नारस। गंगा स्वच्छता अभियान और नमामि गंगे परियोजना की समीक्षा के लिए वाराणसी पहुंची विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण एवं वन विभाग की आठ सदस्यीय संसदीय समिति गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए हो रहे कार्यों से असंतुष्ट नज़र आयी। सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि गंगा का माहात्म्य बताने की ज़रुरत नहीं है। बुधवार को तीन नावों पर सवार होकर आठ सदस्य संसदीय समिति ने दशाश्वमेध से अस्सी घाट तक की व्यवस्था देखी।

इस दौरान अधिकारियों से बैठक के दौरान आठ सदस्य समिति ने डीज़ल बोटों के गंगा में चलने पर रोक लगाने की बात भी रखी है।

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कमिश्नरी सभागार में गंगा स्वच्छता और नमामि गंगा परियोजना की समीक्षा के दौरान समिति के सदस्यों ने अधिकारियों से इस बाबत नाराज़गी व्यक्त की और कहा कि गंगा का महात्म्य बताने की ज़रुरत नहीं है। गगंगा की सफाई में और तेज़ी लाने की आवश्यकता हैं। संसदीय समिति ने अधिकारियों से प्रस्तावित योजनाओं पर संतोषजनक काम नहीं होने पर सवाल उठाएं और पूछताछ की।

समिति ने परियोजनाओं की धीमी रफ्तार पर असंतोष जताया। साथ ही गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट जल्द तैयार करने से लेकर डीजल बोट पर रोक का सुझाव भी दिया। इसके अलावा अलग-अलग विभागों की ओर से गंगा स्वच्छता और घाटों के सौंदर्यीकरण पर कराए जा रहे कामों की समीक्षा भी की।

गंगा स्वच्छता अभियान और नमामि गंगे परियोजना की समीक्षा के लिए वाराणसी पहुंची विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण एवं वन विभाग की आठ सदस्यीय संसदीय समिति ने इसके पहले नावों से दशाश्वमेध घाट तक नौकायान भी किया और नगर निगम और प्रशासन के अफसरों ने सफाई और व्यवस्था के अलावा घाटों की प्राचीनता की जानकारी भी ली।

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