भैरव अष्‍टमी पर काशी के सभी भैरवों का हुआ श्रृंगार, कोतवाल दरबार में चढ़ा 651किलो का केक

नारस। काशी के कोतवाल कहे जाने वाले बाबा काल भैरव सहित काशी की सुरक्षा का जिम्‍मा संभालने वाले सभी आठ भैरवों का शुक्रवार को पूरी गर्मजोशी के साथ श्रृंगार किया गया। अवसर था बाबा के अवतरण दिवस का। अगहन (मार्गशीर्ष) महीने के कृष्‍णपक्ष की अष्‍टमी को भगवान शिव के क्रोधाग्‍नि विग्रह कहे जाने वाले भैरव का अवतरण दिवस होता है।

काल भैरव मंदिर में कटा केक
ऐसे में काशी में आठ रूपों में वास करने वाले बाबा भैरव के सभी मंदिरों में भैरव अष्‍टमी का पर्व पूरे उल्‍लास के साथ मनाया गया। वहीं काशी के कोतवाल कहे जाने वाले बाबा काल भैरव के दरबार में आस्‍थावान श्रद्धालुओं ने 651 किलोग्राम का केक काटकर अपने आराध्‍य का अवतरण दिवस मनाया। इस दौरान मंदिर को रंग बिरंगे गुब्‍बरों से सजाया गया था।

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ये हैं काशी के आठ भैरव
काशी पुराधिपति बाबा विश्‍वनाथ के शहर की रक्षा का दायित्‍व संभालने वाले आठो भैरवों के मंदिरों की आज शोभा देखते ही बन रही थी। इनमें 1. विश्‍वेश्‍वरगंज स्‍थित बाबा कालभैरव, 2. नीचीबाग स्‍थित बाबा आस भैरव, 3. कमच्‍छा स्‍थित बाबा बटुक भैरव, 4. कमच्‍छा स्‍थित बाबा आदि भैरव, 5. नखास स्‍थित बाबा भूत भैरव, 6. कज्‍जाकपुरा स्‍थित बाबा लाट भैरव, 7. मीरघाट स्‍थित बाबा संहार भैरव और 8. मालवीय मार्केट स्‍थित बाबा क्षत्रपाल भैरव के अलावा दंडपाणि भैरव के मंदिर में दर्शनार्थियों का सुबह से ही तांता लगा रहा। वहीं शाम को सभी मंदिरों पर स्‍थानीय पूजा समितियों की ओर से भंडारे का भी आयोजन किया गया।

बनारस में रहना है तो भैरव से लेनी होगी अनुमति
काशी भगवान भोलेनाथ और माता अन्‍नपूर्णा की नगरी है। ये ही इस शहर के अधिपति और अधिष्‍ठात्रि हैं। अत: शिव और अन्‍नपूर्णा की नगरी काशी की सुरक्षा का पूरा जिम्‍मा भोलेनाथ के क्रोधाग्‍नि विग्रह बाबा काल भैरव और उनके सहित आठ अन्‍य भैरवों पर है। ऐसे में शहर में बिना इनकी अनुमति के बसना असंभव माना जाता है। काशी में सदैव के लिये निवास करने के लिये बाबा काल भैरव से अनुमति लेना अति आवश्‍यक माना गया है। हजारों साल से ये परंपरा आज भी यथावत है।

यही कारण है कि वाराणसी की प्रशासनिक, राजनीतिक या पुलिस व्‍यवस्‍था संभालने वाला प्रत्‍येक अधिकारी और राजनेता सबसे पहले बाबा काल भैरव के मंदिर में ही हाजिरी लगाता है। यहीं से उसे श्रीकाशी विश्‍वनाथ के दरबार में मत्‍था टेकने की अनुमति मिलती है। बिना काल भैरव दरबार में मत्‍था टेके विश्‍वनाथ दरबार का फल प्राप्‍त नहीं होता, ऐसी मान्‍यता है।

मोदी-योगी भी लगा चुके हैं हाजिरी
दुनिया के ताकतवर नेताओं की श्रेणी में शामिल हो चुके देश के प्रधानमंत्री और वाराणसी के सांसद नरेन्‍द्र मोदी भी सांसदी का चुनाव जीतने के बाद बाबा काल भैरव के दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं। यही नहीं प्रदेश का मुख्‍यमंत्री बनने के बाद खुद योगी आदित्‍यनाथ भी बाबा के दरबार में मत्‍था टेकने आ चुके हैं।

बाबा बहुत भोले हैं
बात अगर करें बाबा भैरव के प्रसाद की तो इसके लिये ज्‍यादा टेंशन लेने की आवश्‍क्‍ता नहीं होती। भोलेनाथ के अंश होने के कारण थोड़ा भोलापन इनमें भी देखने को मिलता है। बाबा को सबकुछ पसंद है। कोई चाहे टॉफी हो या बिस्‍किट, मिठाई हो या मदिरा, यहां तक कि बाबा गांजा और भांग के भी शौकीन हैं। भक्‍त अपने सामर्थ्‍य और श्रद्धानुसार इन्‍हें कुछ भी समर्पित कर सकते हैं।

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