वाराणसी : धर्मसंघ में हुआ रूद्र भूमि पूजन व महाचंडी पाठ का आयोजन

नारस। ओंकराश्रम के महाधिपति श्री ओंकारानंद जी महाराज के नेतृत्व में रविवार रात्रि से सोमवार की सुबह तक रूद्र यज्ञ व महाचंडी, स्वामी जी की आत्मार्थ पूजा तत्पश्चात स्वामी जी के करकमलों से प्रसाद वितरण किया गया।

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इस दौरान स्वामीश्री ने बताया कि यज्ञ व तप करने से मन को शांति मिलती है। बताया कि रूद्रभूमि मे प्रवेश, जप रूद्र यज्ञ, रूद्र ध्यान, शिव पंचाक्षर महा जपा यज्ञ, महाचंडी यज्ञ आरती, दीपाराधन, आशीर्वाद व सिद्ध माताजी की 20 वें वर्ष की विशेष पूजा की गयी।

 

जीवन में है पांच मुख्य भक्तिया
स्वामीश्री ने इसके महत्व के बारे में बताया कि अनादि काल से अब तक काशी घाट में आये सभी जीवों को जीव प्रीति का सौभाग्य प्राप्त होता है। बताया कि जीवन की मुख्य 5 भक्‍तियां मातृ भक्ति, पितृ भक्ति, गुरू भक्ति, देव भक्ति तथा देश भक्ति है। अगर मनुष्य इन भक्तियों को अपने जीवन कर्म में लाता है उसको सदासुख की प्राप्ति होती है।

भूमि समस्त जगत की है जननी
स्वामीश्री ने बताया कि भूमि को समस्त जगत की जननी, जगत की पालक माना जाता है इसलिये इसलिये हिंदू धर्मग्रंथों में धरती को मां का दर्जा भी दिया गया है। भूमि यानि धरती से हमें क्या मिलता है यह सभी जानते हैं रहने को घर, खाने को अन्न, नदियां, झरने, गलियां, सड़कें सब धरती के सीने से तो गुजरते हैं।

इसलिये तो शास्त्रों में भूमि पर किसी भी कार्य को चाहे वह घर बनाने का हो या फिर सार्वजनिक इमारतों या मार्गों का, निर्माण से पहले भूमि पूजन का विधान है। माना जाता है कि भूमि पूजन न करने से निर्माण कार्य में कई प्रकार की बाधाएं उत्पन्न होती हैं।

वही स्वामी कोटेश्वरानंद ने बताया कि रूद्र पूजा रात्रि 8.30 से 11 व महाचंडी 11.30 से 2 बजे रात्रि तथा स्वामी जी के आत्मार्थ पूजा 2 बजे रात्रि से 4.30 तक चला, तदुपरांत स्वामी के कर कमलों से प्रसाद वितरण 4.30 से 5.30 तक चला।

भूमि पूजन के लिये गंगाजल, आम तथा पान वृक्ष के पत्ते, फूल, रोली एवं चावल, कलावा, लाल सूती कपड़ा, कपूर, देशी घी, कलश, कई तरह के फल, दुर्बा घास, नाग-नागिन जौड़ा, लौंग-इलायची, सुपारी, धूप-अगरबत्ती, सिक्के, हल्दी पाउडर आदि सामग्री की आवश्यकता होती है।

इस दौरान कुमार स्वामी कोटेश्वरानंद, ज्ञानेश्वरी, जे रामकृष्णा, एसएस करूणाकरण, सत्या सिवकुमरन आदि लोग मौजूद रहे।

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