आर्टिकिल 35A को कोर्ट में चुनौती देने वाले पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ बोले, ‘टूट जाये ऐसी गंगा-जमुनी तहजीब’

बनारस। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 35ए की संवैधानिकता का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। आगामी 19 जनवरी 2019 को इसपर अगली सुनवाई होनी है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में अनुच्छेद 35ए के कारण जम्मू-कश्मीर में विभिन्न वर्गो के साथ हो रहे भेदभाव का आरोप लगाया जाता रहा है। साथ ही इसे निरस्त करने की मांग भी उठती रही है।

अनुच्‍छेद 35ए के खि‍लाफ सुप्रीम कोर्ट में याचि‍काकर्ता, विदेश मामलों के जानकार और पाकिस्तान के आज टीवी चैनल में भारत के ब्यूरो प्रमुख तथा वायस आफ अमेरिका के विशेषज्ञ पैनल के सदस्य पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ ने इस पूरे मुद्दे पर अपना पक्ष रखते हुए हाल ही में Live VNS से वि‍शेष बातचीत की है।

वाराणसी आने का मकसद
पुष्‍पेन्‍द्र कुलश्रेष्‍ठ ने हमे बताया, “वाराणसी के लोगों ने बुलाया है और वाराणसी के इतने बढ़ि‍या-बढ़ि‍या लोग हैं उन्‍होंने याद कि‍या है, इसलि‍ए आये हैं। एक दूसरा मकसद ये भी है कि‍ वाराणसी के अंदर वी द इंडि‍या का बनारस का चैप्‍टर है, उसने एज प्रोग्राम आयोजि‍त कि‍या है। इस प्रोग्राम में जो वि‍षय है वो है आर्टि‍कि‍ल 35 ए।”

ये एक इलीगल अनुच्‍छेद है
पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ के अनुसार, “संवि‍धान में इस अनुच्‍छेद को गैरकानूनी तरीके से डाला गया है। आर्टि‍कि‍ल 35ए और कश्‍मीरी आतंकवाद पर यहां एक सेमीनार है। इसमें देश के बड़े-बड़े वि‍द्वान हि‍स्‍सा ले रहे हैं। इसमें चर्चा होनी है कि‍ आखि‍र ये आर्टि‍कि‍ल 35ए है क्‍या और इसके क्‍या इम्‍प्‍लि‍केशन्‍स हैं और ये क्‍यों हटना चाहि‍ए।”

राजनीति के चले लटक रहा मामला
कुलश्रेष्ठ ने आरोप लगाते हुए कहा, “19 अगस्‍त 2014 को सुप्रीम कोर्ट में मैं और मेरी टीम ने इसे चैलेंज कि‍या है। 19 जनवरी 2019 को इसकी सुनवाई है। कोर्ट ने तो पूरी तौर पर इसे गलत मान लि‍या है, लेकिन राजनीति‍क कारणों से इसकी डेट बढ़ाई जा रही है।”

ताकि लोगों को पता लगे
पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ के अनुसार, “हम बनारस के लोगों के बीच इस गैरकानूनी धारा के खि‍लाफ बात करने आये हैं, ताकि‍ लोगों को भी इसके बारे में पता लगे। जब भी धारा 35ए की बात होती है तो जम्‍मू-कश्‍मीर के जो ढाई जि‍ले हैं, वहां के कुछ लोग ये भाषा बोलते हैं कि‍ अगर धारा 35ए से छेड़छाड़ की गयी तो जम्‍मू कश्‍मीर में कोई ति‍रंगा उठाने वाला नहीं मि‍लेगा। जम्‍मू-कश्‍मीर भारत से अलग हो जाएगा। खून खराबा हो जएगा। ऐसे लोगों को जवाब देने के लि‍ये, उन लोगों को जो अनुच्‍छेद 35ए के बारे में नहीं जानते, क्‍या वजह है कि‍ जम्‍मू-कश्‍मीर की पॉलि‍टि‍कल पार्टीज़, आतंकवादी और अलगाववादी सब कोई एक ही भाषा बोलते हैं और सुप्रीम कोर्ट को चैलेंज करते हैं। लि‍हाजा आम जनमानस को हम कैसे तैयार करें। एक दबाव बने कि‍ अगर ढाई जिले के लोग चि‍ल्‍ला चि‍ल्‍ला के इस देश की ज्‍यूडि‍शरी को धमका सकते हैं तो 80 करोड़ लोग अपनी बात क्‍यों नहीं रख सकते।”

