वाराणसी : ख़त्म हुई परम धर्मसंसद, शंकराचार्य ने जारी किया 3 पन्ने का धर्मादेश

नारस। काशी में 25 नवम्बर से शुरू हुई परम् धर्म संसद मंगलवार को ख़त्म हो गयी। इस धर्म संसद के खत्म होने के बाद शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने तीन पन्नों का धर्मादेश जारी किया है। यह धर्मादेश 130 करोड़ जनता कि ओर से लोक सभा अध्यक्ष, देश के सभी लोक सभा और राज्य सभा सांसद को रजिस्टर्ड डाक से भेजा जाएगा। वहीं अयोध्या में भगवान् श्रीराम की प्रतिमा लगाने की बात पर शंकराचार्य ने कहा कि क्या भगवान् श्रीराम मनुष्य थे जो उनका पुतला लगाया जाएगा।

वाराणसी में शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के आह्वान पर आयोजित धर्म संसद समाप्त हो चुकी है। इस धर्म संसद के समाप्त होने के बाद शंकराचार्य ने बुधवार को 3 पन्नों का धर्मा देश जारी किया है। इस धर्मादेश में लिखा है कि राममंदिर का मामला लोकहित और राष्ट्रीय महत्त्व का है, इसलिए सरकार संविधान में संसोधन करे।

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धर्मादेश के अनुसार श्रीराम जन्मभूमि पर श्रीराम भगवान के मंदिर का त्वरित निर्माण सुनिश्चित करने हेतु सन्निहित भारतीय संसद से अनुरोध करते हुए प्रस्ताव भेजते हैं कि वह संविधान संशोधन करके भारतीय संविधान के अनुच्छेद 133 वह 136 में अनुच्छेद 226 (3 ) के अनुरूप एक नई कंडिका प्रविष्ट का प्रावधान करें, कि श्री राम जन्मभूमि का मामला राष्ट्रीय महत्व का और लोकहित से जुड़ा मामला है, यह स्थापित विधि व्यवस्था है कि यदि किसी मामले को अधिसूचना द्वारा केंद्र सरकार राष्ट्रीय महत्व अथवा लोकहित का घोषित करती है तो उच्चतम न्यायालय को 4 सप्ताह के भीतर ही ऐसे महत्वपूर्ण मामले का निपटारा करना होगा।

इस धर्मादेश में श्रीराम जन्मभूमि पुनर्द्वार समिति से अनुरोध किया गया है कि वह उच्चतम न्यायालय को एक समुचित आवेदन कर ध्यान आकृष्ट करे। तीन जजों की बेंच ने पहले ही कहा था कि श्री राम जन्म भूमि मामले को महत्वपूर्ण मानकर दिन प्रतिदिन इसकी सुनवाई होनी चाहिए। लखनऊ खंडपीठ में प्रति दिन सुनवाई हुई इसलिए वहां भी प्रतिदिन सुनवाई हो।

इस दौरान स्वामी स्वरूपानंद ने कहा 11 दिसंबर से सीत कालीन सत्र शुरू हो रहा है। संविधान में संशोधन कर के लोकहित का मामला बताते हुए न्यालय चार हफ्ते में निर्णय सुनाए। सारे पक्षकारो को नोटिस भी भेज दिया गया है। उन्होंने बताया 25 से 27 तारीख तक सीर गोवर्धन में आयोजित परम धर्म संसद में यही निर्णय आया है।

वहीं उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा सरयू तट पर भगवान् राम की प्रतिमा और स्मारक के सवाल पर कहा कि भगवान् राम मनुष्य थे क्या जो सरकार उनका पुतला और स्मारक बनवाना चाह रही है।

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