नारस। काशी विश्वनाथ मंदिर व्यास परिवार के जितेन्द्रनाथ व्यास और ज्ञानवापी का कार्य देखने वाली अंजुमन इंतेज़ामिया मस्जिद की ओर से विश्‍वनाथ कॉरीडोर प्रोजेक्‍ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई टल गयी है। दोनों ही समितियों ने शासन द्वारा विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में कराये जा रहे विश्वनाथ कॉरिडोर परीयोजना के अंतर्गत नव निर्माण और ध्वस्तीकरण को रोकने के लिए संयुक्त याचिका दायर की है।

गौरतलब है कि व्यास परिवार, श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर और अंजुमन इंतेज़ामिया मस्जिद, ज्ञानवापी मस्जिद के प्रबंधन का कार्य देखता है और शासन इनके बीच आपसी सहमति बनाने का काम करता है। दोनों ही पक्ष सिर्फ वहां मेंटेनेंस ही करवा सकते हैं, ना कोई नव निर्माण या ध्वस्तीकरण। इन दोनों ही की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दायर संयुक्त याचिका में कहा गया है कि शासन मनमाने तरीके से बिना प्रबंध समिति को बताये इस परिसर में तोड़फोड़ व नव निर्माण करवा रहा है।

गुरुवार को यह मामला न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा व अशोक भूषण की पीठ में सुनवाई के लिए लगा था, लेकिन सुनवाई एक सप्ताह के लिए टल गयी है। वकील फुजैल अहमद अयूबी के जरिए दाखिल की गयी याचिका में कहा गया है कि पहला याचिकाकर्ता काशी विश्वनाथ मंदिर के व्यास परिवार का सदस्य है और व्यास है। वह मंदिर और भगवान की पूजा अर्चना करता है, जबकि दूसरा याचिकाकर्ता ज्ञानवापी मस्जिद का प्रबंधन देखता है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि केन्द्र सरकार काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी परिसर में दखल दे रही है। कहा गया है कि पहला और दूसरा याचिकाकर्ता मिलकर वहां का प्रबंधन देखते हैं। व्यास परिवार और मस्जिद प्रबंधन के बीच मतभेद होने के बावजूद दोनों के बीच आमसहमति का करार होता ताकि दोनों समुदायों के बीच शांति कायम रहे और दोनों साथ साथ बने रहें। इस करार में राज्य सरकार बिचौलिये की भूमिका मे रहती है ताकि करार की शर्तो को लागू कराया जा सके और आपसी समझदारी कायम रहे।

याचिका में लिखा गया है कि काशी विश्वनाथ मंदिर और आस पास के क्षेत्रों में विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण कार्य के नाम पर केंद्र सरकार के इशारों पर स्थानीय प्रशासन उस क्षेत्र में किसी को जाने नहीं दे रहा है और लगातार ध्वस्तीकरण का कार्य चल रहा है। इस ध्वस्तीकरण के लिए दोनों ही प्रबंधन कमेटी से कोई इजाज़त नहीं ली गयी है। इतना ही नहीं प्रशासन ने संरक्षित धरोहर मंदिर के कुछ हिस्से और व्यास पीठ को भी ढहा दिया है। हाल ही में मस्जिद के एक चबूतरे को लेकर मस्जिद कमेटी और शासन में बातचीत भी हुई थी और उस चबूतरे को दुबारा बनवाया गया था। याचिका में पूरे परिसर की सुरक्षा मुहैया कराए जाने की भी मांग की गई है।