कोई जानता ही नहीं था, क्या है 35ए
पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ ने हमे बताया, “मैं लाहौर प्रेसक्‍लब में एक डि‍बेट में शामि‍ल था और वहां पाकि‍स्‍तान में मुझसे कि‍सी व्‍यक्‍ति‍ ने कहा कि‍ आपके यहां 370 को लेकर बातचीत होती है, लेकि‍न 35ए के बारे में बात नहीं होती। उस वक्‍त मुझे इस आर्टि‍कि‍ल 35 ए के बारे में पता नहीं था, मैं यहां आया और अपने दोस्‍तों से बात की। देश के बड़े वकीलों से बात की। तो उन लोगों ने बताया कि‍ इसके बारे में बहुत ज्‍यादा चर्चा नहीं होती है। पता ये लगा कि‍ अनुच्‍छेद 35ए 14 मई 1954 को राष्‍ट्रपति‍ के हस्‍ताक्षर से पारि‍त आदेश को संवि‍धान का हि‍स्‍सा बनाया गया। सबसे बड़ी बात ये कि‍ उस अनुच्‍छेद पर ना तो कभी संसद में चर्चा हुई और ना ही उसे संसद के पटल पर कभी रखा गया। इस अनुच्‍छेद के अंदर जो प्रावधान हैं, वो मैं समझता हूं कि‍ सबसे ज्‍यादा खतरनाक हैं। भारतीय संविधान के अंदर कई सारे अनुच्‍छेद को ये वायलेट भी करता है। एक तरफ भारत का संवि‍धान ये कहता है कि भारत के नागरि‍क को देश के कि‍सी भी हि‍स्‍से में बसने, रोजगार करने और वहां शि‍क्षा लेने का अधि‍कार है वहीं दूसरी तरफ जम्‍मू-कश्‍मीर के अंदर इस अनुच्‍छेद 35ए के जरि‍ये राज्‍य सरकार को ये पॉवर देता है कि‍ वहां की सरकार ये तय करेगी कि‍ कि‍सको जम्‍मू-कश्‍मीर की नागरि‍कता मि‍लेगी या नहीं मि‍लेगी। वहां भारत के लोग ना तो जमीन खरीद सकते हैं, न रोजगार कर सकते हैं।”

साढ़े सात लाख लोग प्रभावित हैं
पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ के अनुसार, “इस देश के लोगों को इसपर मनन करना चाहि‍ये और तमाम राजनीति‍क दलों को शर्म आनी चाहि‍ये। 1947 में जो लोग पाकि‍स्‍तान की तरफ से कश्मीर आये आज उनकी पांच पीढ़ि‍यों में साढ़े सात लाख जनसंख्‍या है। इसमें 80 फीसदी लोग दलि‍त और ओबीसी जाति‍ के हैं। उनको राज्‍य की नागरि‍कता नहीं मि‍ली है। वो ना तो राज्‍य में जमीन खरीद सकते हैं, ना नौकरी कर सकते हैं, ना ही पंचायत और लोकल बॉडी और ना ही वि‍धानसभा के इलेक्‍शन में वोट डाल सकते हैं। क्‍या हमारे देश में, जो हम पूरी दुनि‍या में चि‍ल्‍ला चि‍ल्‍ला के बताते हैं कि‍ भारत दुनि‍या का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। क्‍या कि‍सी लोकतंत्र में ये संभव है कि‍ कि‍सी राज्‍य को र्सि‍फ इसलि‍ये क्‍योंकि‍ वो एक मुस्‍लि‍म मेजॉरि‍टी स्‍टेट है उसे ऐसी पॉवर दे दी जाए जि‍ससे वहां के साढ़े सात लाख हि‍न्‍दू दोयम दर्जे की जिंदगी जीने को मजबूर बना दि‍ये जाएं। वे फुटपाथ पर रहने को मजबूर हैं। क्‍या ये अपने देश के लोकतंत्र के मुंह पर काला धब्‍बा नहीं है। क्‍या लोकतंत्र की दुहाई देने वाले दि‍ल्‍ली, बम्‍बई और मेट्रोपोलि‍टन में रहने वाले, जो बात बात पर मानवाधि‍कार की बात करते हैं, फ्रीडम ऑफ स्‍पीच की बात करते हैं, इतनी बड़ी ज्‍यादती जो इस देश में 70 साल से हो रही है, जि‍से ज्‍यूडि‍शरी ने भी पहले कभी नहीं देखा, राजनीति‍ ने भी नहीं देखा, बुद्धि‍जीवि‍यों ने भी नहीं देखा। ये एक बड़ी बात है, जि‍सको लेकर हम कोर्ट में गये हैं।”

