हनुमत जयंती : शिव की नगरी में रुद्रावतार के जन्मोत्सव की धूम, देवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब

नारस। संकट हरण राम भक्त हनुमान ही हैं जिनका जन्मदिन साल में दो बार मनाया जाता है। एक, चैत्र पूर्णिमा तो दूसरा कार्तिक कृष्ण चौदस को। मान्य जन्म पत्र के अनुसार देवी अंजनी के गर्भ से हनुमान जी का जन्म कार्तिक कृष्ण चौदस को चित्रा नक्षत्र में हुआ था और चैत्र पूर्णिमा हनुमान जी के विजय अभिनंदन का पर्व है।

इसी क्रम में संकट मोचन मंदिर में हनुमान भक्तों का रेला सुबह से ही लग गया था। मंदिर परिसर में लंबी लाइन लगी थी। प्रभु के दर्शन-पूजन के लिए खुद महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र भी दोपहर तक जमे रहे।

उन्होंने मंदिर पहुंचे हनुमान भक्तों को प्रसाद वितरित किया। भक्तों ने महंत प्रो. मिश्र से आशीर्वाद ग्रहण किया। दर्शन-पूजन का सिलसिला जो भोर से शुरू हुआ वह लगातार जारी है।

उधर रेड जोन विश्वनाथ मंदिर के समीप अक्षयवट हनुमान मंदिर में पवन-पुत्र का विधि-विधान से जन्मोत्सव मनाया गया। सोमवार की देर रात चतुर्दशी तिथि पर मन्दिर के पुजारी निर्मल झा ने पूजन किया।

सर्वप्रथम अंजनी पुत्र का पंचामृत स्नान कराया गया। फिर नूतन वस्त्र धारण करा के गुलाब, गेंदा, कुंड के सुगन्धित मालाओं से भव्य श्रृंगार किया गया। ततपश्चात भोर में 3.30 बजे महंत नील कुमार मिश्रा ने महा आरती की। आरती के बाद दर्शन हेतु कपाट खोल दिया गया।

बाबा की नयन विराम झांकी देखने के लिए भक्तों भीड़ उमड़ी थी।  अक्षयवट हनुमान को लड्डू व बुनिया का भोग लगाकर भक्तों में वितरण किया किया गया।

मन्दिर के महंत कमल मिश्रा व अंकित मिश्रा ने भक्तों में प्रसाद वितरण कर रहे हैं। इस दौरान पूरे मन्दिर प्रांगण को रंग-बिरंगे गुब्बारों व विधुत झालरों से सजाया गया था।

इसी क्रम में दुर्गा मंदिर के पीछे स्थित बनकटी हनुमान मंदिर में भी राम भक्त हनुमान के दर्शन को भक्तों का जमावड़ा हुआ। मान्यता है कि इस मंदिर में 40 दिन लगातार दर्शन करने से भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है।

रथयात्रा स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर में भी भक्तों का रेला सुबह से ही लगा रहा। नीचीबाग स्थित पवनपुत्र के दरबार में भी आस्था का रेला देखने को मिला।