नारस। जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकियों द्वारा धोखे से किये गए हमले में शहीद हुए 32 आरआर के जवान रामबाबू को पूरे सैनिक सम्मान के साथ हरिश्चन्द्र घाट पर अंतिम विदाई दी गयी। इसके पहले 39 गोरखा ट्रेनिंग सेंटर में जवानों, सेना के अधिकारियों, वाराणसी जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों तथा परिजनों ने उन्‍हें सलामी दी। इस दौरान शहीद के परिजनों के आंखों में आंसू के साथ दिल मे गर्व साफ झलक रहा था।

39जीटीसी में रहता है परिवार
इस दौरान 39 जीटीसी में शहीद रामबाबू को सलामी और पुष्पचक्र अर्पित करने के बाद 39 जीटीसी के कमाण्डेन्ट ब्रिगेडियर हुकुम सिंह बंसला ने बताया कि रामबाबू का परिवार इसी ट्रेनिंग सेंटर में रहता है। रामबाबू ने यहां से ही सेना की ट्रेनिंग हासिल की है और साल 2013 में उसने सेना ज्वाइन की थी।
रामबाबू अभी महज 24 वर्ष के ही थे।

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अस्‍पताल में प्राप्‍त हुई वीरगति
ब्रिगेडियर हुकुम सिंह के अनुसार, उन्‍हें जब सूचना मिली की रामबाबू आतंकियों की गोली का शिकार होकर घायल हो गए हैं और सेना के 92 बेस में भर्ती हैं, तो वहां संपर्क साधा गया। उस वक्‍त तक उनकी स्थिति काफी नाज़ुक। हालांकि, कुछ देर बाद ही उन्‍हें वीरगति प्राप्‍त हो गयी। शहिद का शव शनिवार देर रात विशेष विमान के जरिये वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट लाया गया।

आंखों में आंसू, सीने में गर्व
शहीद के परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है, पर दिल मे अपने बेटे के लिए गर्व भी है। परिजनों ने किसी से बात नहीं की पर उनकी आंखों में उनके आंसुओं के साथ साथ बेटे के भारत मां पर शहीद होने का गर्व भी छलक रहा है।

डीएम, एसएसपी ने भी दी श्रद्धांजलि
शहीद को अंतिम सलामी देने 39 जीटीसी पहुंचे ज़िलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने कहा कि रामबाबू की शहादत पर पूरे देश को गर्व है। हमारे इस अमर सपूत को आतंकियों ने कायरता दिखाकर मारा है। इस दौरान जिले के वरिष्‍ठ पुलिस अधीक्षक आनंद कुलकर्णी ने भी शहीद रामबाबू को श्रद्धांजलि अर्पित की है।

मातमी धुन के बीच दी गयी अंतिम सलामी
39 जीटीसी से रविवार सुबह शहीद रामबाबू के पार्थिव शव को अंत्योष्टि के लिये वाराणसी के हरिश्चंद्र घाट पर लाया गया। यहां पिता सूर्य शाही ने अपने इकलौते बेटे शहीद रामबाबू को मुखाग्नि दी। इसके अलावा रामबाबू को 39जीटीसी के जवानों ने हरिश्‍चंद्र घाट पर गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया।

Live VNS भी देश पर अपनी जान न्‍यौछावर करने वाले वीर सपूत रामबाबू को शत शत नमन करता है।

देखें शहीद की अंतिम यात्रा का ये वीडियो।

देखें तस्‍वीरें

जरूर सुनें, सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की कर्णप्रिय आवाज में एक शहीद की मां का दर्द (सौ. रंग दे बसंती)

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