जाते-जाते 17 साल पुराना ये ‘मामला’ भी खत्‍म कर गये वाराणसी के DM और SSP

बनारस। तबादलों की एक सुनामी आई और 24 घंटे के अंदर-अंदर प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र के दो बड़े प्रशासनिक अफसरों का ट्रांसफर हो गया। नयी टीम एक-दो दिन के भीतर ही ज्‍वाइन कर लेगी और वाराणसी को नये-नवेले डीएम एंड कलेक्‍टर तथा वरिष्‍ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मिल जाएंगे। मगर आपको ये जानकर हैरानी होगी कि वाराणसी छोड़ने से पहले जिले के इन दोनों सबसे ताकतवर कुर्सी पर बैठे पुराने वाले अफसरों ने भी एक बड़ा काम फाइनल कर दिया है।

17 साल से जार में बंद हैं ‘मुर्दा गवाह’
वाराणसी पुलिस के पीआर सेल प्रभारी की ओर से दी गयी जानकारी के अनुसार एसएसपी, वाराणसी आर के भारद्वाज के अथक प्रयास से पिछले 17 साल से परिक्षण होने के बावजूद जार में बंद करके रखे हुए हजारों बिसरों को अब नष्‍ट किया जा सकेगा।

2802 ‘मुर्दा गवाहों’ को मिलेगी ‘मुक्‍ति’
पुलिस के अनुसार बीएचयू के विधि चिकित्सा विज्ञान संस्थान में 14 अक्‍टूबर 2001 से 28 मई2017 की अवधि के दौरान जांच के लिये जिले के सभी थानों से भेजे गये बिसरे के 2803 नमूने संस्‍थान के पांच कमरों में 16,830 जारों में बंद करके सुरक्षित रखे गये है। इन सभी बिसरा नमूनों में से सिर्फ एक PM 838@17 ममता देवी, पत्नी मनोज राम को छोड़कर बाकी सभी 2802 को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गयी है।

 

बीएचयू के विधि विज्ञान प्रयोगशाला में जांच के लिये रखा गये विसरे और नरकंकाल।

डीएम योगेश्‍वर राम मिश्र ने टीम गठित कर दिया
बता दें कि इस कार्य के लिये जिले के एसएसपी आरके भारद्वाज के अनुरोध पर डीएम योगेश्‍वर राम मिश्रा ने टीम का गठन कर दिया है। टीम के सदस्यों में एसीएम- प्रथम वाराणसी, सीओ भेलूपुर, डाँ. पीयूष राय के निर्देशन में बिसरों को नष्ट करने की कार्रवाई की जा रही है।

ये विसरा क्‍या है?
जो लोग नहीं जानते, उन्‍हें मोटा-मोटी समझा दें कि अक्‍सर ऐसी अकाल मौत जिसमें जहर देकर हत्‍या की आशंका होती है, या मृत शरीश में जहर दिये जाने के संदिग्‍ध लक्षण दिखते हैं तो पोस्‍टमार्टम के दौरान शव से कुछ अंग जांच के लिये निकाल लिये जाते हैं। इन्‍हें ही विसरा कहते हैं।

क्‍या-क्‍या निकालते हैं
इनमें लीवर, किडनी जैसे जरूरी अंगों तथा शरीर के तरल पदार्थों को अलग-अलग जार में निकालकर सुरक्षित रखा जाता है। बाकी का शरीर मृतक के परिजनों को क्रिया-कर्म के लिये सौंप दिया जाता है।

क्‍या करते हैं विसरा का
अलग-अलग जार में सुरक्षित किये गये शव के विसरे को जांच के लिये फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री में भेजा जाता है, जिसके बाद टॉक्सिकोलॉजिकल डिपार्टमेंट के लोग इसकी विभिन्‍न केमिकल जांच करते हैं।

कब तक मिलती है रिपोर्ट
आमतौर पर विसरा जांच की रिपोर्ट सामने आने में दो से तीन हफ्ते का समय ही लगना चाहिये, लेकिन लैब की कमी और अधिक संख्‍या में सैंपलों के कारण पूरी जांच रिपोर्ट आने में 6 माह तक का समय लग जाता है। मगर इस बीच पुलिस अपनी जांच जारी रखती है और चार्जशीट में इस बात का उल्‍लेख करती है कि बिसरा रिपोर्ट आना बाकी है। ध्‍यान रहे कि बिसरा रिपोर्ट आने के बाद ही कोर्ट में चार्जशीट पर बहस शुरू होती है।

जाते-जाते भी पुण्‍य का काम
फिलहाल, 17 साल से अपने मृत शरीर को छोड़कर अपनी ही मौत के मुकदमे में गवाह बने हजारों बिसरों को अब ‘मुक्‍ति’ मिलने जा रही है। वाराणसी से विदा लेते हुए जिले के दो बड़े प्रशासिनक अफसरों ने वाकई पुण्‍य का काम किया है।

देखिये, जार में बंद अपनी ही मौत के मामले में गवाह बने हजारों विसरा। अब मिलने जा रही है ‘मुक्‍ति’, बीएचयू के विधि विज्ञान प्रयोगशाला पहुंचे एसएसपी आरके भारद्वाज।