नयी पर्यटन नीति में शामिल हुआ मीरघाट का विशालाक्षी देवी मंदिर, 20 किमी के दायरे में मिलेगी कई सहूलियतें

नारस। धर्म और संस्कृति की नगरी काशी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नित्य नयी योजनाएं लागू हो रही हैं। इसी क्रम में पर्यटन के क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने पर्यटन नीति में संशोधन किया है। इस नये संशोधन के बाद वाराणसी में सारनाथ के बाद अब गंगा तट पर स्थित विशालाक्षी देवी मंदिर को भी नयी पर्यटन नीति में शामिल में किया है।

इस संशोधन के बाद मंदिर के 20 किलोमीटर के एरिया में किसी को भी सम्पत्ति की रजिस्ट्री पर स्टाम्प शुल्क नहीं देना पड़ेगा।

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पर्यटन के क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने पर्यटन नीति में संशोधन किया है। इस समबन्ध में शासनदेश भी जारी हुआ है। इस शासनदेश में शहर के मीरघाट स्थित विशालाक्षी देवी मंदिर को भी शामिल किया गया है। इसमें प्रदेश के कई नये स्थानों के विकास व लघु उद्योगों को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है। इस संबंध में जारी शासनादेश के मुताबिक पर्यटन नीति में वाराणसी, गाजीपुर, चंदौली, जौनपुर, मीरजापुर, सोनभद्र व भदोही के कई पौराणिक स्थल जोड़े गये हैं।

बनारस में मीरघाट स्थित विशालाक्षी देवी मंदिर को इसमें शामिल किया गया है। इससे पहले सिर्फ सारनाथ ही पर्यटन नीति में शामिल था। पर्यटन नीति में शामिल किए गए नये स्थानों पर निवेशकों को निवेश के लिए प्रेरित किया जाएगा। इन स्थानों के 20 किलोमीटर के आसपास के क्षेत्र में प्रोजेक्ट लगाने पर 12 से 20 फीसद तक सब्सिडी दी जाएगी। साथ ही निवेशकों को संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर स्टांप शुल्क नहीं देना पड़ेगा।

इन सर्किटों में शामिल है वाराणसी के विभिन्न स्थान और वस्तुएं
क्राफ्ट सर्किट : इसमें बनारस से बनारसी साड़ी, गुलाबी मीनाकारी, लकड़ी के खिलौने, स्टोन कारविंग को शामिल किया गया है। वहीं जौनपुर के जरी वर्क और मीरजापुर के पीतल बर्तन कारोबार को जोड़ा गया है।

जैन सर्किट : इसमें बनारस के पा‌र्श्वनाथ, श्रेयांसनाथ, सुपा‌र्श्वनाथ व चंद्रप्रभु से जुड़े स्थान को शामिल किया गया है।

सूफी-कबीर सर्किट : इस सर्किट में बनारस के कबीर जन्म स्थल लहरतारा आश्रम को शामिल किया गया है।

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