‘शर्म की बात है कि आज महिलाओं की आवाज उठाने वाली औरतों को गालियां दी जा रही हैं’

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बनारस। दुनिया के एक बड़े सर्वे संस्‍था ‘थॉमसन रॉयटर फाउंडेशन’ की ओर से हाल ही में भारत को महिलाओं के लिये सबसे असुरक्षित देश की श्रेणी में पहला रैंक दिया गया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद से ही देश के नारीवादी संगठनों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। सामाजिक संगठनों के निशाने पर भी केंद्र सरकार है, जिस पर महिलाओं की सुरक्षा-अस्‍मिता को लेकर सामने आयी हालिया रिपोर्ट को आधार बनाकर हमले तेज हो गये हैं।

इसमें कोई शक नहीं कि देश के अधिकांश हिस्‍सों खासकर उत्‍तर भारतीय राज्‍यों में महिलाओं के खिलाफ अत्‍याचार और यौन हिंसा में साल दर साल इजाफा ही हुआ है। बावजूद इसके महिलाएं ना सिर्फ घर की चाहरदीवारियों से बाहर निकल रहीं हैं, बल्‍कि पुरुष प्रधान कहे जाने वाले समाज में अपना उज्‍जवल भविष्‍य भी तय कर रही हैं। चारो ओर से आने वाली निराशाजनक खबरों के बावजूद भारतीय महिलाएं डटी हुई हैं और यहां तक कि अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी काबीलियत साबित कर रही हैं।

समाजसेवा के क्षेत्र में उतरकर अपनी काबीलियत के दम पर वाराणसी की जनता खासकर महिलाओं के हक के लिये संघर्षरत ऐसी ही एक महिला हैं शालिनी यादव। वाराणसी से प्रकाशित अखबार ‘भारत दूत’ की एडिटर इन चीफ और कांग्रेस नेत्री शालिनी यादव पूर्व राज्‍यसभा उपसभापति और वाराणसी के सांसद रहे स्‍वर्गीय श्‍यामलाल यादव की बहु हैं। हाल ही में सम्‍पन्‍न हुए वाराणसी के मेयर पद के चुनाव में शालिनी अपनी दमदार उपस्‍थिति दर्ज करा चुकी हैं। हिन्‍दुस्‍तान में महिलाओं की स्‍थिति और खुद शालिनी यादव के संघर्ष को लेकर Live VNS ने उनसे विशेष बातचीत की है।

Live VNS : शालिनी जी, आप इतने पढ़े लिखे परिवार से सम्बन्ध रखती हैं, आज आप जिस मुकाम पे हैं, वहां तक पहुंचने में आपने किस प्रकार की चुनौतियों का सामना किया है?
शालिनी यादव : जी में एक राजनीतिक परिवार से आती हूँ, मेरे पिता जी इंजीनियर थे और बीएचयू से गोल्ड मेडलिस्ट थे। मेरे भाई और बहन दोनों इंजीनियर हैं, लेकिन मेरी शादी एक राजनीतिक परिवार में हुई।

उससे पहले में अपने कॉलेज और स्कूल लाइफ में सामाजिक मुद्दों पे काम करती आयी हूँ, क्यूंकि हमारे पिता जी को अपने गाँव से लगाव था और मैंने भी गाँव के जीवन को देखा है, तो मेरे मन में हमेशा से रहता था की मैं किसी NGO के द्वारा गाँव और गरीबों तक सहायता पहुंचा पाऊं और उन सबकी जरुरत पे मदद कर सकूँ।

जब मेरी शादी एक ऐसे परिवार में हुई जिनकी एक राजनीतिक पृष्ठ्भूमि रही है, मेरे ससुर स्वर्गीय श्यामलाल यादव जी के कामो को मैंने देखा है। उनकी कार्यशैली से मुझे मेरे काम को आगे बढ़ाने का बल मिला और मेरी इच्छाशक्ति और मजबूत हुई, क्यूंकि हमारे ससुर जी का राजनीतिकी करियर करीब 20 से 25 साल तक एक्टिव था। उसके बाद वह राजनीती से दूर हो गए थे, लेकिन उसके बावजूद भी लोगों के मन में उनके प्रति सम्मान काम नहीं हुआ।

उनके कामों को लोग भूले नहीं थे। उनको गुज़रे 13 साल हो चुके हैं लेकिन समाज में उनके प्रति श्रद्धा कम नहीं हुई है और ना ही लोगों के वह मन से दूर हुए है। आज भी जब में पार्टी से जुड़े कामों के लिए बनारस के लोगों से मिलती हूँ, या फिर दिल्ली और लखनऊ जाना होता है तो वहां पर भी चाहे पक्ष या विपक्ष के लोग हो दोनों ही तरफ से हमे उनकी प्रशंसा मिलती है।

