विश्वनाथ कॉरिडोर मामले में कोर्ट के आदेशों की हुई अवमानना, हाईकोर्ट ने दिखायी सख्‍ती

नारस। विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर परियोजना के अंतर्गत लगातार कॉरिडोर क्षेत्र में तोड़ फोड़ व मकानों की खरीद जारी है। इसी बीच सरस्वती फाटक स्थित विनायक भवन में स्थित एक दुकान पर हाईकोर्ट के स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) होने के बावजूद तोड़ने के मामले मे हाईकोर्ट ने इसे कोर्ट के आदेश की अवमानना माना है। कोर्ट ने मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और संबंधित ठेकेदार को प्रार्थी के प्रार्थना पत्र पर शपथ पत्र जमा करने के आदेश दिए हैं।

मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह और विश्वनाथ कॉरिडोर में तोड़फोड़ करवा रहे ठेकेदार को हाईकोर्ट ने कोर्ट की अवमानना के मामले में स्टे ऑर्डर के अनुपालन का शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश किया गया है। ऐसा नहीं करने पर मुख्य कार्यपालक अधिकारी और ठेकेदार को न्यायलय में तलब किये जाने का आदेश जारी किया है।

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गौरतलब है कि विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र के सरस्वती फाटक भवन संख्या सीके 34/60 दुर्मुख विनायक भवन की दुकानदार राधा सैनी की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में अवमानना की याचिका दाखिल की गयी है। इसमें विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और ठेकेदार पर षड्यंत्र रचकर स्थगन आदेश के बावजूद दुकान तोड़ने का आरोप लगाया गया है।

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए गुरूवार को हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने दोनों लोगों के खिलाफ हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना के मामले में प्रथमदृष्टया दोषी माना है। कोर्ट ने मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह और ठेकेदार दिलीप यादव को नोटिस जारी करते हुए एक माह के अंदर शपथ पत्र जमा करने के लिये नोटिस जारी किया है।

इस नोटिस के अनुसार यदि दूसरा पक्ष एक माह के अंदर शपथ पत्र इस सम्बन्ध में नहीं जमा करता है तो मुख्यकार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह और और ठेकेदार दिलीप यादव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में तलब किया जाए।

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