गोस्‍वामी तुलसीदास जी द्धारा स्‍थापित 400 साल पुरानी विश्‍व प्रसिद्ध रामलीला का हुआ शुभारंभ 

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नारस। श्रीरामचरित मानस के रचयिता संत गोस्‍वामी तुलसीदास जी द्धारा स्‍थापित चार सौ साल पुरानी तुलसीघाट की विश्‍व प्रसिद्ध रामलीला का शुभारंभ गुरूवार को मुकुट पूजा के साथ हुआ।

श्री गोस्‍वाती तुलसीदास रामलीला समिति द्धारा आयोजित विश्‍व प्रसद्धि रामलीला का शुभारंभ गुरूवार को मुकुट पूजा से हुआ। अश्‍वनी कृष्‍ण पक्ष दशमी में तुलसीघाट के तुलसी मंदिर में अखाड़ा गोस्‍वामी तुलसीदास व संकटमोचन मंदिर के महंत व रामलीला समिति के सभापति प्रो विश्‍वम्‍भर नाथ मिश्र ने सर्वप्रथम विध्‍नहर्ता गणेश का पूजन किया तत्‍पश्‍चात पंचस्‍वरूपों राम, लक्ष्‍मण,भरत,शत्रुध्‍न व हनुमान जी मुकुट, मुखौटा व बनने वाले स्‍वरूपों का पूजन किया। साथ ही मूल श्रीरामचरित मानस से पांच दोहों का संगीतमय सस्‍वर पाठ रामायणियों ने छांछ, मजीरा व मृंदग के वाद्य के साथ किया।

इस अवसर पर महंत प्रो विश्‍वम्‍भर नाथ मिश्र ने कहा की श्री गोस्‍वामी तुलसीदास जी ने कलिमलग्रसित जीवों के उपकारार्थ श्रीरामचरित मानस की रचना की और भगवान के चरित्रों को नेत्रों के समक्ष मूर्त रूप देने के लिये रामलीला का प्रादुर्भाव किया।

गोस्‍वामी तुलसीदास की रामलीला प्रचलित सभी लीलाओंं की मूलभूत आदिलीला है। रामलीला के व्‍यास पंडित  श्‍याम विहारी मिश्र ने ने लीला का संयोजन किया।

इस अवसर रामलीला समिति के मंत्री बाबू राम दीक्षित, गोपाल पाण्‍डेय, प्रभुदत्‍त त्रिपाठी, विश्‍वनाथ यादव छेदी सहित काफी संख्‍या में लीला प्रेमी उपिस्‍थत थे। लीला के अंत में पंच स्‍वरूपों की अारती कर भक्‍तों में प्रसाद का वितरण किया गया।