013 में वाराणसी के सबसे पहले डेली न्‍यूज के डिजिटल वेब पोर्टल Live VNS की शुरुआत की है। वेब डिज़ाइनिंग, ग्राफिक्‍स डिज़ाइनिंग, डिजिटल मार्केटिंग, SEO, SEM, वीडियो एडिटिंग, सोशल मीडिया स्‍ट्रेटेजी/मार्केटिंग आदि सेक्‍टर में हाथ आजमाता रहता हूं। अभी पत्रकारिता के आधा गुण ही हैं मुझमें। सोशल मीडिया पर यहां मुझसे जुड़ें।