रथयात्रा, भरत मिलाप और नक्‍कटैया के बाद अब तैयार हो जाइए काशी के चौथे लक्खी मेला के लिये

नारस। शारदीय नवरात्र के आते ही वाराणसी में व्रत और त्यौहार शुरू हो जाते हैं। रथयात्रा के मेला, नाटी इमली के भरत मिलाप और चेतगंज की नक्‍कटैया के बाद अब वाराणसी के चौथे लक्‍खी मेला (जिसमें एक लाख से ज्‍यादा लोग जुटते हैं) की तैयारियां शुरू हो गयी हैं।

आने वाले 11 नवम्बर को काशी का सुप्रसिद्ध लक्खा मेला तुलसी घाट के ‘नाग नथैया’ का आयोजन होगा। इसके लिये इस वर्ष कृष्‍ण लीला का शुभारंभ 31 अक्टूबर से हो जाएगा, जिसकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।

492 साल पहले शुरू हुई परंपरा
492 साल पहले कार्तिक माह में शुरू की गयी इस कृष्‍ण लीला का शुमार बनारस के लक्‍खा मेले के तौर पर किया जाता है। इस सम्बन्ध में लीला का आयोजन करवाने वाले संकट मोचन मंदिर के महंत प्रोफ़ेसर विश्वम्भरनाथ मिश्रा ने बताया कि गोस्वामी तुलसी दास द्वारा भदैनी में लगभग 492 वर्ष पहले कार्तिक माह में यह लीला शुरू की गयी थी। 22 दिनों की यह लीला आज भी अनवरत चली आ रही है।

11 नवम्बर को होगी नाग नथैया
प्रोफेसर विश्‍वम्‍भरनाथ मिश्र ने बताया की इस बार नाग नथैया की लीला का मंचन 11 नवम्बर को तुलसी घाट पर होगा। इसके पहले 31 अक्टूबर से लीला का मंचन शुरू हो जाएगा। इसमें भगवान् कृष्ण के जन्मोत्सव से लेकर उनके द्वारा किये गए पूतना वध, कंस वध, गोवर्धन पर्वत सहित कई लीलाओं का मंचन किया जायेगा।

एक माह पूर्व से पात्रों की दी जाती है ट्रेनिंग
नाग नथैया की प्रसिद्द लीला के लिए कृष्ण, बलराम और राधा का चयन एक महा पूर्व ही किया जाता है। इन्हे एक माह तक घाट किनारे ट्रेनिंग दी जाती है, जिसमें तैराकी की ट्रेनिंग मुख्य होती है। इस लीला के सभी पात्र दुनिया के सबसे पुराने जीवंत मोहल्‍ले के तौर पर पहचाने जाने वाले भदैनी इलाके के ही होते हैं।

ये है बनारस का चौथा लक्खी मेला
सावन में रथयात्रा मेले से शुरू होते हुए काशी में कई लक्‍खी मेले का आयोजन होता है। एक लाख लोगों से भी ज्‍यादा आस्‍थावानों की जुटान वाले आयोजन को काशी में लक्‍खी मेले की उपमा दी गयी है। इसमें रथयात्रा का मेला, नाटी इमली का भरत मिलाप, चेतगंज की नक्‍कटैया और तुलसीघाट की नाग नथैया शामिल है। ये सभी चारो लक्‍खी मेले वाराणसी की पारंपरिक पहचान से जुड़े हुए हैं, जिन्‍हें सैकड़ों वर्षों से आज तक परंपरागत तौर पर ही मनाया जाता है।