उनके प्रति लोगों का प्यार मिलता है यह देख के मुझे काफी बल मिलता है की हमे भी कुछ ऐसा करना चाहिए की जीते जी ही नहीं आपके जाने के बाद भी लोग आपके नाम को सम्मान के साथ याद करें और मेरा भी यही मकसद अब है।

Live VNS : आपका खुद का क्या सपना है अब आप आगे क्या करना चाहती है ??
शालिनी यादव : मैं आज जिस राजनीतिक राह पे उत्तरी हूँ, अपने बाबूजी (श्‍यामलाल यादव) की विरासत ले के मेरा बस अब यही काम है की जिस प्रकार बाबूजी ने लोगों की सेवा की, समाज के उद्धार के लिए अपना जीवन राजनीति में लगाया, मैं उसी कारवां को आगे बढाती रहूं। जो बाबूजी ने भलाई की ज्योति जलाई थी, मैं उसे मशाल बना कर समाज में फैले अँधेरे को दूर कर लोगों की सहायता कर सकूँ, क्यूंकि हर किसी को ऐसा मौका नहीं मिलता की वह इस मुकाम तक पहुँच सके, लेकिन मैं काफी भाग्यशाली हूँ। बाबूजी के आशीर्वाद से उनको जाने वालों का साथ हमे काफी मिला और लोगों का प्यार भी हमे मजबूत बनाता है और आगे की ओर बढ़ने का रास्ता दिलवाता है।

Live VNS : आपका परिवार राजनीतिक नहीं था लेकिन आपकी शादी एक राजनीतिक परिवार में हुई आज आप जब राजनीतिक कार्यक्रमों में और पुरुषों के साथ मंच या रैलियों में जाती है तो क्या आपको कोई असहजता लगती है या कोई आपके घर से आपको इन कामों में जाने से रोकता है?
शालिनी यादव : मैंने बचपन से ही कन्वेनेट में पढ़ाई की है, जहाँ पुरुष और महिलाएं दोनों साथ शिक्षा ग्रहण करते हैं। जहाँ तक रही मेरे परिवार की बात तो वह मुझे काफी प्रोत्साहित करते हैं। मुझे हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं, जिसकी वजह से मुझे कभी असहजता का आभास भी नहीं होता है। मैं काफी मुखर होकर अपनी बात रख पाती हूँ। यहाँ पर अपने हस्बैंड का काफी धन्यवाद दूंगी क्यूंकि बाबूजी के जाने के बाद उन्होंने उनकी राजनीतिक विरासत को खोया नहीं बल्कि उसको आगे बढ़ाया और मुझे भी वह पूरा सहयोग करते हैं, कदम से कदम मिलाके चलते हैं और मुझे मेरे इस राजनीतिक राह में अपना पूरा योगदान देकर आगे बढ़ा रहे हैं।

Live VNS : अभी हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आयी है कि भारत में महिलाएं सुरक्षित नहीं है, आप का इस पे क्‍या नजरिया है?
शालिनी यादव : जब 2011 जब यह रिपोर्ट आयी थी तो हम इसमें चौथे स्थान पर थे लेकिन 2018 में आज हम सीरिया और अफगानिस्तान जैसे देशों को पीछे छोड़ते हुए पहले स्थान पर हैं, जो की हम सबके लिए बड़ी शर्म की बात है और इसके पीछे की जो वजह है वह आए दिन हो रहे रेप की घटनाएं।

आप देख लीजिये औरतों और बच्चियों के साथ जिस प्रकार दुष्कर्म की घटनाओं में इजाफा हुआ है, यह साफ़ दर्शाता है की महिलाओं के प्रति हो रहे अत्याचार काफी बढे हैं, कोई भी सरकार रही हो उसने महिला सुरक्षा के लिए काफी बातें की और कदम भी उठाये गए लेकिन जिस प्रकार आज के समय महिलाओं के प्रति हमले और अत्याचार में वृद्धि हुई है यह बड़ी शर्म की बात है।

हम महिलाएं इस समाज में बराबरी का हक़ रखती हैं, 50प्रतिशत के साथ हम कंधे से कन्धा मिलाकर समाज को आगे बढ़ा रही हैं। सिर्फ औरते ही नहीं बच्चियों के साथ जिस बर्बरता से बलात्कार हुए हैं, उसने पूरी इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। अब आप कठुआ रेप केस को देख लीजिये जहाँ पर पीड़िता के साथ कितनी बर्बरता से उसका बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी और सबसे बड़ी शर्म बात यह रही की कुछ लोगों ने पीड़िता को धर्म से जोड़ कर राजनीति शुरू कर दी। उस केस से जुड़े अपराधियों के बचाव में लोग खड़े नज़र आये जो कि काफी निंदनीय है।

अमूमन ऐसी घटनाओं को हम गाँव और शहर से दूर देखते हुए पाए जाते हैं। औरतों के पढ़ा लिखा ना होना भी उनके साथ हो रही घटनाओ के प्रति आवाज़ ना उठा पाना एक बड़ी समस्या है। उन्नाव केस में भी यही हुआ। जब तक हाईकोर्ट ने आदेश नहीं दिया था सरकार के लोग अपराधी को बचने में लगे थे। यह सब देख के अपराधियों का मनोबल बढ़ता है और वह सब ऐसी घटनाओं को अंजाम देते हैं।

