बनारस से बाबा रामदेव की चेतावनी, राम मंदिर नहीं बना तो देश में गरमाएगा साम्प्रदयिक माहौल

नारस। योग गुरु बाबा रामदेव ने राम मंदिर मुद्दे पर शुक्रवार को वाराणसी में एक विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर नहीं बना तो देश में साम्प्रदयिक माहौल गर्मा जाएगा और उससे सामाजिक वैमनस्य से देश को नुक्सान होने की आशंका है। हमें अभी नहीं तो कभी नहीं की अवधारणा पर कार्य करना होगा।

गौरतलब है कि राम मंदिर मामला इस समय सुप्रीम कोर्ट में हैं। वहीं कई संगठन संसद में कानून लाकर राम मंदिर निर्माण की बात कर रहे हैं।

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बाबा रामदेव ने कहा कि समझौते का दौर निकल चुका है संसद में कानून लाओ और मंदिर बनाओ और अभी नहीं तो कभी नहीं के प्रावधान पर ही हमें काम करना होगा।

वाराणसी पतंजलि फैशन स्टोर की ऐड फिल्म शूट करने पहुंचे बाबा रामदेव ने मणिकर्णिका घाट स्थित सतुआ बाबा आश्रम में एक पुस्तक के विमोचन के पहले बाबरी मस्जिद के मुस्लिम पक्षकार द्वारा कोर्ट से सुरक्षा की गुहार पर बोलते हुए कहा कि भारत देश में हिन्दू और मुसलमान किसी को कोई खतरे नहीं है, क्योंकि अहिंसा और प्रेम हमारे देश के मूल तत्व हैं इसलिए मज़हबी उन्माद राष्ट्र में नहीं है, लेकिन यदि राम मंदिर नहीं बना तो देश में एक साम्प्रदयिक माहौल गर्माएगा और उससे सामाजिक वैमनस्य से देश को नुक्सान होने की संभावना है।

बाब रामदेव ने कहा कि मंदिर बनाने के लिए संसद में अध्यादेश कहो या कानून कहो उसे तुरंत बनना चाहिए उसमे थोड़ा सा भी विलम्ब नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 25 वर्ष हो गए आस देखते देखते अब हमें अभी नहीं तो कभी नहीं की अवधारणा पर काम करना होगा और उसमे अध्यादेश कहो या कानून कहो आना ही चाहिए मंदिर निर्माण के लिए।

अयोध्या में 25 नवम्बर को विहिप की धर्म संसद पर बोलते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि धर्म संसद सिर्फ संसद पर दबाव के लिए नहीं है। सुप्रीम कोर्ट से इतना विलम्ब हुआ है कि लोगों का सब्र का बांध टूट गया है और संसद संविधान का लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर है और मोदी से बड़ा राम भक्त और देश भक्त प्रधानमन्त्री कब कौन होगा इसलिए सब देशवासियों की इच्छा है, और मै इसमें अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक सभी को जोड़ना चाहता हूं क्योंकि हिन्दू और मुसलमान दोनों के पूर्वज भगवान राम थे। इसलिए राम के मुद्दे पर मोदी सरकार संसद में नियम लाती है राम मंदिर बनाने के लिए मोदी सरकार तो कोई भी उसका विरोध करने की हिम्मत नहीं कर पायेगा क्योंकि इस देश में परस्पर दलों का विरोध हो सकता है राम का विरोध राष्ट्र में नहीं है।

भारतीय राजनीति में लगातार अभद्र भाषा के प्रयोग पर बोलते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि भारतीय राजनीति में संस्कार और संस्कृति क्षीण हो रही है। मौलिक अधिकारों की बात तो हो रही है लेकिन हमारे संवैधानिक और जो मौलिक नैतिक कर्त्वय हैं उनका ह्रास हो रहा है और इसके ऊपर पक्ष और प्रतिपक्ष, सत्ता पक्ष और विपक्ष को बहुत गंभीरता से सोचना चाहिए।

बाबा रामदेव ने कहा कि जो बड़े लोग हैं लीडरशिप में उनको सबसे पहले अपनी भाषा में सुधार करना चाहिए। गीता में लिखा है कि यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः । स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते। यदि राजनीती में जो शिखर पर लोग हैं वो अपनी भाषा पर नियंत्रण रखेंगे तो ये शालीनता बनी रहेगी।

रोज़ राजनीती में रोज़ एक दूसरे पर छींटाकशी होती है इसलिए मै पक्ष विपक्ष के मुद्दों में नहीं पढ़ना चाहता। मै सर्वदलीय निर्दलीय हूं। न किसी के पक्ष में न किसी के विपक्ष में मै निष्पक्ष हूं। वहीं तीन राज्यों के चुनाव को 20 – 20 की तरह बताया और कहा कि संघर्ष हो रहा है। परिणाम बहुत ही सुखद होंगे देश के लिए।

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