विकास की दौड़ में शांत खड़ा PM के गोद लिए गांव जयापुर का किसान

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वाराणसी साल 1965 में देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने दिल्ली के रामलीला मैदान में एक ऐसा नारा “जय जवान, जय किसान” का दिया। जिसकी चर्चा आज भी होती है और किसान आज भी हमारे भारत देश में पूजनीय है। जैसे की देश की रक्षा में लगे हुए जवान है। मौजूद समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यकाल में इस चर्चित नारे की प्रमाणिकता कहाँ तक बची। इस चीज़ की पड़ताल के लिए Live VNS ने प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत 2014 में गोद लिए गए वाराणसी के जयापुर गाँव का दौरा किया और किसानो का हाल जाना। पेश है प्रधानमंत्री के गाँव से Live VNS की एक खास रिपोर्ट।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अगस्त 2014 को जब वाराणसी ज़िले के जयापुर गाँव को गोद लेने का एलान किया। उसी दिन से जयापुर में विकास का पहिया घूमने लगा और साल भर बीतने के बाद गाँव कई सारी सुविधा से संपन्न हो गया। चारों तरफ बायो टॉयलेट, गरीबों के लिए आवास, सोलर स्ट्रीट लाइट, कई राष्ट्रीयकृत बैंको की शाखा, कन्या विद्यालय खोले गए। सभी खुश है जयापुर में, पर जयापुर गांव में एक तबका ऐसा भी है, जिसकी आँखों में चमक तो है पर मन में उदासी है। यह कुछ कहने में भी संकोच करता है और इसके दिल में आस भी है। ये है जयापुर का किसान जो धरती का सीना चीर अन्न उगाता है।

गन्ने की खेती में अग्रणी है जयापुर
गाँव के किसान रमाशंकर सिंह ने बताया कि जयापुर का गन्ना इस पूरे क्षेत्र में सबसे अच्छा होता है। आलम यह है कि गाँव में जिसके पास 5 एकड़ ज़मीन 4 एकड़ में गन्ना बोता है और 1 एकड़ में अन्य फसलें बोता, रमाशंकर बस यही चुप हो गए और अपनी गन्ने की फसल पर काम करने लगे। रमाशंकर के पुत्र पन्ना ने बताया कि आज से दस साल पहले तक यहाँ हर किसान गन्ना बोता था। यहाँ का गन्ना 8 से 10 फुट का होता था। यहाँ का गन्ना उत्पाद इतना अग्रणी था कि जब भदोही ज़िले की औराई चीनी मिल जब यहाँ का गन्ना पहुँचता था तो मिल मालिक सबकी तौल रुकवाकर पहले जयापुरा के गन्ने की तौल करवाते थे।

औराई चीनी मिल बंद होने से परेशान है किसान
आज भी 5 बीघे में गन्ने की खेती करने वाले 60 वर्षीय सुक्खू ने बताया कि आज से 10 साल पहले औराई चीनी मिल तत्कालीन सरकार ने बंद करवा दी। जिससे जयापुर का किसान टूट सा गया है। उस वक़्त हमारे द्वारा भेजे गए गन्ने का मूल्य भी हमें आज तक नहीं मिला है, वही हमारी फसल अब औने पौने दामो में बिक रही है। चीनी मिल के बंद होने से कितने ही किसानो ने गन्ने की खेती करना बंद कर दिया है।

रस के लिए सप्लाई होता है गन्ना
75 वर्षीय किसान पन्ना लाल बताते है कि पहले हम 8 बीघे में गन्ना बोते थे, पर अब 2 बीघे में बोते है। जितने भी किसान अभी भी गन्ना बो रहे है। सब अपना गन्ना गन्ने के रस के लिए वाराणसी और आस पास के शहरो को भेज रहे है। पन्ना ने बताया कि रस के लिए गन्ना भेजने में हमें बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हमें अपनी फसल का वाजिब दाम नहीं मिलता उसके अलावा गन्ना गाँव से शहर तक ले जाने पर रस्ते में जगह जगह पुलिस परेशान करती है। जिससे व्यापारी गांव में आने से घबराते है।

प्रधानमंत्री से एक मिनी चीनी मिल की आस
जयापुर के गन्ना किसान रमाशंकर सिंह ने बताया कि आज भी जयापुर का किसान गन्ना उगाना जानता है और गन्ना ही जयापुर के विकास का मुख्य पहिया है। औराई मिल को शुरू करने से यहाँ के किसानो को फायदा हो सकता है, पर उसे शुरू करने के बाद किसान अपना बकाया मूल्य मांगना शुरू कर देंगे जिसे कुछ दिन और गन्ने की पेराई प्रभावित रहने की संभावना है। ऐसे में हमारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग है कि जिस तरह से वो गाँव के और यहाँ के निवासियों के विकास के लिए चिंतित है। हमारे गाँव में हम किसानो के लिए एक मिनी चीनी मिल की स्थापना कराएं ताकि किसानो को परेशान न होना पड़े।

जय जवान, जय किसान का नारा लगाने वाले इस देश में किसानो की यह दशा अब आम बात हो गयी है , पर प्रधानमंत्री के द्वारा गोद लिए गए गाँव जयापुरा के किसानो को अपने प्रधानमंत्री पर पूरा भरोसा है कि वो उनकी बात सुनेंगे और जल्द ही इसका कोई उपाय निकालेंगे।