हमारे पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी जी के समय से ही एक मुहिम शुरू हुई थी जिसमे गाँव की महिलाओं को सशक्त किया गया था, जिसके चलते आज महिलाओं की स्‍थिति में काफी सुधार हुआ है, लेकिन आजकल महिलाओं की आवाज़ को दबाया जा रहा है। उनको उनके प्रति हो रहे अत्याचार पे बोलने नहीं दिया जा रहा है।

आप चाहे तो सोशल मीडिया को ही देख लीजिये आज जो लोग महिला सशक्तिकरण के लिए जानी जाती हैं, चाहे वह बरखा दत्त हो या शहला राशिद, या फिर सुषमा स्वराज, ऐसी महिलायें जो इस मुकाम है की वह समाज की महिलाओं के प्रति आवाज़ उठा पाती हैं, लेकिन जिस प्रकार से आज सोशल मीडिया में उनके ऊपर होने वाले ट्रॉल्स और कमेंट में काफी वृद्धि आयी है और लोग उनसे अभद्र भाषा में बात कर रहे हैं। यही नहीं उनको लोग जान से मारने और उनके बलात्कार तक करने की धमकी देते हैं।

यूपीए सरकार के दौर में महिलाएं अपनी बात रखने के लिए सडक से लेकर संसद तक पहुंच जाती थीं, आज ऐसा कुछ नहीं कर पाती हैं। हमारी बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ की ब्रांड अम्बेस्डर माधुरी दीक्षित ने कोई सवाल या आवाज़ नहीं उठायी, ना ही उनका किसी घटना पे कोई बयान आया है। यह सब बड़ी दुःख की बात है की जिम्मेदार लोग आज सत्ता के मोह में और दबाव में आके समाज की इस कुरीति के खिलाफ आवाज़ नहीं उठा रहे हैं। जिसके चलते अपराधियों का मन काफी बढ़ा है और वह अपराध करने से पहले किसी से नहीं डरते हैं।

Live VNS : बिना किसी राजनीतिक चर्चा के आप महिलाओं को क्या टिप्स देना चाहेंगी की किस प्रकार वह आगे बढ़ें और अपने आपको सुरक्षित रखे?
शालिनी यादव : देखिए महिलाएं तो आगे बढ़ रही हैं, जिस भी जगह आप देखिए आज महिलाएं आपको दिखेंगी, लेकिन जो असुरक्षा का माहौल आप देख रहे हैं उसकी कुछ ना कुछ जिम्मेदारी सरकार की भी बनती है। सरकार उनको उनका हक़ और सुरक्षा देने में असफल है।

अभी आपने उत्तराखंड में देखा होगा की एक स्कूल टीचर जिसने अपनी नौकरी में तबादले के लिए मुख्यमंत्री से जब गुहार लगायी तो उसके साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ और उसके उपर जो करवाई हुई वह काफी निंदनीय थी इसमें वहाँ के मुख्यमंत्री ने जिस तरह उस महिला टीचर से अभद्र व्यवहार किया यह काफी गलत था। क्यूंकि आप देख सकते हैं महिलाओं को उनके परिवार से काफी बढ़ावा दिया जाता है उसके बावजूद भी वह जब कही काम पे जाती हैं तो उनको तकलीफों से गुजरना पड़ता है।

बैंकों में काम करने वाली महिलाएं जब उनके बच्चे होने वाले होते हैं तो उनके साथ उस प्रकार का व्यवहार किया जाता है की वह अपने आपको निरीह समझने लगती हैं, उनको कम सुविधा दी जाती है, उनका ट्रांसफर दूर दराज़ के इलाकों से हटा कर उनके घर के नजदीक नहीं होता, यह सब मुद्दे भी काफी गंभीर साबित होते हैं। इसको करने में सरकार विफल हो रही है और ऐसे परिणाम सबके सामने आ रहे हैं क्यूंकि भारतीय महिलाएं खुद से आगे बढ़ने में सक्षम है लेकिन अगर उनको सुरक्षित माहौल नहीं दिया जायेगा तो वह काफी बड़ा चिंता का विषय है। जिसमें फिर महिलाओं को खुद से ही खुद को सुरक्षित करना होगा।

हमे हमारी बच्चियों को मार्शल आर्ट्स सिखाना पड़ेगा और उन्हें सक्षम बनाना होगा ताकि अगर सरकार नाकामयाब है उनको सुरक्षा देने में तो वह खुद से अपनी सुरक्षा कर सकें और आगे बढ़ सकें।

देखें वीडियो, Live VNS से बातचीत में क्‍या बाेलीं कांग्रेस नेत्री शालिनी यादव