वाराणसी : फूल मंडी में ग्राहकों का रेला, फिर भी चिंतित है दुकानदार

नारस। दीपावली खुशियों का त्यौहार है और भारत में कोई भी ऐसा ख़ुशी का त्योहार नहीं है जिसमे फूलों का समावेश न हो, पर दीपावली पर फूलों समावेश का वैसा ही है जैसे दीये की लौ में रौशनी का। काशी की मलदहिया स्थित किसान फूल मंडी में आज धनतेरस के दिन भारी भीड़ है। सभी अपने अपने हिसाब से फूल माला खरीदने में मस्त हैं, पर दुकानदारों की मानें तो मार्केट में खरीदार तो है पर जो पिछले दिनों जो दस किलो फूल ले रहा था वो दो किलो से काम चला रहा है।

पेश है काशी की किसान फूलमंडी से इस दीपावली एक विशेष रिपोर्ट।

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चाह नहीं मैं सुरबाला के गहनों में गूंथा जाऊं, चाह नहीं, प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊं, चाह नहीं, सम्राटों के शव पर हे हरि, डाला जाऊं। प्रसिद्द कवि माखनलाल चतुर्वेदी की यह रचना मुझे सहसा उस वक़्त याद आ गयी जब मलदहिया स्थित किसान फूल मंडी में फूलों के ढेर के बीच बैठे दुकानदार मोल भाव कर रहे थे, और सौदा तय होते ही खिल उठ रहे थे जैसे कोई कच्ची कली फूट कर गुलाब बन गयी ही। दुकानदार चारों तरफ जमघट लगाए है तो खरीदार भी अपने हिसाब से बोली लगा रहे है। त्यौहार के ऊपर महंगाई मानो नाच रही है।

बेले का फूल मिलना बहुत मुश्किल है। मिलता भी है तो उसकी लड़ी काफी महंगी है पिछले दो दिनों से, हमारा क्या है साहब इसी त्यौहार में ही कमाई होती है, महंगा बेचना मजबूरी है यह कहना है चिरईगांव से फूल लाकर फूल मंडी में बेचने वाले राजकुमार का, राजकुमार बताते हैं कि रोज़ सुबह यहाँ गुलाब लेकर आता हूं। दो रोज़ पहले तक यहां गुलाब का फूल 60 से 70 रूपये किलो तक बिक रहा था क्योंकि मंडी का रेट यही था, पर आज सुबह से ही मंडी का रेट 100 रुपये से खुला है। दिन ढलने को है अभी तक दो किलो भी गुलाब नहीं बिका है बस ग्राहक आते है और मोल भाव करके चले जा रहे है।

वही रुस्तमपुर के दयालाल जो मुरली के फूल की माला बेच रहे जिसका दीपावली पर भगवान को चढ़ाने का विशेष महत्त्व है, बताते हैं कि यह फूल इसी सीज़न में होता है और इसका बहुत महत्व है दीपावली पर भगवान के सामने अर्पित करने का। यह आज 700 से 900 रूपये सैकड़ा है। सुबह से एक सैकड़ा बिका है। उसके अलावा गेंदे की माला जिसकी खपत दीपावली पर अत्याधिक है वह 200 से 1500 रूपये सैकड़ा है। मार्केट में खरीदार है पर कम खरीद रहे है।

गौरतलब है की इस फूल मंडी से पूर्वांचल के जौनपुर, चन्दौली, ग़ाज़ीपुर, इलाहाबाद, भदोही, आज़मगढ़, गोरखपुर तक के खरीदार आते है इसके अलावा बिहार के भभुआ, छपरा, बक्सर, आरा, कैमूर, समस्तीपुर तथा दरभंगा तक फूल की सप्लाई होती है।

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