गोपाष्टमी पर पूजी गयी गौ माता, धर्मसंघ ने निकाली शोभायात्रा

नारस। गोपाष्टमी पर धर्मसंघ में गौ माता का विधिवत पूजन अर्चन किया गया। धर्मसंघ ने गौशाला में गौ माता का षडषोपचार विधि से पूजन किया उसके बाद भव्य शोभा यात्रा निकाली। गौरतलब है कि आज ही के दिन भगवान् इंद्र ने कामधेनु को भगवान् श्रीकृष्ण का अभिषेक करने भेजा था और भगवान् इंद्र ने अपनी हार मानी थी।

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इस सम्बन्ध में बात करते हुए धर्म संघ के सदस्य ने बताया कि गोपाष्टमी महापर्व है सनातन धर्म में इसका अति प्राचीन और बहुत अधिक महत्त्व है। आज ही के दिन भगवान् श्रीकृष्ण सात वर्ष के हुए थे। कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को। और जो वृन्दावन में विपत्ति आयी थी प्रतिपदा को भगवान् कृष्ण पर्वत को अपनी ऊँगली पर उठाये थे और सात दिन तक उठाये रहे थे। आज ही के दिन भगवान् इंद्र को दृष्टि आयी होश आया कि परमपिता परमेश्वर से हम बैर ले रहे हैं। आज ही के दिन गौ माता कामधेनु आकर भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक की और उसके बाद आज ही के दिन भगवान् श्रीकृष्ण जी का गोवर्धन पूजन हुआ।

आज ही के दिन भगवान् श्रीकृष्ण का नाम गोपाल पड़ा। इसके पहले वो कृष्ण के रूप में ही जाने जाते थे। गोपाल में गौ का अर्थ सिर्फ गऊ से नहीं है। गौ का दस अर्थ है संस्कृत जगत में लेकिन यहां इसका अर्थ पृथ्वी से है और आज ही के दिन भगवान् ने संकल्प किया कि गौ माता के साथ साथ पूरी पृथ्वी का पालन करूंगा। अपने सभी सनातनियों के कर्तव्य के पालन का स्मरण कराये तभी से यह गोपाष्टमी मनाई जाती है।

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