हम लोगों को जागरूक कर रहे
पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ के अन्यसार, “कोर्ट में लगातार सुनवाई चल रही है। जहां कोर्ट की लड़ाई है वहां हम कोर्ट में लड़ रहे हैं जहां समाज में लोगों को जागरूक करने की जरूरत है वहां हम लोगों के बीच में जाकर जागरूक कर रहे हैं।”

तो खत्म हो जाये ऐसी गंगा-जमुनी तहजीब
हमारे सवाल कि क्या आपके इस याचिका से देश की गंगा-जमुनी तहजीब पर आंच नहीं आएगी। पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ ने कहा, “गंगा जमुनी तहजीब का ये कि‍सने मतलब बताया है कि‍ आप तीन लाख हि‍न्‍दुओं को मारें। उनकी बेटि‍यों और उनकी औरतों के साथ रेप करें। ये कि‍स ने कहा है कि‍ संवि‍धान की गलत धारा को अपना लें। अगर ऐसी गंगा जमुनी तहजीब इस देश में टूटनी है तो वो तत्‍काल टूट जाए। अगर अखलाक के साथ कोई ज्‍यादती हो जाती है तो पूरा देश उसके साथ खड़ा हो जाता है, लेकि‍न 3 लाख कश्‍मीरी पंडि‍तों को इसी देश में मारा जाता है, नारे लगाये जाते हैं कि‍ मर्दों को मार दो, औरतों को रख लो। संवैधानिक तौर पर हि‍न्‍दुओं को मान्‍यता नहीं देते। अगर ये गंगा जमुनी तहजीब है, तो मुझे शर्म है इस गंगा जमुनी तहजीब पर।”

कश्मीर के नेता ही आतंकियों के मददगार
उन्होंने आरोप लगाया, “वहां शि‍याओं को मुख्‍यमंत्री नहीं बनाया गया। दो तीन परि‍वार कश्‍मीर की सत्‍ता चला रहे हैं। ये राजनीति‍क दल ही आतंकवादि‍यों को पाल रहे हैं। सरकार को डरा रहे हैं। भारत से भी पैसा लेते हैं, पाकि‍स्‍तान से भी लेते हैं और वि‍देशों से भी पैसे लेते हैं।”

वोट बैंक की राजनीति है सब
कुलश्रेष्ठ के अनुसार, “ये देश लोकतंत्र से ज्‍यादा वोटबैंक की राजनीति‍ पर चल रहा है। एससी एसटी पर वोट बैंक की राजनीति‍ चल रही है। जहां ऐसी राजनीति‍ चल रही है। वहां ये बड़ा सवाल है।”

सरकारों से उम्मीद नहीं
उन्होंने कहा, “मैंने सरकारों से उम्‍मीद की होती तो सरकारों के मेनीफेस्‍टो में इसे लाने की कोशि‍श करता। सरकारों से नाउम्‍मीद होने के बाद इसे कोर्ट में ले गया। मैं न सत्‍ताधारी हूं ना वि‍पक्ष हूं मैं हि‍न्‍दुस्‍तान का आम नागरि‍क हूं।”

देखें पुष्‍पेन्‍द्र कुलश्रेष्‍ठ हुई पूरी बातचीत का वीडि‍यो