नातन धर्म के महान ग्रंथों में श्रीमद्भागवद्गीता का नाम बड़ी श्रद्धा के साथ लिया जाता है। दरअसल, ये महान ग्रथ महर्षि वेदव्‍यास द्वारा रचित दुनिया के सबसे बड़े महाकाव्‍य महाभारत के भीष्‍मपर्व के अंतर्गत एक उपनिषद् है। दुनिया की लगभग सभी प्रमुख भाषाओं में श्रीमद्भागवद्गीता का अनुवाद किया जा चुका है।

Live VNS भी अपने पाठकों के लिए प्रतिदिन गीता के पांच श्‍लोकों को हिन्‍दी अनुवाद के साथ प्रस्‍तुत कर रहा है। हम अपने पाठकों से अपेक्षा करते हैं कि गीता के इन श्‍लोकों को बिना किसी पूर्वाग्रह के पढ़ें और भक्‍ति, कर्म और ज्ञान योग से संबंधित अपनी जिज्ञासाओं को शांत करें। कल हमने गीता के द्वितीय अध्‍याय के श्‍लोक संख्‍या ग्‍यारह से पंद्रह की व्‍याख्‍या की थी। आइए अब इस क्रम को आगे बढ़ाते हुए द्वितीय अध्‍याय के श्‍लोक संख्‍या सोलह से बीस पर नजर डालते हैं।

विज्ञापन

अध्‍याय दो

श्‍लोक संख्‍या सोलह से बीस


नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सत:।
उभयोरपि दृष्‍टोन्‍तस्‍त्‍वनयोस्‍तत्त्वदर्शिभि:।। (16)
****************

भावार्थ: वस्‍तु की तो सत्‍ता नहीं है और सत् का अभाव नहीं है। इस प्रकार इन दोनों का ही तत्त्व तत्त्वज्ञानी पुरुषों द्वारा देखा गया है।


अविनाशि तु तद्विद्धि येन सर्वमिदं ततम्।
विनाशमव्‍ययस्‍यास्‍य न कश्‍चित्‍कर्तुमर्हति।। (17)
****************

भावार्थ: नाशरहित तो तू उसको जान, जिससे यह सम्‍पूर्ण जगत्- दृश्‍यवर्ग व्‍याप्‍त है। इस अविनाशी का विनाश करने में कोई भी समर्थ नहीं है।


अन्‍तवन्‍त इमे देहा नित्‍यस्‍योक्‍ता: शरीरिण:।
अनाशिनोप्रमेयस्‍य तस्‍माद्युध्‍यस्‍व भारत।। (18)
****************

भावार्थ: इस नाशरहित, अप्रमेय, नित्‍यस्‍वरूप जीवात्‍मा के ये सब शरी नाशवान् कहे गये हैं। इसलिए हे भरतवंशी अर्जुन, तू युद्ध कर।


य एनं वेत्‍ति हन्‍तारं यश्‍चैनं मन्‍यते हतम्।
उभौ तौ न विजानीतो नायं हन्‍ति न हन्‍यते।। (19)
****************

भावार्थ: जो इस आत्‍मा को मारने वाला समझता है तथा जो इसको मरा मानता है, वे दोनों ही नहीं जानते, क्‍योंकि यह आत्‍मा वास्‍तव में न तो किसी को मारता है और न किसी के द्वारा मारा जाता है।


न जायते म्रियते वा कदाचिन्‍नायं भूत्‍वा भविता वा न भूय:।
अजो नित्‍य: शाश्‍वतोयं पुराणो न हन्‍यते हन्‍यमाने शरीरे।। (20)
****************

भावार्थ: यह आत्‍मा किसी काल में भी न तो जन्‍मता है और न मरता ही है तथा न यह उत्‍पन्‍न होकर फिर होने वाला ही है, क्‍योंकि यह अजन्‍मा, नित्‍य, सनातन और पुरातन है, शरीर के मारे जाने पर भी यह नहीं मारा जाता।


क्रमश:

पिछले श्‍लोक को पढ़ने के लिए यहां क्‍लिक करें

विज्ञापन
Loading...
www.livevns.in का उद्देश्‍य अपनी खबरों के माध्‍यम से वाराणसी की जनता को सूचना देना, शि‍क्षि‍त करना, मनोरंजन करना और देश व समाज हित के प्रति जागरूक करना है। हम (www.livevns.in) ना तो कि‍सी राजनीति‍क शरण में कार्य करते हैं और ना ही हमारे कंटेंट के लिए कि‍सी व्‍यापारि‍क/राजनीतिक संगठन से कि‍सी भी प्रकार का फंड हमें मि‍लता है। वाराणसी जिले के कुछ युवा पत्रकारों द्वारा शुरू कि‍ये गये इस प्रोजेक्‍ट को भवि‍ष्‍य में और भी परि‍ष्‍कृत रूप देना हमारे लक्ष्‍यों में से एक है।