राजस्‍थान में बजरंगबली को ‘दलित’ बताकर घिर गये CM योगी, शंकराचार्य ने कहा- ‘अपराध किया है’

नारस। राजस्थान के अलवर ज़िले में बजरंगबली को दलित बताने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान ने एक नयी बहस को जन्म दे दिया है। इस बयान के बाद कई धर्म प्रमुखों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में वाराणसी में परम धर्म संसद के ख़त्म होने के बाद मीडिया से मुखातिब शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि बजरंगबली कैसे दलित थे ये मुख्यमंत्री बताएं। योगी ने यह कहके अपराध किया है।

गौरतलब है कि बुधवार की सुबह अलवर की एक चुनावी जनसभा को सम्बोधित करने पहुंचे भाजपा के स्टार प्रचारक और उत्‍तर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने बजरंगबली को वनवासी और दलित बताया था, जिसके बाद यह विवाद शुरू हुआ।

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राजस्थान के अलवर जिले के मालाखेड़ा में एक सभा को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने बजरंगबली को दलित, वनवासी, गिरवासी और वंचित करार दिया। योगी ने इस दौरान कहा कि बजरंगबली एक ऐसे लोक देवता हैं जो स्वयं वनवासी हैं, गिरवासी हैं, दलित हैं और वंचित हैं।

इस सम्बन्ध में वाराणसी में मौजूद शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि बजरंगबली भगवान् शंकर के अवतार हैं। ये देवता लोग हैं। भगवान् का कार्य पूरा करने के लिए सबने अवतार लिया था, वानर और भालू के रूप में। देवता इन रूप में एकत्रित हुए थे धरती की रक्षा के लिए।

सीएम योगी के बयान पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भगवान् को दलित कहना यह स्वयं अपराध है क्योंकि हमारे यहाँ दलित नाम का कोई कोई शब्द नहीं था। दलित का अर्थ होता है कि जिसके साथ अत्याचार हुआ हो, जो अत्याचार से पीड़ित हो, आप ये बताइये हनुमान जी के साथ किसने अत्याचार किया। वो तो स्वयं सेवा कर रहे हैं। उपकार कर रहे हैं। तो उनको आप कैसे दलित कह सकते हैं।

यदि कोई व्यक्ति खुद को नीच कहता है, हीन कहता है और नम्रता के साथ कहता है तो उसे हम लोग उस रूप में नहीं लेते हैं। सूरदास कह रहे हैं कि मो सम कौन कुटिल खल कामी। तुम सौं कहा छिपी करुणामय, सबके अंतरजामी। जो तन दियौ ताहि विसरायौ, ऐसौ नोन-हरामी। हम उनको ऐसा कहेंगे वो उनकी नम्रता और श्रेष्ठता है। वो बड़े लोग हैं और ऐसा कहने से वो और बड़े हो जाते हैं।

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